ममता बनर्जी का सुवेंदु अधिकारी पर बड़ा आरोप: 'घर से बाहर न निकलने देने' की धमकी दी
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चेयरपर्सन और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 24 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए। बनर्जी का कहना है कि अधिकारी ने एक सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित तौर पर उन्हें खुलेआम धमकी दी कि वे यह 'पक्का करेंगे' कि बनर्जी अपने घर से बाहर न निकल सकें। यह आरोप पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए टकराव की शुरुआत का संकेत देता है।
क्या है पूरा मामला
बनर्जी ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक सरकारी दफ्तर में बैठकर सार्वजनिक रूप से यह वक्तव्य दिया कि वे 'पक्का करेंगे' कि ममता बनर्जी घर से बाहर न निकल पाएं। उन्होंने इस बयान को संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध बताते हुए कहा, 'शब्द बिल्कुल साफ थे: मैं पक्का करूंगा कि आप घर से बाहर न निकल पाएं।'
बनर्जी ने इस संदर्भ में भारत के राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश और आम जनता से सवाल किया कि क्या भारत के संविधान में ऐसे भारत की परिकल्पना की गई थी।
संवैधानिक सवाल और विपक्ष की चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान की रक्षा की शपथ लेने वाले एक मौजूदा मुख्यमंत्री का यह बयान मुख्य विपक्षी दल की नेता की स्वतंत्रता को सीमित करने की 'खुली धमकी' है। उन्होंने पूछा, 'आखिर इसका क्या मतलब है? नजरबंदी? डराना-धमकाना? राजनीतिक उत्पीड़न? एक संवैधानिक लोकतंत्र में किसे आजादी से घूमने-फिरने का हक है, यह तय करने का अधिकार आपको किसने दिया?'
बनर्जी ने यह भी कहा कि शायद अधिकारी उन्हें उन लोगों जैसा समझ रहे हैं जो तानाशाही के आगे झुक जाते हैं, और यह उनकी 'बहुत बड़ी गलतफहमी' है।
भारतीय जनता पार्टी पर निशाना
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने इस विवाद को व्यक्तिगत नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संदर्भ में रखा। उन्होंने कहा कि यह मामला ममता बनर्जी से बड़ा है — यह उस भारत के बारे में है जिसे, उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) बनाना चाहती है, 'जहां राजनीतिक विरोधियों को धमकाया जाता है, असहमति के लिए सजा दी जाती है, और संवैधानिक अधिकार सत्ता में बैठे लोगों द्वारा दी जाने वाली रियायतें बन जाते हैं।'
उन्होंने इसे 'विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश' करार दिया।
बनर्जी की चेतावनी
बयान के अंत में बनर्जी ने कहा, 'इतिहास एक अहम सबक सिखाता है: सत्ता कुछ समय के लिए डरा-धमका सकती है, लेकिन अहंकार का जवाब आखिरकार जनता ही देती है। उनका अहंकार जोरदार है। उनकी हताशा उससे भी ज्यादा जोरदार है। उनके दिन गिने-चुने हैं।'
गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में BJP और TMC के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। आने वाले दिनों में अधिकारी की प्रतिक्रिया और इस विवाद का राजनीतिक असर देखना महत्वपूर्ण होगा।