सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई: सीएम ममता बनर्जी पर ईडी के आरोपों का मामला

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सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई: सीएम ममता बनर्जी पर ईडी के आरोपों का मामला

सारांश

ईडी ने सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उन पर दखलंदाजी का आरोप लगाया गया है। क्या अदालत इस मामले में उचित निर्णय लेगी?

Key Takeaways

  • ईडी ने सीएम ममता बनर्जी पर दखलंदाजी का आरोप लगाया है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
  • पश्चिम बंगाल सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
  • ईडी को मुकदमा करने का अधिकार नहीं है।
  • तृणमूल के संवेदनशील डेटा की जांच की जा रही है।

नई दिल्ली, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईडी ने आईपैक के भीतर रेड के दौरान सीएम ममता बनर्जी पर हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है। ईडी ने अपनी याचिका में सीएम ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार को पक्षकार बनाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की है।

बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान बंगाल सरकार ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा, जिस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह जानबूझकर मामले को लटकाने का प्रयास है। हमारा जवाब दो हफ्ते पहले दाखिल हो चुका था। जब एक राज्य की मुख्यमंत्री केंद्रीय एजेंसी की जांच को रोकने के लिए अदालत में आती हैं, तब सरकार को और वक्त की जरूरत है?

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वकील श्याम दीवान ने कहा कि ईडी कोई कॉर्पोरेट संगठन नहीं है और इसे मुकदमा दायर करने का अधिकार नहीं है। यह मुद्दा संविधान की व्याख्या का एक महत्वपूर्ण पहलू है कि क्या ईडी याचिका दायर कर सकती है? चूंकि यह मूल ढांचे का हिस्सा है, इसलिए इस मुद्दे को पांच जजों की बेंच के सामने रखा जाना चाहिए।

एसजी तुषार मेहता ने पश्चिम बंगाल सरकार की दलीलों का खंडन करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल ने भी अनुच्छेद 32 के तहत एक रिट याचिका दायर की है, जैसे कि केरल ने भी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि वह इस मामले पर सुनवाई को टालने के बजाय सुनवाई करेगा।

श्याम दीवान ने कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। ईडी अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर नहीं कर सकती। इस अधिकार के तहत केवल नागरिक अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का हवाला देकर अदालत में आ सकते हैं। ईडी वास्तव में सरकार का एक अंग है।

ज्ञात रहे कि हलफनामे के अनुसार, सीएम ममता बनर्जी ने 8 जनवरी को लाउडन स्ट्रीट स्थित प्रतिभा जैन के निवास और बिधाननगर स्थित आईपैक के कार्यालय का दौरा किया था। उन्हें यह जानकारी मिली थी कि तलाशी के दौरान तृणमूल के संवेदनशील राजनीतिक डेटा की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह डेटा विधानसभा चुनावों के लिए टीएमसी की रणनीति से बेहद महत्वपूर्ण रूप से जुड़ा हुआ था।

Point of View

जबकि ईडी की कार्रवाई भी अपनी जगह महत्वपूर्ण है। यह राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से एक जटिल मामला है, जिसे उचित न्यायिक प्रक्रिया के तहत हल किया जाना चाहिए।
NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

ईडी ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए हैं?
ईडी ने ममता बनर्जी पर आईपैक के भीतर रेड के दौरान हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या निर्णय लिया?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई को टालने के बजाय सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुनवाई में क्या कहा?
पश्चिम बंगाल सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे सॉलिसिटर जनरल ने जानबूझकर मामले को लटकाने का प्रयास बताया।
ईडी की कानूनी स्थिति क्या है?
ईडी को संविधान के तहत मुकदमा करने का अधिकार नहीं है, यह एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है।
क्या ममता बनर्जी ने कोई संवेदनशील डेटा के बारे में जानकारी दी थी?
जी हां, ममता बनर्जी ने कहा था कि रेड के दौरान तृणमूल के संवेदनशील राजनीतिक डेटा की जांच की जा रही थी।
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