27 सितंबर 2026
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चुनाव आयोग पर हमला कांग्रेस का तय पैटर्न: हिमंता बिस्वा सरमा का राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार

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चुनाव आयोग पर हमला कांग्रेस का तय पैटर्न: हिमंता बिस्वा सरमा का राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार

सारांश

चुनाव आयोग के SIR विवाद पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमला बोला — संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करना उनका 'तय पैटर्न' है। ममता बनर्जी की हार का हवाला देकर SIR आरोपों को खारिज किया और माफी की माँग की।

मुख्य बातें

हिमंता बिस्वा सरमा ने 27 सितंबर 2026 को कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी का चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय, सेना और CAG पर हमला एक 'तय पैटर्न' है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR पर सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे, आयोग में कोई मतभेद नहीं था।
सरमा ने राहुल गांधी और कांग्रेस से आयोग पर झूठे आरोप लगाने के लिए देश से सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की।
ममता बनर्जी की हार का हवाला देते हुए सरमा ने कहा कि जिस सीट पर SIR ने 2,000 वोट भी नहीं हटाए, वहाँ भी वे हारीं।
सरमा ने इंडिया ब्लॉक को 'हारे हुए और निराश लोगों का गठबंधन' बताया।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और उसके नेता राहुल गांधी का देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करना और उनका मनोबल गिराना एक 'तय पैटर्न' बन चुका है। उनका यह बयान चुनाव आयोग (ECI) द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर अपनी सफाई जारी किए जाने के एक दिन बाद आया है।

चुनाव आयोग की सफाई और विपक्ष का आरोप

सरमा ने कहा, 'शनिवार को भारत के चुनाव आयोग की पूरी बेंच ने जनता को बताया कि SIR के बारे में लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने एकजुट होकर फैसले लिए और SIR या फॉर्म 6 को लेकर आयोग के अंदर कोई मतभेद नहीं था।' उन्होंने कहा कि आयोग की इस सफाई से पहले कांग्रेस और उससे जुड़े तबकों ने पूरे देश में हंगामा खड़ा किया, यह दावा किया कि आयोग के भीतर मतभेद थे, SIR गलत था और मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा दे देना चाहिए।

सरमा ने सवाल उठाया, 'अब जब चुनाव आयोग ने अपनी सफाई जारी कर दी है, तो क्या राहुल गांधी देश से माफी मांगेंगे? क्या कांग्रेस का यह पूरा इकोसिस्टम देश से माफी मांगेगा?' गौरतलब है कि आयोग ने स्पष्ट किया कि तीनों आयुक्तों ने इस मामले में एकमत से निर्णय लिया था, जो उनके फैसले को और भी मजबूत आधार देता है।

संवैधानिक संस्थाओं पर हमले का आरोप

असम के मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी का चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय, भारतीय सेना और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) — यानी देश की हर संवैधानिक संस्था पर हमला करना एक सुनियोजित रणनीति बन चुकी है। उन्होंने कहा, 'जब भी सर्वोच्च न्यायालय का कोई न्यायाधीश उनके विरुद्ध फैसला सुनाता है, तो वे उनके परिवार को निशाना बनाने लगते हैं।'

सरमा ने सेना पर उनके रुख का उदाहरण देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब पाकिस्तान ने दावा किया कि भारतीय विमान नष्ट हुआ, तो विपक्ष ने पाकिस्तानी दावे का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'जब भारतीय वायु सेना ने स्पष्ट किया कि कोई विमान नहीं खोया था, तब भी उन्होंने वायु सेना का नहीं, पाकिस्तानी सरकार का पक्ष लिया।'

इंडी ब्लॉक और राहुल गांधी पर तंज

सरमा ने इंडिया ब्लॉक को 'हारे हुए और निराश लोगों का गठबंधन' करार दिया। उन्होंने कहा कि इस गठबंधन के एक साथ आने का देश की जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, 'उन्हें अपनी 100वीं हार का जश्न मनाना चाहिए।' उनके अनुसार, चुनावी विफलता की कुंठा ही संवैधानिक संस्थाओं पर इन हमलों की असली वजह है।

ममता बनर्जी पर सरमा का सीधा हमला

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के SIR पर दिए गए बयान पर सरमा ने कहा कि वे खुद चुनाव हार चुकी हैं और पिछली बार भी SIR के बिना अपनी विधानसभा सीट गँवा चुकी थीं। उन्होंने कहा, 'जिस सीट पर SIR ने 2,000 वोट भी नहीं हटाए थे, वहाँ भी ममता बनर्जी चुनाव हार गईं।' सरमा ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग पर हमला दरअसल बंगाल के लोगों के लोकतांत्रिक फैसले पर हमला है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति

यह बयान ऐसे समय में आया है जब SIR को लेकर विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच तनाव चरम पर है। चुनाव आयोग की सफाई के बाद सत्तारूढ़ दल के नेता विपक्ष से जवाबदेही की माँग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक विवाद और गहराने की संभावना है, खासकर तब जब इंडिया ब्लॉक की बैठकों का सिलसिला जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब विपक्ष बैकफुट पर है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी, क्योंकि 'सर्वसम्मत फैसला' और 'निष्पक्ष प्रक्रिया' दो अलग बातें हैं। संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना को देशद्रोह बताने की प्रवृत्ति लोकतंत्र में जवाबदेही की जगह को संकुचित करती है — चाहे वह आलोचना उचित हो या अनुचित। विपक्ष को जहाँ तथ्यों से परे जाने से बचना चाहिए, वहीं सत्तापक्ष को भी असहमति और संस्थागत सवाल के बीच की रेखा मिटाने से।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमंता बिस्वा सरमा ने चुनाव आयोग के SIR विवाद पर क्या कहा?
सरमा ने कहा कि चुनाव आयोग की पूरी बेंच ने स्पष्ट किया कि SIR पर सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और आयोग के अंदर कोई मतभेद नहीं था। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस से इस मुद्दे पर देश से माफी माँगने की माँग की।
SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और यह विवाद क्यों बना?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की समीक्षा की एक प्रक्रिया है। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि इस प्रक्रिया में आयोग के अंदर मतभेद थे और यह गलत तरीके से लागू की गई, जिसे आयोग ने बाद में खारिज किया।
सरमा ने ममता बनर्जी के बारे में क्या कहा?
सरमा ने कहा कि ममता बनर्जी उस सीट पर भी चुनाव हार गईं जहाँ SIR ने 2,000 वोट भी नहीं हटाए थे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पर हमला करना दरअसल बंगाल के लोगों के लोकतांत्रिक फैसले पर हमला है।
सरमा ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
सरमा ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब पाकिस्तान ने भारतीय विमान नष्ट होने का दावा किया, तो विपक्ष ने भारतीय वायु सेना का नहीं बल्कि पाकिस्तानी सरकार का पक्ष लिया। उन्होंने इसे सेना के मनोबल पर हमले का उदाहरण बताया।
इंडिया ब्लॉक पर सरमा का क्या रुख है?
सरमा ने इंडिया ब्लॉक को 'हारे हुए और निराश लोगों का गठबंधन' बताया और कहा कि इसके एकजुट होने से जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि चुनावी विफलताओं की कुंठा ही संवैधानिक संस्थाओं पर हमलों की असली वजह है।
राष्ट्र प्रेस
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