क्या राहुल गांधी ने असम के लोगों के प्रति असंवेदनशीलता दिखाई?

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क्या राहुल गांधी ने असम के लोगों के प्रति असंवेदनशीलता दिखाई?

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी की असम की पारंपरिक पटका से जुड़ी टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे असम और उत्तर-पूर्वी भारत की संस्कृति के प्रति उनकी निरंतर असंवेदनशीलता बताकर गंभीर आरोप लगाया। क्या यह विवाद राजनीतिक खेल का हिस्सा है?

Key Takeaways

  • राहुल गांधी पर असम की संस्कृति के प्रति अनादर का आरोप
  • सरमा ने कहा कि सम्मान कानून से नहीं, बल्कि आंतरिक मूल्यों से आता है
  • राजनीतिक विवाद ने असम में भाजपा-कांग्रेस के बीच खींचतान को बढ़ाया
  • स्थानीय परंपराओं का सम्मान महत्वपूर्ण है
  • चुनाव नजदीक है, सांस्कृतिक पहचान फिर से चर्चा में है

गुवाहाटी, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा असम की पारंपरिक 'पटका' से संबंधित एक घटना पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने इस घटना को असम और उत्तर-पूर्वी भारत की संस्कृति और भावनाओं के प्रति राहुल गांधी की निरंतर असंवेदनशीलता का प्रतीक बताया।

तिनसुकिया जिले के डिगबोई में राज्य सरकार के एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में सरमा ने कहा कि उन्हें इस विवाद से कोई आश्चर्य नहीं हुआ और उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार कोई नई बात नहीं है। राहुल गांधी ने पूर्व में भी असम और उत्तर-पूर्व के लोगों के प्रति अनादर व्यक्त किया है। मैं उनका समर्थन करने में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता।

सरमा ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी और कहा कि परंपराओं और सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान कानून द्वारा अनिवार्य नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि सम्मान व्यक्ति के आंतरिक मूल्यों और अंतरात्मा का मामला है। यह अदालतों या पुलिस द्वारा तय नहीं किया जा सकता कि कोई व्यक्ति किसी परंपरा का सम्मान करता है या नहीं।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में राहुल गांधी से आग्रह किया कि वे इस क्षेत्र से राजनीतिक समर्थन मांगने से पहले क्षेत्रीय रीति-रिवाजों के प्रति संवेदनशीलता दिखाएं।

सरमा ने कहा कि अगर राहुल गांधी पूर्वोत्तर की संस्कृति और परंपराओं का सम्मान नहीं कर सकते, तो उन्हें केवल चुनावी उद्देश्यों के लिए इस क्षेत्र का दौरा नहीं करना चाहिए। उन्हें पहले यहां के लोगों का सम्मान करना सीखना होगा।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के असमिया पटके को कथित तौर पर गलत तरीके से संभालने के दृश्य सामने आए, जिसे सम्मान और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक माना जाता है।

इस घटना पर सत्ताधारी भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कांग्रेस नेता पर क्षेत्रीय पहचान को बार-बार अपमानित करने का आरोप लगाया।

हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास बताते हुए खारिज कर दिया।

इस घटनाक्रम ने असम में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान को और बढ़ा दिया है। चुनाव नजदीक आने के साथ, सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय परंपराओं के प्रति सम्मान एक बार फिर राज्य में संवेदनशील राजनीतिक मुद्दे बनकर उभरे हैं, खासकर पूर्वोत्तर के विभिन्न क्षेत्रीय समुदायों के साथ राष्ट्रीय नेताओं के संवाद के संदर्भ में।

Point of View

बल्कि यह असम और पूर्वोत्तर भारत में राजनीतिक पहचान और स्थानीय परंपराओं के प्रति सम्मान का एक बड़ा सवाल है। राष्ट्रीय नेताओं को क्षेत्रीय संवेदनाओं का ध्यान रखना चाहिए ताकि वे स्थानीय जनसमुदायों से बेहतर संवाद स्थापित कर सकें।
NationPress
05/02/2026

Frequently Asked Questions

राहुल गांधी ने असम की पटका के साथ क्या किया?
राहुल गांधी ने असमिया पटका को गलत तरीके से संभाला, जिसे स्थानीय संस्कृति का प्रतीक माना जाता है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
सरमा ने इसे राहुल गांधी की असंवेदनशीलता का प्रतीक बताया और कहा कि यह कोई नई बात नहीं है।
क्या राज्य सरकार इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई करेगी?
सरमा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी।
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