बकरीद 2026: नोएडा के 180 स्थानों और मुजफ्फरनगर में शांतिपूर्ण नमाज, ड्रोन-वज्र वाहन से निगरानी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के नोएडा और मुजफ्फरनगर समेत विभिन्न जिलों में 28 मई 2026 (गुरुवार) को ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से अदा की गई। प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के तहत ड्रोन निगरानी, सादी वर्दी में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और 26 क्विक रिस्पॉन्स टीमों (QRT) को मैदान में उतारा।
नोएडा में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
गौतमबुद्ध नगर के ज्वाइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि जिले में 180 स्थानों पर नमाज का आयोजन हुआ। इसके लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया, जिसमें रिजर्व पुलिस का भी बंदोबस्त शामिल था। उन्होंने बताया कि सुबह से ही सभी स्थानों पर नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हो रही है।
सुरक्षा के अतिरिक्त उपायों में ड्रोन कैमरों से हवाई निगरानी और सादी वर्दी में तैनात सुरक्षाकर्मी शामिल रहे, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। 26 QRT टीमों को त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार रखा गया था।
मुजफ्फरनगर में भी सकुशल संपन्न हुई नमाज
मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि जिले में सभी तैनात अधिकारी अपनी-अपनी ड्यूटी पर मौजूद रहे और नमाज सकुशल संपन्न हुई। उन्होंने ड्रोन कैमरे, वज्र वाहन और सीसीटीवी कैमरों के इस्तेमाल की पुष्टि की।
एसएसपी वर्मा ने नागरिकों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण माहौल में त्योहार मनाएं और किसी भी असुविधा की स्थिति में पुलिस-प्रशासन को तुरंत सूचित करें। उन्होंने कहा, 'त्योहार सकुशल संपन्न करने के लिए हमारा सहयोग करें।'
नमाजियों और मंत्री की प्रतिक्रिया
मुजफ्फरनगर के एक नमाजी ने कहा कि नमाज बेहद शांति और सुकून के साथ अदा की गई और जिला प्रशासन की व्यवस्था सराहनीय रही। उन्होंने उम्मीद जताई कि कुर्बानी के दौरान भी सफाई की अच्छी व्यवस्था बनाए रखी जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि ईद-उल-अजहा त्याग और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा, 'हम सभी को अपने समाज, अपने देश और अपनी मातृभूमि के लिए त्याग करना चाहिए और प्रेम तथा सद्भाव के साथ रहना चाहिए। देशभर की मस्जिदों से देश की तरक्की के लिए दुआ माँगी गई।'
आम जनता पर असर और आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब त्योहारों के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता रही है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में बड़े त्योहारों पर बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था एक स्थापित प्रशासनिक परंपरा बन चुकी है। कुर्बानी के बाद सफाई व्यवस्था को लेकर स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी पर नज़र रहेगी।