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एसआईआर विवाद: कांग्रेस का बेंगलुरु फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

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एसआईआर विवाद: कांग्रेस का बेंगलुरु फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

सारांश

कर्नाटक कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। KPCC अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की माँग की है, साथ ही कर्नाटक में 1.07 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया है।

मुख्य बातें

कर्नाटक कांग्रेस शनिवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में एसआईआर विवाद पर विरोध प्रदर्शन करेगी।
KPCC अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की माँग की।
कांग्रेस के अनुसार एसआईआर प्रक्रिया में कर्नाटक में 1.07 करोड़ , पश्चिम बंगाल में 91 लाख और बिहार में 63 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए।
हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों के बावजूद निर्णय एकतरफा लिए गए।
कांग्रेस के पास हटाए गए मतदाता नामों से संबंधित 65,000 आवेदन हैं, जिनमें से कई पर हस्ताक्षर नहीं हैं।
चुनाव आयोग ने पहले कहा था कि आंतरिक मतभेद संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं और निर्णय नियमानुसार लिए जाते हैं।

कर्नाटक कांग्रेस ने शनिवार, 27 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है — यह आंदोलन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के विरोध में है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की माँग की जाएगी। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने 25 सितंबर 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की।

कांग्रेस के आरोप और मांगें

हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े अनेक निर्णय अन्य दो चुनाव आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — की आपत्तियों के बावजूद एकतरफा लिए गए। उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि दोनों आयुक्तों ने पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कई बार असहमति जताई थी, जिसे कथित तौर पर ज्ञानेश कुमार ने नजरअंदाज किया।

हरिप्रसाद के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद फॉर्म 6 में संशोधन किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाबलेश्वर और हुबली-धारवाड़ में मतदाताओं के नाम हटाने के प्रयास किए गए।

मतदाता नामों के विलोपन के आँकड़े

हरिप्रसाद ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के परिणामस्वरूप बिहार में 63 लाख, पश्चिम बंगाल में 91 लाख और कर्नाटक में 1.07 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना था कि इस प्रक्रिया से अल्पसंख्यकों, दलितों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मतदान अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि कांग्रेस के पास हटाए गए मतदाता नामों से जुड़े 65,000 आवेदन हैं और आरोप लगाया कि उनमें से कई पर हस्ताक्षर तक नहीं हैं। पार्टी की आंतरिक जाँच के हवाले से उन्होंने कहा कि हटाए गए नामों का एक बड़ा हिस्सा अल्पसंख्यक और दलित समुदायों से संबंधित है।

भाजपा और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया

हरिप्रसाद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की भी आलोचना करते हुए कहा कि जब चुनाव आयोग पर सवाल उठते हैं, तो भाजपा नेता उसका बचाव करने लगते हैं। उन्होंने कहा, 'जब हम चुनाव आयोग से सवाल करते हैं तो आयोग को खुद जवाब देना चाहिए, लेकिन भाजपा नेता जवाब दे रहे हैं।'

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने पहले यह स्पष्ट किया था कि उसके आयुक्तों के बीच मतभेद और टिप्पणियाँ आंतरिक चर्चाओं का हिस्सा हैं और सभी निर्णय निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के अनुसार लिए जाते हैं।

आंदोलन का विस्तार और आगे की योजना

हरिप्रसाद ने घोषणा की कि दूसरे चरण में सभी जिलों में इसी तरह के विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी राजनीतिक दलों को इस आंदोलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया।

कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया की व्यापक और स्वतंत्र समीक्षा की माँग भी की है। हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्रवाई संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के समान है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में मतदाता सूची की शुचिता को लेकर कई राजनीतिक दलों के बीच व्यापक बहस चल रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह बहुसदस्यीय संस्था की सामूहिक निर्णय-शक्ति पर गंभीर प्रश्न उठाता है। कर्नाटक में 1.07 करोड़ नामों के विलोपन का आँकड़ा — यदि सत्यापित हो — सामान्य सफाई अभियान से बहुत परे है और स्वतंत्र ऑडिट की माँग करता है। भाजपा का चुनाव आयोग के पक्ष में मुखर होना और चुनाव आयोग का स्वयं मौन रहना — दोनों मिलकर उस धारणा को और गहरा करते हैं जिसे कांग्रेस भुनाने की कोशिश कर रही है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है जिसमें अपात्र या दोहरे नामों को हटाया जाता है। विवाद इसलिए है क्योंकि कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया में अल्पसंख्यक, दलित और आर्थिक रूप से कमजोर मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाए गए हैं।
कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों माँग रही है?
कांग्रेस का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की बार-बार आपत्तियों को नजरअंदाज कर एकतरफा निर्णय लिए। KPCC अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के अनुसार यह संवैधानिक संस्था की मूल भावना के विरुद्ध है।
एसआईआर प्रक्रिया में कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं?
कांग्रेस के दावे के अनुसार एसआईआर के तहत कर्नाटक में 1.07 करोड़, पश्चिम बंगाल में 91 लाख और बिहार में 63 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। ये आँकड़े कांग्रेस के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर क्या कहा है?
चुनाव आयोग ने पहले यह स्पष्ट किया था कि आयुक्तों के बीच मतभेद और टिप्पणियाँ संस्था की आंतरिक चर्चाओं का स्वाभाविक हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार सभी निर्णय निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के अनुसार लिए जाते हैं।
कांग्रेस के प्रदर्शन का अगला चरण क्या होगा?
KPCC अध्यक्ष हरिप्रसाद के अनुसार बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन के बाद दूसरे चरण में कर्नाटक के सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। कांग्रेस ने अन्य लोकतांत्रिक दलों को भी इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है।
राष्ट्र प्रेस
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