अंकित शर्मा हत्याकांड: दोषी नाजिम और कासिम ने उम्रकैद की सजा को दिल्ली हाई कोर्ट में दी चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाई कोर्ट में 11 अगस्त 2026 को एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया, जब 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए दोषी नाजिम और कासिम ने निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इससे पहले 31 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने इन दोनों सहित पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पाँचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के सांप्रदायिक दंगों के दौरान अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उनका शव चांदबाग इलाके में एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनके शरीर पर 40 से अधिक घाव पाए गए थे। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना, क्योंकि पीड़ित एक सक्रिय खुफिया अधिकारी थे।
निचली अदालत का फैसला और दोषियों की प्रतिक्रिया
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई को सजा सुनाते हुए पाँचों दोषियों को उम्रकैद दी। सजा के ऐलान के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने कहा था कि वे इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। अब नाजिम और कासिम ने भी दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
बचाव पक्ष का तर्क
ताहिर हुसैन की वकील तारा नरूला ने कहा कि अदालत ने भले ही हत्या की बर्बरता को ध्यान में रखा, लेकिन कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि किसी भी दोषी की हत्या में प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं हुई। उनके अनुसार, 'ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं था जिससे यह सिद्ध हो सके कि उन्होंने अंकित शर्मा को घसीटा या उन पर किसी हथियार का इस्तेमाल किया।' उन्होंने उम्मीद जताई कि उच्च न्यायालय में बचाव पक्ष का तर्क मज़बूत रहेगा।
पीड़ित परिवार की माँग
अंकित शर्मा के भाई अंकुर शर्मा ने कहा कि परिवार इस बात से निराश है कि अदालत ने मौत की सजा नहीं सुनाई। उनका कहना है कि यह मामला 'दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी में आना चाहिए था और दोषियों को सर्वोच्च दंड मिलना चाहिए था। अंकुर शर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि मामला दिल्ली हाई कोर्ट या सर्वोच्च न्यायालय तक जाता है, तो परिवार न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेगा।
आगे क्या होगा
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर इन अपीलों पर अब सुनवाई की तारीख तय होगी। यह ऐसे समय में आया है जब अंकित शर्मा के परिवार ने भी सजा को 'अपर्याप्त' बताते हुए उच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती देने के संकेत दिए हैं। इस प्रकार, यह मामला अब दोनों पक्षों की ओर से उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने की संभावना है।