ट्रंप को फूड ट्रक में छिपाकर निकाला गया एयर फोर्स वन से, तुर्की में 'विश्वसनीय खतरे' के बाद सैन्य जेट से पहुंचे ब्रिटेन
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तुर्की के अंकारा में एयर फोर्स वन से गुपचुप ढंग से एक फूड ट्रक में छिपाकर एक अलग सैन्य विमान (सी-32ए) तक पहुंचाया गया, क्योंकि उनके आधिकारिक विमान के खिलाफ 'विश्वसनीय सुरक्षा खतरे' की जानकारी मिली थी। इसके बाद वे इसी सैन्य जेट से ब्रिटेन के मिल्डेनहॉल वायुसेना अड्डे पहुंचे। यह घटना पिछले महीने नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आई, जिसे अब तक सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया था।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे बदला गया विमान
द वॉशिंगटन पोस्ट और द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप मीडिया की मौजूदगी में सार्वजनिक रूप से एयर फोर्स वन पर चढ़े। इसके तुरंत बाद वे और उनके कुछ प्रमुख सहयोगी विमान के दरवाजे के पास खड़े एक कैटरिंग ट्रक में सवार हो गए।
रिपोर्टों के मुताबिक, वह ट्रक विमान के निचले हिस्से से जुड़ा हुआ था। ट्रक से निकलकर ट्रंप को एक कार में बैठाया गया और फिर एक छोटे सी-32ए सैन्य जेट तक पहुंचाया गया — जो बोइंग 757 का एक संस्करण है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एयर फोर्स वन में मौजूद पत्रकारों को खिड़कियों के पर्दे बंद रखने को कहा गया था।
सुरक्षा खतरा: कतर के विमान की कमज़ोरियाँ
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप अंकारा यात्रा के लिए कतर की ओर से उपहार में दिए गए एक बोइंग 747 विमान का उपयोग कर रहे थे। सीक्रेट सर्विस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों का मानना था कि इस विमान में जल्दबाजी में किए गए तकनीकी बदलावों के कारण यह पुराने एयर फोर्स वन जितना सुरक्षित नहीं था।
कथित तौर पर इस विमान में वे मिसाइल-रोधी सुरक्षा प्रणालियाँ और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हमलों से बचाने वाली विशेष वायरिंग नहीं थी, जो पुराने एयर फोर्स वन विमानों में मौजूद होती है। इसी कारण पहले ट्रंप को पुराने एयर फोर्स वन में स्थानांतरित किया गया, और जब सुरक्षा एजेंसियों को वह भी पर्याप्त सुरक्षित नहीं लगा, तो सैन्य जेट का विकल्प चुना गया।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया
व्हाइट हाउस ने इन रिपोर्टों की न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया। व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने कहा, 'जैसा कि राष्ट्रपति हाल में कह चुके हैं, अमेरिका के कई दुश्मन उन्हें निशाना बनाना चाहते हैं और हम उन खतरों से निपटने के लिए अपने पास मौजूद हर संसाधन का इस्तेमाल करते हैं।'
ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्होंने कतर के विमान को ब्रिटेन इसलिए भेजा क्योंकि वहाँ मौजूद अमेरिकी सैन्यकर्मी उसे देखना चाहते थे। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार असली कारण वे 'विश्वसनीय खतरे' थे जिनकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को मिली थी।
लीक और समन विवाद
जब द न्यूयॉर्क टाइम्स ने कतर के विमान की सुरक्षा कमियों पर रिपोर्ट प्रकाशित की, तब अमेरिकी न्याय विभाग ने रिपोर्टरों और उनके परिजनों — यहाँ तक कि एक पत्रकार की माँ — को समन भेजकर उनके फोन की माँग की। अधिकारियों ने कहा कि इसका उद्देश्य गोपनीय जानकारी लीक करने वालों की पहचान करना था, जिन्होंने कथित तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला।
आलोचना बढ़ने पर ये समन वापस ले लिए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि इन समनों को वापस लेने की प्रक्रिया ने अप्रत्यक्ष रूप से उन्हीं सुरक्षा चिंताओं की पुष्टि कर दी, जिन्हें ट्रंप और उनके अधिकारी पहले नकार चुके थे।
आगे क्या
ट्रंप ने कहा है कि कतर के विमान को सेवा से हटाकर उसमें बड़े स्तर पर तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं। यह विमान भविष्य में एक अन्य एयर फोर्स वन के रूप में इस्तेमाल किया जाना है। गौरतलब है कि पुराना एयर फोर्स वन और कतर का विमान दोनों ही बोइंग 747 के अलग-अलग संस्करण हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था और विदेश यात्राओं के दौरान खुफिया जानकारी के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।