ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता में BJP नेता की शिकायत, रेड रोड नमाज विवाद पर FIR की माँग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता नाजिया इलाही खान ने 30 मई 2026 को कोलकाता के प्रगति मैदान पुलिस स्टेशन में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक जावेद अहमद खान के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों नेताओं ने रेड रोड पर ईद की नमाज के अवसर का राजनीतिक दुरुपयोग किया और सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुँचाया।
शिकायत में क्या आरोप लगाए गए
शिकायत पत्र के अनुसार, 2012 से 2025 के बीच TMC विधायक जावेद अहमद खान ने रेड रोड पर आयोजित नमाज को एक राजनीतिक सभा में परिवर्तित कर दिया। नाजिया इलाही खान ने अपनी शिकायत में लिखा है कि 'उस खास मौके पर, ममता बनर्जी ने रेड रोड पर ईद की नमाज के लिए जमा हुए मुस्लिम पुरुषों की मौजूदगी में बार-बार हिंदू धर्म का अपमान किया, जो कुरान और इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ था।'
शिकायत में यह भी कहा गया है कि 'ममता बनर्जी के कथित नफरत भरे भाषण, जावेद अहमद खान की उकसाने वाली हरकतें, और मुस्लिम खिलाफत कमेटी की गतिविधियों के कारण पूरे पश्चिम बंगाल में मुसलमानों का नाम बदनाम हुआ है।' नाजिया ने स्पष्ट किया कि एक मुस्लिम महिला होने के नाते वे इससे व्यक्तिगत रूप से आहत हैं।
रेड रोड नमाज विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इस वर्ष बकरीद के अवसर पर रेड रोड पर नमाज नहीं अदा की गई। पश्चिम बंगाल सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि सड़क पर नमाज आयोजित नहीं होगी। इसके बजाय, पहली बार बकरीद की सामूहिक नमाज कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान में पढ़ी गई। यह बदलाव उल्लेखनीय है, क्योंकि TMC सरकार के कार्यकाल में रेड रोड पर नमाज एक वार्षिक परंपरा बन चुकी थी।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और सांप्रदायिक संवेदनशीलता को लेकर BJP और TMC के बीच तनाव बना हुआ है। शिकायत में हर बार ममता बनर्जी पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने ईद की नमाज के दौरान रेड रोड से मुसलमानों को हिंदुओं के विरुद्ध उकसाया।
राजनीतिक संदर्भ और प्रतिक्रिया
यह शिकायत BJP की ओर से TMC नेतृत्व पर दबाव बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की शिकायतें चुनावी माहौल में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं। दूसरी ओर, BJP समर्थकों का तर्क है कि सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक आयोजन कानून-व्यवस्था का प्रश्न है।
अब तक ममता बनर्जी या TMC की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रगति मैदान पुलिस स्टेशन ने शिकायत दर्ज करने की पुष्टि की है, लेकिन आगे की कार्रवाई के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।
आगे क्या होगा
पुलिस शिकायत की जाँच करेगी और यह तय करेगी कि इस पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए या नहीं। कानूनी जानकारों के अनुसार, सांप्रदायिक भावनाओं को आहत करने से जुड़े मामलों में प्रारंभिक जाँच अनिवार्य होती है। इस घटनाक्रम पर राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में और गर्माहट आने की संभावना है।