13 जुलाई 2026
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कोलकाता में बकरीद की नमाज पहली बार रेड रोड से हटकर ब्रिगेड परेड ग्राउंड में अदा हुई

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कोलकाता में बकरीद की नमाज पहली बार रेड रोड से हटकर ब्रिगेड परेड ग्राउंड में अदा हुई

सारांश

दशकों पुरानी परंपरा टूटी — कोलकाता में बकरीद की नमाज इस बार रेड रोड पर नहीं, ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुई। नई सरकार की सड़कों पर धार्मिक जमावड़े पर रोक की नीति पहली बड़ी परीक्षा में लागू हुई, और शहर ट्रैफिक जाम से भी बचा रहा।

मुख्य बातें

कोलकाता में 28 मई को बकरीद (ईद-उल-अजहा) की नमाज कई वर्षों बाद पहली बार रेड रोड के बजाय ब्रिगेड परेड ग्राउंड में अदा की गई।
सुवेंदु अधिकारी सरकार की नीति के तहत सड़कों पर किसी भी धार्मिक जमावड़े की अनुमति नहीं दी गई।
रेड रोड पर नमाज की परंपरा लेफ्ट फ्रंट के दौर से चली आ रही थी और TMC शासन में भी जारी रही थी।
भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने पिछले वर्ष ही सुरक्षा कारणों से वैकल्पिक स्थान की माँग की थी।
कोलकाता पुलिस ने पूरे शहर में ड्रोन सहित व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए; ट्रैफिक जाम की समस्या नहीं हुई।

कोलकाता में इस वर्ष ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज कई दशकों की परंपरा से हटकर रेड रोड के बजाय ब्रिगेड परेड ग्राउंड में अदा की गई। 28 मई को हुए इस बदलाव ने पश्चिम बंगाल की नई सरकार की नीति को व्यवहार में उतरते देखा, जिसके तहत सड़कों पर किसी भी धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस फैसले के चलते मध्य कोलकाता में पिछले वर्षों में होने वाली ट्रैफिक जाम की समस्या से भी इस बार राहत मिली।

दशकों पुरानी परंपरा में बड़ा बदलाव

रेड रोड पर ईद की नमाज की परंपरा लेफ्ट फ्रंट सरकार के दौर से चली आ रही थी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल में भी जारी रही। TMC सरकार में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हर वर्ष ईद-उल-फित्र और ईद-उल-अजहा दोनों अवसरों पर रेड रोड की सभाओं में शामिल होती थीं। इस आयोजन के दौरान मध्य कोलकाता में यातायात बाधित होना आम बात थी।

नई सरकार की नीति और सुवेंदु अधिकारी की घोषणा

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया था कि नई सरकार सड़कों पर किसी भी धार्मिक जमावड़े की अनुमति नहीं देगी, क्योंकि इससे यातायात बाधित होता है और आम जनता को असुविधा होती है। गुरुवार को बकरीद की नमाज का ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजन इसी नीति का व्यावहारिक परिणाम था। शहर में कहीं भी खुली सड़कों पर नमाज का कोई आयोजन नहीं हुआ।

सेना की पूर्वी कमान की भूमिका

गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी भारतीय सेना की पूर्वी कमान — जिसके पास रेड रोड का प्रशासनिक अधिकार है — ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए खिलाफत समिति से ईद की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था करने को कहा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तब पूर्वी कमान के अधिकारियों को मनाने का प्रयास करने की बात कही थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में हार के बाद उनका कार्यकाल समाप्त हो गया।

सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

कोलकाता पुलिस ने पूरे शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए। ब्रिगेड परेड ग्राउंड और उसके आसपास के इलाकों के साथ-साथ मस्जिदों के निकटवर्ती क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। हवाई निगरानी के लिए ड्रोन का भी उपयोग किया गया।

आगे क्या

यह बदलाव पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद धार्मिक सार्वजनिक आयोजनों को लेकर नई प्रशासनिक सोच का संकेत है। आने वाले त्योहारों पर यह नीति किस रूप में लागू होती है, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक आयोजनों को लेकर बदलती प्रशासनिक प्राथमिकताओं का संकेत है। यह उल्लेखनीय है कि इस बदलाव की ज़मीन पिछले वर्ष सेना की पूर्वी कमान की आपत्ति से तैयार हो चुकी थी — नई सरकार ने उसी दिशा में नीतिगत कदम उठाया। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि यातायात की असुविधा का तर्क वैध होते हुए भी, नीति की व्यापकता और उसका एकसमान अनुप्रयोग — सभी धर्मों के सार्वजनिक आयोजनों पर — ही इसे वास्तविक प्रशासनिक सुधार और राजनीतिक संदेश के बीच की रेखा तय करेगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में बकरीद की नमाज इस बार रेड रोड पर क्यों नहीं हुई?
नई पश्चिम बंगाल सरकार ने सड़कों पर किसी भी धार्मिक जमावड़े की अनुमति न देने की नीति लागू की, जिसके चलते नमाज ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित की गई। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शपथ लेने के बाद यह घोषणा की थी कि सड़कों पर धार्मिक आयोजनों से यातायात बाधित होता है और जनता को परेशानी होती है।
रेड रोड पर नमाज की परंपरा कब से चली आ रही थी?
रेड रोड पर ईद-उल-फित्र और ईद-उल-अजहा की सामूहिक नमाज की परंपरा लेफ्ट फ्रंट सरकार के दौर से चली आ रही थी और तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में भी जारी रही। TMC सरकार में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दोनों ईद के अवसरों पर इन सभाओं में शामिल होती थीं।
भारतीय सेना की पूर्वी कमान की इस मामले में क्या भूमिका रही?
रेड रोड का प्रशासनिक अधिकार भारतीय सेना की पूर्वी कमान के पास है। पिछले वर्ष पूर्वी कमान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए खिलाफत समिति से ईद की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था करने को कहा था। तब ममता बनर्जी ने अनुमति दिलाने का प्रयास करने की बात कही थी, लेकिन चुनाव में हार के बाद उनका कार्यकाल समाप्त हो गया।
बकरीद के दौरान कोलकाता में सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए?
कोलकाता पुलिस ने पूरे शहर में व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए, जिनमें ब्रिगेड परेड ग्राउंड और मस्जिदों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती शामिल थी। हवाई निगरानी के लिए ड्रोन का भी उपयोग किया गया।
इस बदलाव का आम जनता पर क्या असर पड़ा?
सड़कों पर नमाज न होने से मध्य कोलकाता में पिछले वर्षों में होने वाली ट्रैफिक जाम की समस्या से इस बार राहत मिली। शहर में कहीं भी खुली सड़कों पर बकरीद की नमाज का आयोजन नहीं हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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