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ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता में एफआईआर, चुनावी रैली में भड़काऊ बयान का आरोप

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ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता में एफआईआर, चुनावी रैली में भड़काऊ बयान का आरोप

सारांश

कोलकाता में एक स्थानीय निवासी की लिखित शिकायत पर TMC प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। आरोप है कि 2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उनके बयान ने सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित किया। वीडियो साक्ष्य पुलिस को सौंपे गए हैं।

मुख्य बातें

कोलकाता की हेयर स्ट्रीट पुलिस ने 12 जून 2026 को TMC प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
शिकायतकर्ता तुषार कांति दास ने आरोप लगाया कि 2026 विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिया गया बयान भड़काऊ और सांप्रदायिक था।
शिकायत के साथ रैली का वीडियो क्लिप पेन ड्राइव में साक्ष्य के रूप में पुलिस को सौंपा गया।
शिकायत में चुनाव पश्चात पश्चिम बंगाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा को उक्त भाषण से कथित तौर पर जोड़ा गया है।
शिकायतकर्ता ने आदर्श आचार संहिता के तहत भी जाँच की माँग की है।

कोलकाता की हेयर स्ट्रीट पुलिस ने 12 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में दिया गया उनका बयान कथित तौर पर भड़काऊ और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित करने वाला था।

शिकायत का विवरण

यह शिकायत कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस रोड स्थित सोवालया इलाके के निवासी तुषार कांति दास ने दर्ज कराई। शिकायतकर्ता के अनुसार, ममता बनर्जी ने चुनावी रैली के दौरान लोगों को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'भ्रामक प्रचार' से सावधान रहने को कहा था, हालाँकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किस प्रकार के भ्रामक प्रचार की बात कर रही थीं।

शिकायत में दावा किया गया है कि रैली में दिया गया यह बयान पहली नज़र में उकसाने वाला और विभिन्न समुदायों के बीच भय, नफरत तथा तनाव पैदा करने वाला प्रतीत होता है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे बयान राज्य की शांति, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक माहौल के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।

हिंसा से संभावित संबंध का दावा

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि चुनाव के बाद कोलकाता और पश्चिम बंगाल के विभिन्न ज़िलों में सांप्रदायिक हिंसा की कई घटनाएँ सामने आईं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ये घटनाएँ कथित तौर पर उक्त भाषण से प्रभावित या उससे जुड़ी हो सकती हैं — हालाँकि इस संबंध की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है।

साक्ष्य और माँगें

तुषार कांति दास ने शिकायत के साथ संबंधित रैली का वीडियो क्लिप एक पेन ड्राइव में पुलिस को सौंपा है। उन्होंने पुलिस से मामले पर तत्काल संज्ञान लेने, वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जाँच करने तथा निष्पक्ष व गहन जाँच कराने की माँग की है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि यदि अपराध साबित हो, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।

आदर्श आचार संहिता का सवाल

शिकायत में यह भी तर्क दिया गया है कि चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए ऐसे बयानों की जाँच चुनाव संबंधी नियमों और आदर्श आचार संहिता के तहत भी होनी चाहिए। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव पश्चात हिंसा को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ही बना हुआ है। फिलहाल पुलिस की ओर से जाँच की दिशा या किसी गिरफ्तारी की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय — चुनाव के ठीक बाद और सत्ता-परिवर्तन की पृष्ठभूमि में — इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाता है। शिकायत में भाषण और हिंसा के बीच जो कारण-परिणाम संबंध जोड़ा गया है, वह अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है — और यही इस मामले की सबसे बड़ी कानूनी कसौटी होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस इस जाँच को किस गति और निष्पक्षता से आगे बढ़ाती है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में चुनाव पश्चात हिंसा की जाँच की विश्वसनीयता पहले से ही विवादित रही है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज की गई?
कोलकाता निवासी तुषार कांति दास की लिखित शिकायत पर यह एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें आरोप है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने एक रैली में कथित तौर पर भड़काऊ और सांप्रदायिक बयान दिया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इससे समुदायों के बीच तनाव बढ़ सकता है।
एफआईआर किस पुलिस थाने में दर्ज हुई?
यह एफआईआर कोलकाता की हेयर स्ट्रीट पुलिस में 12 जून 2026 को दर्ज की गई। शिकायत के साथ वीडियो साक्ष्य भी पेन ड्राइव में पुलिस को सौंपे गए हैं।
शिकायत में क्या माँगें की गई हैं?
शिकायतकर्ता ने पुलिस से तत्काल संज्ञान लेने, वीडियो और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जाँच करने और निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की है। इसके अलावा आदर्श आचार संहिता के तहत भी जाँच की माँग की गई है।
क्या इस मामले में ममता बनर्जी को गिरफ्तार किया गया?
अभी तक किसी गिरफ्तारी की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और जाँच की दिशा अभी स्पष्ट नहीं है।
इस एफआईआर का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में चुनाव पश्चात हिंसा को लेकर पहले से ही राजनीतिक तनाव है। शिकायत में भाषण और हिंसा के बीच संबंध का दावा किया गया है, जो अभी सत्यापित नहीं है और इस मामले की कानूनी दिशा तय करने में निर्णायक होगा।
राष्ट्र प्रेस
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