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दिल्ली हाई कोर्ट ने दोस्त पर हमले के आरोपी को जमानत देने से इनकार किया, पीड़ित की किडनी हुई थी निकाली

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दिल्ली हाई कोर्ट ने दोस्त पर हमले के आरोपी को जमानत देने से इनकार किया, पीड़ित की किडनी हुई थी निकाली

सारांश

दिल्ली हाई कोर्ट ने नशे में दोस्त पर चाकू से हमला कर उसकी किडनी गँवाने वाले आरोपी भरत सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ना ने गवाहों को धमकी और 22 में से केवल एक गवाह की जाँच पूरी होने का हवाला दिया।

मुख्य बातें

दिल्ली हाई कोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को आरोपी भरत सिंह (26 वर्ष) की नियमित जमानत याचिका खारिज की।
पीड़ित पर 8 मई 2025 को नशे की हालत में धारदार हथियार (चाकू) से हमला किया गया था; उसकी एक किडनी सर्जरी से निकालनी पड़ी।
एफआईआर द्वारका सेक्टर 23 पुलिस स्टेशन में 9 मई 2025 को दर्ज हुई; आरोपी पर हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराएँ हैं।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ना ने पाया कि 22 में से केवल 1 गवाह की जाँच हुई है और पीड़ित की गवाही अभी बाकी है।
आरोपी के परिवार पर शिकायतकर्ता और पीड़ित को धमकी देने का आरोप है, जिसे न्यायालय ने जमानत अस्वीकृति का अतिरिक्त आधार माना।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को नशे की हालत में अपने मित्र पर धारदार हथियार से हमला करने के आरोपी 26 वर्षीय भरत सिंह को नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया। इस हमले में पीड़ित की एक किडनी इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी कि उसे सर्जरी द्वारा निकालना पड़ा। न्यायालय ने यह भी पाया कि प्रमुख अभियोजन गवाहों को धमकियाँ दिए जाने का उचित संदेह है।

मामले की पृष्ठभूमि

द्वारका के सेक्टर 23 पुलिस स्टेशन में 9 मई 2025 को इस घटना से संबंधित एफआईआर दर्ज हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता और पीड़ित दोनों आरोपी भरत सिंह के करीबी मित्र थे।

8 मई 2025 को आरोपी ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता और पीड़ित को ट्रक में सामान लादने में मदद के लिए बुलाया। काम के बाद तीनों ने शराब पी और शिकायतकर्ता तथा पीड़ित अपने किराए के मकान लौट गए। उसी शाम आरोपी ने कथित तौर पर दोनों को अपने घर बुलाया, जहाँ हाथापाई हुई।

हाथापाई के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर पीड़ित पर किसी नुकीली धातु जैसी वस्तु से हमला किया और उसे खून से लथपथ छोड़कर घटनास्थल से फरार हो गया। पुलिस ने बाद में आरोपी की निशानदेही पर अपराध में इस्तेमाल चाकू बरामद किया।

न्यायालय का अवलोकन

न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ना की एकल-न्यायाधीश पीठ ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी 'तथ्यों और परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने पर तथा आरोप की प्रकृति और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए इस स्तर पर नियमित जमानत पाने का मामला साबित करने में असमर्थ है।'

न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि आरोपपत्र दाखिल होने के बावजूद 22 अभियोजन गवाहों में से अब तक केवल शिकायतकर्ता की ही जाँच हुई है, जबकि घायल पीड़ित की गवाही निचली अदालत के समक्ष अभी शेष है।

गवाहों को धमकी का आरोप

पीठ ने यह भी दर्ज किया कि आरोपी के परिवार के सदस्यों पर शिकायतकर्ता और पीड़ित को मामले को आगे बढ़ाने पर 'गंभीर परिणाम भुगतने' की धमकी देने का आरोप है। न्यायालय ने इसे जमानत अस्वीकार करने का अतिरिक्त आधार माना।

गौरतलब है कि गवाहों को धमकी देने के इस पहलू ने न्यायालय की चिंता को और बढ़ाया, क्योंकि पीड़ित स्वयं एक महत्वपूर्ण गवाह है जिसकी गवाही अभी दर्ज होनी बाकी है।

अभियोजन पक्ष की दलीलें

अभियोजन पक्ष और पीड़ित के वकील ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपी पर हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराओं में आरोप हैं और उसने एक महत्वपूर्ण अंग — किडनी — को स्थायी रूप से नष्ट कर दिया। पीड़ित को पहुँची यह क्षति अपूरणीय है।

आगे की कार्यवाही

निचली अदालत में अभी 21 और अभियोजन गवाहों की जाँच बाकी है, जिनमें पीड़ित भी शामिल है। न्यायालय के इस आदेश के बाद आरोपी भरत सिंह को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। यह मामला आगे भी निचली अदालत में विचाराधीन रहेगा और गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद ही मुकदमे की दिशा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो जमानत अस्वीकृति ही अंतिम बचाव बन जाती है — जो आदर्श नहीं है। पीड़ित की स्थायी शारीरिक क्षति और 21 अभियोजन गवाहों की लंबित गवाही यह भी संकेत देती है कि मुकदमा अभी लंबा चलेगा, और न्यायालय इस दौरान साक्ष्य की अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाई कोर्ट ने भरत सिंह की जमानत क्यों खारिज की?
न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ना ने जमानत इसलिए अस्वीकार की क्योंकि आरोप अत्यंत गंभीर हैं — पीड़ित की किडनी निकालनी पड़ी — और 22 में से केवल एक गवाह की जाँच हुई है। इसके अलावा आरोपी के परिजनों पर गवाहों को धमकी देने का भी आरोप है।
यह मामला क्या है और घटना कब हुई?
8 मई 2025 को दिल्ली के द्वारका में आरोपी भरत सिंह ने कथित तौर पर नशे की हालत में अपने मित्र पर चाकू से हमला किया, जिससे पीड़ित की एक किडनी क्षतिग्रस्त हो गई और उसे सर्जरी से निकालना पड़ा। एफआईआर अगले दिन 9 मई 2025 को द्वारका सेक्टर 23 पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई।
आरोपी पर कौन-कौन सी धाराओं में आरोप हैं?
अभियोजन पक्ष के अनुसार भरत सिंह पर हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर आपराधिक धाराओं में आरोप हैं। अपराध में इस्तेमाल चाकू उसकी निशानदेही पर बरामद किया गया था।
गवाहों को धमकी के आरोप का मामले पर क्या असर पड़ा?
न्यायालय ने आरोपी के परिवार द्वारा शिकायतकर्ता और पीड़ित को 'गंभीर परिणाम भुगतने' की धमकी देने के आरोप को जमानत अस्वीकृति का अतिरिक्त आधार माना। चूँकि पीड़ित की गवाही अभी निचली अदालत में दर्ज होनी है, इसलिए न्यायालय ने साक्ष्य की अखंडता सुरक्षित रखने को प्राथमिकता दी।
इस मामले में आगे क्या होगा?
निचली अदालत में अभी 21 और अभियोजन गवाहों की जाँच होनी है, जिनमें घायल पीड़ित भी शामिल है। तब तक आरोपी भरत सिंह न्यायिक हिरासत में रहेगा और मुकदमा जारी रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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