11 अगस्त 2026
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अंकित शर्मा हत्याकांड: दोषी नाजिम और कासिम ने उम्रकैद की सजा को दिल्ली हाई कोर्ट में दी चुनौती

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अंकित शर्मा हत्याकांड: दोषी नाजिम और कासिम ने उम्रकैद की सजा को दिल्ली हाई कोर्ट में दी चुनौती

सारांश

2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के दोषी नाजिम और कासिम ने उम्रकैद की सजा को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। पीड़ित परिवार मौत की सजा न मिलने से नाखुश है और वह भी उच्च न्यायालय में लड़ाई जारी रखने को तैयार है।

मुख्य बातें

दोषी नाजिम और कासिम ने 11 अगस्त 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट में उम्रकैद की सजा के विरुद्ध अपील दायर की।
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई को पाँचों दोषियों — नाजिम, कासिम और पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित — को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
पीड़ित अंकित शर्मा के शव पर 40 से अधिक घाव थे; शव चांदबाग नाले से बरामद हुआ था।
भाई अंकुर शर्मा ने मौत की सजा न मिलने पर निराशा जताई और मामले को 'दुर्लभतम' श्रेणी में रखने की माँग दोहराई।
बचाव पक्ष का तर्क है कि अदालत ने माना कि किसी दोषी की प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं हुई।

दिल्ली हाई कोर्ट में 11 अगस्त 2026 को एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया, जब 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए दोषी नाजिम और कासिम ने निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इससे पहले 31 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने इन दोनों सहित पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पाँचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के सांप्रदायिक दंगों के दौरान अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उनका शव चांदबाग इलाके में एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनके शरीर पर 40 से अधिक घाव पाए गए थे। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना, क्योंकि पीड़ित एक सक्रिय खुफिया अधिकारी थे।

निचली अदालत का फैसला और दोषियों की प्रतिक्रिया

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई को सजा सुनाते हुए पाँचों दोषियों को उम्रकैद दी। सजा के ऐलान के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने कहा था कि वे इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। अब नाजिम और कासिम ने भी दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

बचाव पक्ष का तर्क

ताहिर हुसैन की वकील तारा नरूला ने कहा कि अदालत ने भले ही हत्या की बर्बरता को ध्यान में रखा, लेकिन कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि किसी भी दोषी की हत्या में प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं हुई। उनके अनुसार, 'ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं था जिससे यह सिद्ध हो सके कि उन्होंने अंकित शर्मा को घसीटा या उन पर किसी हथियार का इस्तेमाल किया।' उन्होंने उम्मीद जताई कि उच्च न्यायालय में बचाव पक्ष का तर्क मज़बूत रहेगा।

पीड़ित परिवार की माँग

अंकित शर्मा के भाई अंकुर शर्मा ने कहा कि परिवार इस बात से निराश है कि अदालत ने मौत की सजा नहीं सुनाई। उनका कहना है कि यह मामला 'दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी में आना चाहिए था और दोषियों को सर्वोच्च दंड मिलना चाहिए था। अंकुर शर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि मामला दिल्ली हाई कोर्ट या सर्वोच्च न्यायालय तक जाता है, तो परिवार न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेगा।

आगे क्या होगा

दिल्ली हाई कोर्ट में दायर इन अपीलों पर अब सुनवाई की तारीख तय होगी। यह ऐसे समय में आया है जब अंकित शर्मा के परिवार ने भी सजा को 'अपर्याप्त' बताते हुए उच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती देने के संकेत दिए हैं। इस प्रकार, यह मामला अब दोनों पक्षों की ओर से उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पीड़ित परिवार की मौत की सजा की माँग यह रेखांकित करती है कि न्याय की परिभाषा पीड़ित और न्यायपालिका के बीच कितनी अलग हो सकती है। अब असली परीक्षा यह है कि हाई कोर्ट 'प्रत्यक्ष भूमिका' और 'सामूहिक अपराध' के बीच की कानूनी रेखा कहाँ खींचता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकित शर्मा हत्याकांड क्या है?
यह फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ा मामला है, जिसमें आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उनका शव चांदबाग इलाके के एक नाले से मिला था और पोस्टमार्टम में शरीर पर 40 से अधिक घाव पाए गए थे।
नाजिम और कासिम को क्या सजा मिली थी?
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई को नाजिम, कासिम और पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन सहित पाँचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब नाजिम और कासिम ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
बचाव पक्ष हाई कोर्ट में क्या तर्क देगा?
ताहिर हुसैन की वकील तारा नरूला के अनुसार, निचली अदालत ने खुद माना था कि किसी भी दोषी की हत्या में प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं हुई। बचाव पक्ष इसी आधार पर उच्च न्यायालय में राहत माँगेगा।
अंकित शर्मा के परिवार का रुख क्या है?
भाई अंकुर शर्मा ने कहा कि परिवार मौत की सजा न मिलने से निराश है और उनकी माँग थी कि इसे 'दुर्लभतम मामलों' में शामिल किया जाए। परिवार ने स्पष्ट किया कि वे हाई कोर्ट या सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ाई जारी रखेंगे।
इस मामले में आगे क्या होगा?
दिल्ली हाई कोर्ट अब नाजिम और कासिम की अपील पर सुनवाई की तारीख तय करेगा। संभावना है कि पीड़ित परिवार भी सजा को अपर्याप्त बताते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाए, जिससे यह मामला दोनों पक्षों की ओर से उच्च न्यायालय में विचाराधीन हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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