25 सितंबर 2026
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हिमंता बिस्वा सरमा ने CEC इस्तीफे के CJP के 48 घंटे के अल्टीमेटम को बताया 'हास्यास्पद'

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हिमंता बिस्वा सरमा ने CEC इस्तीफे के CJP के 48 घंटे के अल्टीमेटम को बताया 'हास्यास्पद'

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने CJP के उस अल्टीमेटम को सीधे 'हास्यास्पद' कहकर खारिज कर दिया, जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में इस्तीफा माँगा गया। SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद और CJP की 'जंतर मंतर 2.0' की धमकी — विवाद अभी थमने के आसार नहीं।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 25 सितंबर 2026 को CJP के 48 घंटे के इस्तीफा अल्टीमेटम को 'हास्यास्पद और निरर्थक' बताया।
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की माँग की है और मांग न मानने पर ' जंतर मंतर 2.0 ' समेत देशव्यापी आंदोलन की धमकी दी है।
सरमा ने कहा कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) सामूहिक रूप से काम करता है — निर्णय अकेले CEC नहीं ले सकते।
ECI के भीतर मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़े निर्णयों पर कथित तौर पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्तियाँ जताई हैं।
CJP ने आगामी चुनावों को स्थगित करने और SIR प्रक्रिया को पूर्व स्वरूप में वापस लाने की भी माँग रखी है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उस अल्टीमेटम को 'निरर्थक और हास्यास्पद' करार दिया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से 48 घंटों के भीतर इस्तीफा माँगा गया है। सरमा ने स्पष्ट किया कि CJP की यह माँग किसी संवैधानिक आधार पर नहीं टिकती।

मुख्यमंत्री की सीधी प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, 'CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे के भीतर इस्तीफे की मांग करे — यह एक हास्यास्पद टिप्पणी है। वे कल मुझसे भी इस्तीफे की मांग कर सकते हैं, लेकिन निश्चित रूप से मैं कोई जवाब नहीं दूंगा।' उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति से इस्तीफे की मांग करना पूरी तरह निराधार है।

चुनाव आयोग की सामूहिक कार्यप्रणाली पर जोर

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की संस्थागत संरचना की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि CEC अन्य चुनाव आयुक्तों की अनदेखी करके कोई भी निर्णय अकेले नहीं ले सकते — आयोग सामूहिक रूप से कार्य करता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया से जुड़े कुछ निर्णयों पर आपत्तियाँ दर्ज कराए जाने का उल्लेख किया गया है।

CJP की माँगें और धमकी

CJP ने चुनाव आयोग के कामकाज और चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन ने माँग की है कि आगामी चुनावों को स्थगित किया जाए और SIR प्रक्रिया को उसके पूर्व स्वरूप में वापस लाया जाए। CJP ने चेतावनी दी है कि यदि CEC ज्ञानेश कुमार ने निर्धारित समयसीमा में इस्तीफा नहीं दिया, तो वह 'जंतर मंतर 2.0' समेत देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी।

चुनाव आयोग का पक्ष और आंतरिक मतभेद

चुनाव आयोग ने कहा है कि संशोधन प्रक्रिया से संबंधित सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। हालाँकि, मीडिया रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कई मौकों पर उठाई गई आपत्तियों का उल्लेख किया गया है — जो सर्वसम्मति के आधिकारिक दावे से मेल नहीं खाता। गौरतलब है कि यह विवाद SIR के उन निर्णयों को लेकर उभरा है, जिन पर विपक्षी दल पहले से सवाल उठाते रहे हैं।

आगे की राजनीतिक दिशा

मुख्यमंत्री सरमा की यह तीखी प्रतिक्रिया मतदाता सूची, ECI के कामकाज और SIR प्रक्रिया को लेकर तेज होती राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के बीच आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग के निर्णयों को उसके सामूहिक संस्थागत ढाँचे के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि केवल CEC के व्यक्तिगत आचरण के नजरिए से। यदि CJP अपनी घोषणा के अनुसार विरोध प्रदर्शन करती है, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक गर्मी पैदा कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस असली सवाल से ध्यान नहीं हटा सकता — कि क्या SIR प्रक्रिया पर ECI के भीतर वाकई मतभेद थे। आयोग का 'सर्वसम्मति' का दावा और मीडिया में दो आयुक्तों की कथित आपत्तियों का उल्लेख एक साथ सच नहीं हो सकते — इस विरोधाभास की जाँच जरूरी है। सरमा की तीखी प्रतिक्रिया BJP की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा लगती है जो विपक्ष की संस्थागत आलोचना को अतिवाद के रूप में पेश करती है। लेकिन चुनावी तैयारी के बीच ECI की साख पर उठे सवालों को खारिज करना और उनका उत्तर देना — दोनों अलग-अलग काम हैं।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की माँग क्यों की?
CJP ने चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया को लेकर आरोप लगाते हुए CEC ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे में इस्तीफे की माँग की है। संगठन का आरोप है कि आयोग का कामकाज पारदर्शी नहीं रहा और SIR प्रक्रिया में बदलाव किए गए।
हिमंता बिस्वा सरमा ने CJP के अल्टीमेटम को 'हास्यास्पद' क्यों कहा?
असम के मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से इस्तीफे की माँग करना निराधार है और CJP की यह माँग किसी संवैधानिक आधार पर नहीं टिकती। उन्होंने कहा कि कोई भी दल किसी से भी इस्तीफा माँग सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उसका पालन किया जाए।
SIR (विशेष गहन संशोधन) प्रक्रिया क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR यानी मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन एक प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूचियों की व्यापक समीक्षा करता है। इस पर विवाद इसलिए है क्योंकि कथित तौर पर दो चुनाव आयुक्तों ने इससे जुड़े कुछ निर्णयों पर आपत्तियाँ जताई हैं, जबकि ECI ने दावा किया है कि सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
'जंतर मंतर 2.0' आंदोलन क्या है?
CJP ने घोषणा की है कि यदि CEC ज्ञानेश कुमार 48 घंटे में इस्तीफा नहीं देते, तो वह 'जंतर मंतर 2.0' नाम से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। यह नाम पहले के बड़े जन-आंदोलनों की याद दिलाता है जो नई दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए थे।
क्या ECI के भीतर SIR पर वाकई मतभेद हैं?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया से जुड़े कुछ निर्णयों पर कई मौकों पर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। हालाँकि, ECI ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि ये निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।
राष्ट्र प्रेस
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