ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज कराने की कोशिश, सिलीगुड़ी में पुलिस ने अधिवक्ता की शिकायत ठुकराई
सारांश
मुख्य बातें
सिलीगुड़ी की अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह ने 26 मई 2025 को आरोप लगाया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ दो अलग-अलग मामलों में प्रधाननगर थाने में एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन कथित तौर पर पुलिस ने उनकी शिकायत स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका यह भी आरोप है कि थाना प्रभारी ने उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया।
पहला मामला: कोलकाता के रेड रोड पर ईद कार्यक्रम
रिंकी चटर्जी सिंह के अनुसार, पहला मामला वर्ष 2025 का है, जब कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित ईद की नमाज के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल हुई थीं। अधिवक्ता का आरोप है कि उस सार्वजनिक मंच से ममता बनर्जी ने हिंदू धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस बयान से वह बेहद आहत हुईं और शिकायत लेकर थाने पहुँचीं।
पुलिस का कथित रवैया और शिकायत की अस्वीकृति
रिंकी चटर्जी सिंह का दावा है कि जब उन्होंने प्रधाननगर थाने में लिखित शिकायत और आवेदन पत्र सौंपने की कोशिश की, तो थाना प्रभारी ने उसे लेने से साफ मना कर दिया। उनके अनुसार, जब उन्होंने इस इनकार का कारण पूछा और घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की, तब भी अधिकारी अपने रुख पर अड़े रहे। अधिवक्ता ने कहा कि उन्हें यह अनुभव हुआ कि सत्ताधारी दल के किसी नेता या मंत्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराना व्यवहार में संभव नहीं हो पाता।
दूसरा मामला: विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान का बयान
अधिवक्ता ने बताया कि इस वर्ष विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक विरोध सभा में दिए गए बयान को लेकर भी उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया। कथित तौर पर इस मामले में भी पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
तृणमूल कांग्रेस नेताओं पर पहले भी आरोप
रिंकी चटर्जी सिंह ने दावा किया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनके अनुसार, इससे पहले भी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेताओं द्वारा हिंदू धर्म और देवी-देवताओं को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयानों के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी। उन्होंने कहा कि पेशे से अधिवक्ता होने के बावजूद उन्हें खुद को असहाय महसूस करना पड़ा।
आगे क्या होगा
फिलहाल पुलिस या राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी तेज़ है और विपक्षी दल राज्य पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं। अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह के अनुसार, वह इस मामले को आगे उचित मंचों पर उठाने पर विचार कर रही हैं।