28 जुलाई 2026
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ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता में एफआईआर दर्ज, चुनावी रैली में भड़काऊ बयान का आरोप

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ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता में एफआईआर दर्ज, चुनावी रैली में भड़काऊ बयान का आरोप

सारांश

कोलकाता की हेयर स्ट्रीट पुलिस ने TMC प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। स्थानीय निवासी तुषार कांति दास की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई, जिसमें 2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक बयान को भड़काऊ और सांप्रदायिक बताया गया है।

मुख्य बातें

कोलकाता की हेयर स्ट्रीट पुलिस ने 12 जून 2026 को TMC प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
शिकायतकर्ता तुषार कांति दास ने आरोप लगाया कि 2026 विधानसभा चुनाव प्रचार की रैली में दिया गया बयान कथित तौर पर भड़काऊ और सांप्रदायिक था।
शिकायत के साथ रैली का वीडियो क्लिप पेन ड्राइव में पुलिस को साक्ष्य के रूप में सौंपा गया।
शिकायत में चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा को कथित तौर पर इस भाषण से जोड़ा गया है।
पुलिस से निष्पक्ष जाँच और आदर्श आचार संहिता के तहत भी कार्रवाई की माँग की गई है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ 12 जून 2026 को कोलकाता की हेयर स्ट्रीट पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में उनके द्वारा दिया गया बयान कथित तौर पर भड़काऊ और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित करने वाला था। यह कार्रवाई एक लिखित शिकायत के आधार पर की गई है।

शिकायत का विवरण

शिकायत कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस रोड स्थित सोवालया इलाके के निवासी तुषार कांति दास ने दर्ज कराई है। उनके अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने एक जनसभा में लोगों को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'भ्रामक प्रचार' से सावधान रहने को कहा था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, यह बयान पहली नज़र में उकसाने वाला और सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देने वाला प्रतीत होता है।

आरोपों की प्रकृति

शिकायत में दावा किया गया है कि इस प्रकार के बयान अलग-अलग समुदायों के बीच भय, नफरत, गलतफहमी और तनाव उत्पन्न कर सकते हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे वक्तव्य राज्य की शांति, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक माहौल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। यह भी उल्लेख किया गया है कि ममता बनर्जी ने अपने भाषण में यह स्पष्ट नहीं किया था कि वे किस प्रकार के 'भ्रामक प्रचार' की बात कर रही थीं।

चुनाव के बाद की हिंसा से जोड़ने का दावा

शिकायत में यह भी कहा गया है कि चुनाव के बाद कोलकाता और पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में सांप्रदायिक हिंसा की कई घटनाएँ सामने आईं, जो कथित तौर पर उक्त भाषण से प्रभावित या उससे जुड़ी हो सकती हैं। हालाँकि, इस संबंध में अभी तक कोई स्वतंत्र सत्यापन सामने नहीं आया है।

साक्ष्य और माँगें

तुषार कांति दास ने शिकायत के साथ संबंधित रैली का वीडियो क्लिप एक पेन ड्राइव में पुलिस को सौंपा है। उन्होंने पुलिस से मामले पर तत्काल संज्ञान लेने, वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जाँच करने तथा निष्पक्ष और गहन जाँच कराने की माँग की है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि यदि बयान चुनाव प्रचार के दौरान दिया गया है, तो इसकी जाँच चुनाव संबंधी नियमों और आदर्श आचार संहिता के तहत भी होनी चाहिए।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की राजनीतिक तनातनी पहले से ही जारी है। पुलिस ने अभी तक इस एफआईआर पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की है। ममता बनर्जी अथवा TMC की ओर से भी अभी तक इस मामले पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। जाँच की दिशा और उसके परिणाम आने वाले दिनों में स्थिति को और स्पष्ट करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि किसी राजनीतिक दल या सरकारी एजेंसी की पहल पर — यह अंतर महत्वपूर्ण है। शिकायत में जो बयान 'भड़काऊ' बताया गया है, उसकी विशिष्ट भाषा अभी सार्वजनिक नहीं है, जिससे आरोपों की गंभीरता का स्वतंत्र मूल्यांकन फिलहाल संभव नहीं। चुनाव के बाद की हिंसा को किसी एक भाषण से जोड़ना कानूनी दृष्टि से जटिल साबित होगा और इसके लिए ठोस साक्ष्य-शृंखला आवश्यक होगी। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के इतिहास को देखते हुए, यह मामला जाँच से अधिक राजनीतिक संदेश देने का माध्यम भी बन सकता है — इसलिए पुलिस की स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच ही इसकी विश्वसनीयता तय करेगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज की गई?
कोलकाता के निवासी तुषार कांति दास की लिखित शिकायत पर हेयर स्ट्रीट पुलिस ने यह एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आरोप है कि 2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली में ममता बनर्जी का बयान कथित तौर पर भड़काऊ और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित करने वाला था।
ममता बनर्जी ने रैली में क्या कहा था?
शिकायत के अनुसार, ममता बनर्जी ने जनसभा में लोगों को BJP के 'भ्रामक प्रचार' से सावधान रहने को कहा था। हालाँकि शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किस प्रकार के भ्रामक प्रचार की बात कर रही थीं।
शिकायत में क्या साक्ष्य दिए गए हैं?
शिकायतकर्ता तुषार कांति दास ने संबंधित रैली का वीडियो क्लिप एक पेन ड्राइव में पुलिस को सौंपा है। उन्होंने पुलिस से वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जाँच कराने की माँग की है।
क्या इस एफआईआर में चुनाव बाद की हिंसा का भी उल्लेख है?
हाँ, शिकायत में दावा किया गया है कि चुनाव के बाद कोलकाता और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएँ हुईं, जो कथित तौर पर इस भाषण से प्रभावित हो सकती हैं। हालाँकि इस संबंध में कोई स्वतंत्र सत्यापन अभी सामने नहीं आया है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
पुलिस ने अभी तक एफआईआर पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की है। शिकायतकर्ता ने माँग की है कि मामले की जाँच चुनाव संबंधी नियमों और आदर्श आचार संहिता के तहत भी हो। ममता बनर्जी या TMC की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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