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हिमंत बिस्वा सरमा का राहुल गांधी पर हमला: UCC समर्थन की चुनौती, महिला अधिकारों पर उठाए सवाल

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हिमंत बिस्वा सरमा का राहुल गांधी पर हमला: UCC समर्थन की चुनौती, महिला अधिकारों पर उठाए सवाल

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर राहुल गांधी को सीधी चुनौती दी — महिला अधिकारों की आड़ में हिंदू-विरोध का आरोप लगाया और पूछा: क्या वे UCC का समर्थन करेंगे? शाह बानो फैसले से लेकर कर्नाटक कैबिनेट तक, सरमा ने कांग्रेस के रिकॉर्ड को कटघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 24 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर राहुल गांधी पर महिला अधिकारों के मुद्दे पर चुनिंदा रवैये का आरोप लगाया।
सरमा ने गांधी को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का खुलकर समर्थन करने की सीधी चुनौती दी।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के शाह बानो फैसले को पलटने और तीन तलाक विरोधी कानून का विरोध करने पर कांग्रेस को घेरा।
कर्नाटक कैबिनेट में महिलाओं को जगह न देने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी पर राजनीतिक दोहरापन का इल्ज़ाम लगाया।
सरमा ने दावा किया कि मनुस्मृति हिंदुओं के लिए अनिवार्य धार्मिक संहिता नहीं है और हिंदू धर्म में सुधार की क्षमता है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार, 24 अगस्त को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि वे महिला अधिकारों का मुद्दा चुनिंदा तरीके से केवल हिंदू धर्म को निशाना बनाने के लिए उठाते हैं। सरमा ने गांधी को सीधी राजनीतिक चुनौती देते हुए पूछा कि क्या वे यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का खुलकर समर्थन करेंगे, जो धर्म से परे सभी नागरिकों को समान अधिकार की गारंटी देता हो।

एक्स पर पोस्ट के ज़रिए साधा निशाना

सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से राहुल गांधी के लैंगिक समानता संबंधी रुख पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता ने बार-बार हिंदू धार्मिक ग्रंथों की आलोचना की है, जबकि शरिया से जुड़ी पितृसत्तात्मक प्रथाओं पर वे मौन रहे हैं। सरमा के अनुसार, 'राहुल गांधी महिलाओं के अधिकारों के समर्थक नहीं हैं — वे केवल हिंदू-विरोधी हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए महिला सशक्तिकरण को 'सुविधाजनक आड़' के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

मनुस्मृति और हिंदू धर्म की लचीलेपन पर तर्क

असम के मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि मनुस्मृति को हिंदुओं के लिए सर्वमान्य और अनिवार्य धार्मिक संहिता का दर्जा प्राप्त नहीं है। उनके अनुसार, हिंदू धर्म की वास्तविक शक्ति समय के साथ बदलने, सुधार करने और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की उसकी अनूठी क्षमता में निहित है — एक ऐसा गुण जो इसे अन्य धर्मों से अलग करता है।

कांग्रेस के रिकॉर्ड पर सवाल

सरमा ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर भी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के इतिहास को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय के शाह बानो फैसले के प्रभाव को पलटकर मुस्लिम महिलाओं के साथ विश्वासघात किया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी ने तीन तलाक प्रथा के विरुद्ध बनाए गए कानून का विरोध किया था।

इसके अलावा, सरमा ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार का उदाहरण देते हुए दावा किया कि राहुल गांधी ने राजनीतिक सत्ता बनाए रखने की खातिर यह सुनिश्चित किया कि राज्य कैबिनेट में किसी भी महिला को स्थान न मिले।

UCC पर सीधी चुनौती

सरमा ने अपनी पोस्ट का समापन एक प्रत्यक्ष राजनीतिक प्रश्न के साथ किया — यदि महिलाओं की समानता सच में राजनीति से ऊपर है, तो क्या राहुल गांधी बिना किसी हिचकिचाहट के ऐसे यूनिफॉर्म सिविल कोड का समर्थन करेंगे जो धर्म से परे सभी नागरिकों को समान अधिकार की गारंटी दे? यह सवाल UCC की राष्ट्रीय बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आता है, जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहा है।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब महिला अधिकार और धर्मनिरपेक्षता को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच वैचारिक टकराव तेज़ होता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि BJP की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो UCC को विपक्ष के लिए एक राजनीतिक जाल के रूप में इस्तेमाल करती है — समर्थन करो तो अल्पसंख्यक वोट जाता है, विरोध करो तो महिला अधिकारों पर दोहरेपन का आरोप लगता है। शाह बानो और तीन तलाक के संदर्भ तथ्यात्मक रूप से दर्ज हैं, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नज़रअंदाज़ करती है कि BJP शासित राज्यों में भी महिला प्रतिनिधित्व के आँकड़े अक्सर औसत से नीचे रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या UCC की माँग वास्तविक लैंगिक न्याय से उपजती है या यह एक चुनावी एजेंडे का औज़ार है — और इस पर दोनों पक्षों को जवाब देना होगा।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
सरमा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी महिला अधिकारों का मुद्दा चुनिंदा तरीके से केवल हिंदू धर्म को निशाना बनाने के लिए उठाते हैं, जबकि शरिया से जुड़ी पितृसत्तात्मक प्रथाओं पर वे चुप रहते हैं। उन्होंने गांधी को 'हिंदू-विरोधी' करार देते हुए UCC का समर्थन करने की चुनौती दी।
सरमा ने UCC को लेकर राहुल गांधी से क्या सवाल पूछा?
सरमा ने पूछा कि यदि महिलाओं की समानता सच में राजनीति से ऊपर है, तो क्या राहुल गांधी बिना हिचकिचाहट के ऐसे यूनिफॉर्म सिविल कोड का समर्थन करेंगे जो धर्म से परे सभी नागरिकों को समान अधिकार की गारंटी दे। यह चुनौती UCC की राष्ट्रीय बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आती है।
शाह बानो फैसले को लेकर कांग्रेस पर क्या आरोप है?
सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय के शाह बानो फैसले के प्रभाव को संसद में कानून बनाकर पलट दिया, जिससे मुस्लिम महिलाओं को गुज़ारे भत्ते का अधिकार नहीं मिल सका। इसके साथ ही उन्होंने तीन तलाक विरोधी कानून का विरोध करने का भी आरोप लगाया।
कर्नाटक कैबिनेट को लेकर सरमा ने क्या दावा किया?
सरमा ने दावा किया कि राहुल गांधी ने राजनीतिक सत्ता बनाए रखने के लिए यह सुनिश्चित किया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की कैबिनेट में किसी भी महिला को शामिल न किया जाए। यह आरोप कांग्रेस के महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल उठाने के लिए लगाया गया।
मनुस्मृति पर सरमा का क्या रुख है?
सरमा ने कहा कि मनुस्मृति को हिंदुओं के लिए सर्वमान्य या अनिवार्य धार्मिक संहिता का दर्जा नहीं मिला हुआ है। उनके अनुसार, हिंदू धर्म की विशेषता समय के साथ बदलने, सुधार करने और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की उसकी क्षमता में है।
राष्ट्र प्रेस
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