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वित्त वर्ष 26 में भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एयूएम 12% की वृद्धि के साथ 73.73 लाख करोड़ रुपए तक पहुँचा

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वित्त वर्ष 26 में भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एयूएम 12% की वृद्धि के साथ 73.73 लाख करोड़ रुपए तक पहुँचा

सारांश

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में वित्त वर्ष 26 में एयूएम में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जानें इस वृद्धि के पीछे के कारण और म्यूचुअल फंड निवेश की दिशा में रिटेल निवेशकों का विश्वास।

मुख्य बातें

73.73 लाख करोड़ रुपए का एयूएम वित्त वर्ष 26 में दर्ज किया गया।
मार्च में 32,087 करोड़ रुपए का एसआईपी इनफ्लो हुआ।
इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में 40,450.26 करोड़ रुपए का इनफ्लो देखने को मिला।
मार्च में 2.39 लाख करोड़ रुपए का नेट आउटफ्लो हुआ।
गोल्ड ईटीएफ में 2,266 करोड़ रुपए का इनफ्लो घटा।

मुंबई, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) वित्त वर्ष 26 में सालाना 12.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 73.73 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया है। इस अवधि में इंडस्ट्री का कुल एसेट बेस 8 लाख करोड़ रुपए बढ़ा है। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा जारी आंकड़ों में दी गई है।

एम्फी के डेटा के अनुसार, वैश्विक स्तर पर अस्थिरता के बावजूद सक्रिय इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश बढ़कर 40,450.26 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि जुलाई 2025 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह आंकड़ा फरवरी में 25,977.81 करोड़ रुपए था।

मार्च में एसआईपी निवेश का प्रवाह 32,087 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले महीने 29,845 करोड़ रुपए था। यह दर्शाता है कि रिटेल निवेशक बाजार की अस्थिरता के बीच दीर्घकालिक निवेश की ओर अग्रसर हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि इक्विटी में इस उछाल का कारण साल के अंत में पोर्टफोलियो आवंटन और पश्चिम एशिया में तनाव के बाद हालिया गिरावट में कम मूल्यांकन पर निवेश करना है।

हालांकि, मार्च में म्यूचुअल फंड क्षेत्र में 2.39 लाख करोड़ रुपए का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया, जबकि फरवरी में 94,530 करोड़ रुपए का नेट इनफ्लो हुआ था। मार्च में डेट म्यूचुअल फंड में 2.94 लाख करोड़ रुपए का आउटफ्लो भी देखा गया।

इसके अलावा, मार्च में गोल्ड ईटीएफ का निवेश घटकर 2,266 करोड़ रुपए रह गया, जबकि फरवरी में यह 5,254.95 करोड़ रुपए था।

इक्विटी श्रेणी में मार्च में फ्लेक्सी-कैप फंड्स में सबसे अधिक 10,054.12 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जो फरवरी में 6,924.65 करोड़ रुपए था। स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंडों में क्रमशः 6,263.56 करोड़ रुपए और 6,063.53 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जबकि पिछले महीने यह क्रमशः 3,881.06 करोड़ रुपए और 4,002.99 करोड़ रुपए था। वहीं, लार्ज-कैप फंडों में 2,997.84 करोड़ रुपए का निवेश हुआ।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में एसेट अंडर मैनेजमेंट में वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि रिटेल निवेशक दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ निवेश कर रहे हैं, भले ही बाजार में अस्थिरता हो।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में एयूएम की वृद्धि के मुख्य कारण क्या हैं?
वित्त वर्ष 26 में एयूएम की वृद्धि का मुख्य कारण सक्रिय इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में बढ़ता निवेश और रिटेल निवेशकों का दीर्घकालिक निवेश है।
मार्च 2026 में म्यूचुअल फंड्स में क्या स्थिति थी?
मार्च 2026 में म्यूचुअल फंड उद्योग में 2.39 लाख करोड़ रुपए का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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