13 अक्टूबर 2026
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हिमंता बिस्वा सरमा की राहुल गांधी को चुनौती: चुनाव में खामी है तो 5 राज्यों की सरकारें छोड़ें

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हिमंता बिस्वा सरमा की राहुल गांधी को चुनौती: चुनाव में खामी है तो 5 राज्यों की सरकारें छोड़ें

सारांश

असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी के चुनाव आयोग-विरोधी अभियान पर पलटवार किया — केरल, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु की सरकारें छोड़ने और पाँच राज्यों में चुनाव बहिष्कार की चुनौती देकर कांग्रेस के 'चयनात्मक' रवैये पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी को चुनौती दी कि चुनाव प्रक्रिया को दोषपूर्ण मानते हैं तो 5 विपक्ष-शासित राज्यों की सरकारें भंग करें।
सरमा ने गांधी को केरल, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु में इस्तीफे की माँग करने को कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस UP, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड के भावी चुनाव न लड़ने की घोषणा करे।
सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जीत पर ईवीएम स्वीकार करती है और हार पर प्रक्रिया पर सवाल उठाती है — यह दोहरा मापदंड है।
राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष नेता का दर्जा उसी चुनावी प्रणाली से मिला है जिसे वे अब संदिग्ध बता रहे हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 12 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कड़ी चुनौती दी — यदि वे वाकई मानते हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं, तो उन्हें विपक्ष-शासित राज्यों में अपनी सरकारें भंग करनी चाहिए और चुनाव बहिष्कार का ऐलान करना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज को लेकर अपना अभियान तेज किया हुआ है।

सरमा की मुख्य चुनौती

सरमा ने तर्क दिया कि राहुल गांधी एक ओर चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं, दूसरी ओर उसी प्रणाली के तहत जीते गए पदों और सरकारों पर काबिज बने रहते हैं। उन्होंने गांधी को सीधे कहा कि वे केरल, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु की अपने गठबंधन की सरकारों से इस्तीफा दिलाएँ।

सरमा ने यह भी कहा कि गांधी को घोषणा करनी चाहिए कि जब तक ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बने रहेंगे, कांग्रेस उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में कोई चुनाव नहीं लड़ेगी।

चयनात्मक रवैये पर आरोप

असम के मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी परिणामों को लेकर दोहरा मापदंड अपना रही है। उनके अनुसार, जब परिणाम पक्ष में आते हैं तो पार्टी चुनाव आयोग और ईवीएम को सही मानती है, और जब नतीजे विपरीत जाते हैं तो पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बताने लगती है।

उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'आप चुनाव जीतते हैं, तो ईवीएम ठीक हैं। मैं चुनाव जीतता हूँ, तो चुनाव गलत है।' यह असम और बंगाल के हालिया चुनाव नतीजों पर राहुल गांधी की टिप्पणियों के संदर्भ में कहा गया।

विपक्ष के नेता पद पर सवाल

सरमा ने यह भी इंगित किया कि राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष के नेता का दर्जा उसी चुनावी प्रणाली के माध्यम से मिला है जिसकी वे अब आलोचना कर रहे हैं। उनका तर्क था कि संवैधानिक संस्थाओं को तभी चुनौती देना उचित नहीं, जब राजनीतिक परिणाम प्रतिकूल हों।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं ने कांग्रेस के चुनाव आयोग-विरोधी अभियान पर इसी तरह का जवाबी तर्क दिया हो। विशेषज्ञों के अनुसार, चुनावी वैधता का यह विमर्श आगामी विधानसभा चुनावों से पहले और अधिक तीखा होने की संभावना है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

कांग्रेस पिछले कुछ हफ्तों से ECI के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव संचालन में पारदर्शिता की कमी है। सरमा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस राजनीतिक प्रदर्शन सुधारने के बजाय संस्थाओं को बदनाम करने की राह पर है।

आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इन आरोपों का जवाब अपेक्षित है, और यह विवाद देश के चुनावी विमर्श में केंद्रीय मुद्दा बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े सवाल को टालता है जो कांग्रेस उठा रही है — क्या चुनाव आयोग की संस्थागत स्वायत्तता पर्याप्त है? जीत-हार के आधार पर संस्थाओं को कोसना निश्चित रूप से चयनात्मक है, लेकिन इसका जवाब 'तुम भी तो ऐसा करते हो' तर्क से नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही से मिलना चाहिए। मुख्यधारा की कवरेज इस राजनीतिक जुबानी जंग में उलझ जाती है, जबकि असली मुद्दा — मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन — पीछे रह जाता है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी को क्या चुनौती दी?
सरमा ने राहुल गांधी को चुनौती दी कि यदि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निष्पक्ष चुनाव असंभव मानते हैं, तो केरल, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु की विपक्ष-गठबंधन सरकारें भंग कराएँ। साथ ही UP, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड के भावी चुनावों से दूर रहने की घोषणा भी करें।
कांग्रेस चुनाव आयोग की आलोचना क्यों कर रही है?
कांग्रेस पिछले कुछ हफ्तों से ECI के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव संचालन में पारदर्शिता की कमी है और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर चिंताएँ हैं।
सरमा ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड का आरोप क्यों लगाया?
सरमा का तर्क है कि कांग्रेस उन्हीं चुनावों के नतीजे स्वीकार करती है जहाँ उसे जीत मिलती है, और हार पर चुनाव प्रक्रिया को संदिग्ध बताती है। उनके अनुसार राहुल गांधी ने लोकसभा में विपक्ष नेता का पद भी उसी चुनावी प्रणाली के जरिए हासिल किया है जिसे वे अब कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
इस विवाद का आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, चुनावी वैधता और संस्थागत विश्वसनीयता का यह विमर्श आगामी विधानसभा चुनावों से पहले और तीखा होने की संभावना है। BJP और कांग्रेस दोनों इस मुद्दे को जनता के बीच अपनी-अपनी कथा के अनुसार प्रस्तुत करने की कोशिश करेंगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कौन हैं?
ज्ञानेश कुमार वर्तमान में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर हैं। कांग्रेस उनकी नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यशैली पर सवाल उठाती रही है, जबकि सरकार और BJP उनके नेतृत्व में चुनावों की निष्पक्षता का बचाव कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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