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ईरानी हमले में पायलट के रेस्क्यू के लिए अमेरिकी सेना ने चलाया सफल ऑपरेशन

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ईरानी हमले में पायलट के रेस्क्यू के लिए अमेरिकी सेना ने चलाया सफल ऑपरेशन

सारांश

अमेरिकी सेना ने एक लापता पायलट को ईरानी हमले के दौरान सुरक्षित निकालने के लिए एक सफल ऑपरेशन चलाया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी पुष्टि की, जिसमें पायलट ने दुश्मन क्षेत्र से संपर्क किया। जानें इस अद्वितीय रेस्क्यू ऑपरेशन की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

अमेरिकी सेना ने ईरानी हमले में लापता पायलट को सफलतापूर्वक निकाला।
पायलट ने दुश्मन क्षेत्र से संपर्क किया था।
रेस्क्यू ऑपरेशन कई घंटों तक चला।
कम ऊँचाई पर उड़ने वाले विमानों का उपयोग किया गया।
अमेरिकी सेना की तत्परता और कुशलता का उदाहरण।

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी सेना ने ईरानी हमले में नष्ट हुए फाइटर जेट के एक लापता पायलट को सफलतापूर्वक खोज निकाला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना की पुष्टि की। इस दौरान, अमेरिकी मीडिया ने बताया कि किस प्रकार यूएस सेना ने ईरानी हमले में ध्वस्त हुए एफ-15ई फाइटर जेट के पायलट को दुश्मन के क्षेत्र से सुरक्षित निकालने के लिए एक विशेष ऑपरेशन चलाया।

सीएनएन के प्रमुख सुरक्षा विश्लेषक जिम स्यूटो ने जानकारी दी कि जिस पायलट का फाइटर जेट ईरानी सेना द्वारा गिराया गया था, उसने शुक्रवार को दुश्मन की सीमा के पीछे से अमेरिकी सेना से संपर्क किया। इसके बाद ही अमेरिकी सेना ने इस एक्सट्रैक्शन ऑपरेशन की शुरुआत की।

स्यूटो ने बताया कि अमेरिकी सेना ने पश्चिमी समयानुसार उस दिन दोपहर में लापता पायलट से प्रारंभिक बातचीत की, जिसके बाद अधिकारियों ने उसे खोजने का प्रयास जारी रखा।

उन्होंने कहा, “मुझे यह भी बताया गया कि इजेक्शन के दौरान वह प्रारंभ में घायल हो गया था, जिससे अतिरिक्त चुनौतियाँ भी आईं क्योंकि अमेरिकी सेना को उसे सुरक्षित निकालने और उसकी चोटों का इलाज करने की चिंता थी।”

स्यूटो ने ऑपरेशन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसमें सेवा सदस्यों को खोजने के लिए कम ऊँचाई पर उड़ने वाले विमान शामिल थे। कम ऊँचाई पर उड़ान भरने से विमान में आग लगने का खतरा था।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह एक अद्वितीय रेस्क्यू था, जो कई घंटों तक चला। इसे रात के अंधेरे में शुरू किया गया था, लेकिन दिन के उजाले में भी यह जारी रहा।

2008 में इराक में व्यक्तिगत उधारी केंद्र के पूर्व निदेशक रवि चौधरी ने बचाए गए अमेरिकी क्रू सदस्य की प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने अपनी प्रशिक्षण को पूरी सटीकता के साथ किया।

चौधरी ने सीएनएन से कहा, "क्रू सदस्य शायद बहुत कठिन परिस्थिति में छिपे हुए थे, जिसमें उन्हें बचाव बलों को चेतावनी देनी थी। इसमें उपकरण और संकेत देने की कई तकनीक शामिल थीं, जिसमें फ्लेयर भी था। आप जानते हैं कि रेस्क्यू बलों को संकेत देने के कई तरीके हैं, लेकिन साथ ही, उन्हें उस क्षेत्र में मौजूद दुश्मन ताकतों को चेतावनी नहीं देनी थी।"

एयर फोर्स सी-17 के रिटायर्ड पायलट रवि चौधरी ने एयर फोर्स में सहायक सचिव के रूप में भी कार्य किया है। उन्होंने भी ऑपरेशन में शामिल लोगों की सराहना की और इसे एक बहुत बड़ा कार्य बताया।

रवि चौधरी ने कहा, “हमारा व्यक्तिगत उधारी नेटवर्क ऐसे लोगों से भरा हुआ है जिनका एक ही मकसद है—पायलट को उनके परिवारों के पास सुरक्षित पहुँचाना और हम इसके लिए कुछ भी करेंगे। हमारा उद्देश्य है ताकि अन्य भी जीवित रह सकें।”

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह सैन्य रणनीति और तत्परता का भी उदाहरण है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरानी हमले में पायलट को कब बचाया गया?
पायलट को 5 अप्रैल को बचाया गया था।
अमेरिकी सेना ने पायलट से कैसे संपर्क किया?
पायलट ने दुश्मन की सीमा के पीछे से अमेरिकी सेना से संपर्क किया।
रेस्क्यू ऑपरेशन में कितना समय लगा?
रेस्क्यू ऑपरेशन कई घंटों तक चला।
कौन से विमान ऑपरेशन में शामिल थे?
कम ऊँचाई पर उड़ने वाले विमान इस ऑपरेशन में शामिल थे।
रवि चौधरी का इस ऑपरेशन में क्या योगदान था?
रवि चौधरी ने इस ऑपरेशन में शामिल लोगों की सराहना की।
राष्ट्र प्रेस
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