कोलकाता में ईद-उल-अजहा: ब्रिगेड परेड ग्राउंड में अदा हुई नमाज, मेयर फिरहाद हकीम ने माँगी खुशहाली की दुआ
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में 28 मई 2026 को ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गई, जहाँ बड़ी संख्या में नमाज़ियों ने एकत्र होकर एक-दूसरे को बधाई दी। तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वे सभी के लिए खुशहाली और भाईचारे की दुआ करते हैं।
मेयर फिरहाद हकीम का संदेश
फिरहाद हकीम ने कहा कि इंसानियत के साथ जीना और एक-दूसरे की मदद करना ही असली जश्न है। उन्होंने कहा, 'सबके लिए दुआ करते हैं — सभी अच्छे रहें और खुश रहें।' उनका यह संदेश सांप्रदायिक सौहार्द पर केंद्रित रहा।
प्रियदर्शिनी हकीम की टिप्पणियाँ
मेयर की बेटी प्रियदर्शिनी हकीम ने सभी को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा कि किसी को दुख पहुँचाने वाला कोई भी काम नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में खाने की पसंद व्यक्ति की अपनी होनी चाहिए। सड़क पर नमाज के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि विदेशों में भी सड़क पर नमाज नहीं होती, और यहाँ भी हमें देश के विकास पर ध्यान देना चाहिए — किसी एक समुदाय को निशाना बनाने की बजाय बंगाल की उन्नति पर जोर होना चाहिए।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पहली बार नमाज
नमाज़ियों ने बताया कि ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पहली बार ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गई। एक नमाज़ी ने कहा कि सड़क पर नमाज से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी होती है, इसलिए यह व्यवस्था बेहतर है। उन्होंने कहा, 'रेड रोड की तुलना में ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नमाज अदा करना ज़्यादा अच्छा रहा।'
सरकार की नीति पर नमाज़ियों की प्रतिक्रिया
एक अन्य नमाज़ी ने कहा कि सड़क पर नमाज न होने की सरकार की नीति को उन्होंने स्वीकार कर लिया है और आगे भी कानून के दायरे में रहकर इसी तरह नमाज अदा की जाएगी। एक शख्स ने यह भी कहा कि नई सरकार के निर्देशों के अनुसार काम किया जाएगा और देश की तरक्की पर ध्यान केंद्रित रहेगा। गौरतलब है कि इस बार एक नमाज़ी ने पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अच्छा काम किया है — यह टिप्पणी राजनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय मानी जा रही है।
आगे क्या
इस बार ब्रिगेड परेड ग्राउंड में नमाज की व्यवस्था को नमाज़ियों और प्रशासन दोनों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में भी यही व्यवस्था जारी रह सकती है।