एसआईआर विवाद: कांग्रेस का बेंगलुरु फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक कांग्रेस ने शनिवार, 27 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है — यह आंदोलन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के विरोध में है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की माँग की जाएगी। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने 25 सितंबर 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की।
कांग्रेस के आरोप और मांगें
हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े अनेक निर्णय अन्य दो चुनाव आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — की आपत्तियों के बावजूद एकतरफा लिए गए। उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि दोनों आयुक्तों ने पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कई बार असहमति जताई थी, जिसे कथित तौर पर ज्ञानेश कुमार ने नजरअंदाज किया।
हरिप्रसाद के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद फॉर्म 6 में संशोधन किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाबलेश्वर और हुबली-धारवाड़ में मतदाताओं के नाम हटाने के प्रयास किए गए।
मतदाता नामों के विलोपन के आँकड़े
हरिप्रसाद ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के परिणामस्वरूप बिहार में 63 लाख, पश्चिम बंगाल में 91 लाख और कर्नाटक में 1.07 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना था कि इस प्रक्रिया से अल्पसंख्यकों, दलितों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मतदान अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस के पास हटाए गए मतदाता नामों से जुड़े 65,000 आवेदन हैं और आरोप लगाया कि उनमें से कई पर हस्ताक्षर तक नहीं हैं। पार्टी की आंतरिक जाँच के हवाले से उन्होंने कहा कि हटाए गए नामों का एक बड़ा हिस्सा अल्पसंख्यक और दलित समुदायों से संबंधित है।
भाजपा और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
हरिप्रसाद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की भी आलोचना करते हुए कहा कि जब चुनाव आयोग पर सवाल उठते हैं, तो भाजपा नेता उसका बचाव करने लगते हैं। उन्होंने कहा, 'जब हम चुनाव आयोग से सवाल करते हैं तो आयोग को खुद जवाब देना चाहिए, लेकिन भाजपा नेता जवाब दे रहे हैं।'
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने पहले यह स्पष्ट किया था कि उसके आयुक्तों के बीच मतभेद और टिप्पणियाँ आंतरिक चर्चाओं का हिस्सा हैं और सभी निर्णय निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के अनुसार लिए जाते हैं।
आंदोलन का विस्तार और आगे की योजना
हरिप्रसाद ने घोषणा की कि दूसरे चरण में सभी जिलों में इसी तरह के विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी राजनीतिक दलों को इस आंदोलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया।
कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया की व्यापक और स्वतंत्र समीक्षा की माँग भी की है। हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्रवाई संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के समान है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में मतदाता सूची की शुचिता को लेकर कई राजनीतिक दलों के बीच व्यापक बहस चल रही है।