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अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन को उम्रकैद, परिवार बोला — 'मौत की सजा मिलनी चाहिए थी'

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अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन को उम्रकैद, परिवार बोला — 'मौत की सजा मिलनी चाहिए थी'

सारांश

दिल्ली दंगों में IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के दोषी ताहिर हुसैन को उम्रकैद मिली, लेकिन परिवार संतुष्ट नहीं — भाई अंकुर शर्मा ने मौत की सजा न मिलने पर निराशा जताई और उच्च न्यायालय तक लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया। शव पर 51 चाकू के घाव थे।

मुख्य बातें

कड़कड़डूमा अदालत ने AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को 2020 दिल्ली दंगों में IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
अंकित शर्मा के भाई अंकुर शर्मा ने मौत की सजा न मिलने पर निराशा जताई और उच्च न्यायालय में अपील की बात कही।
अदालत ने हत्या को 'क्रूर' माना, लेकिन कहा कि मौत की सजा के लिए आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी नहीं हुईं।
25 फरवरी 2020 को हुई हत्या में शव पर 51 चाकू के घाव मिले थे; शव को नाले में फेंका गया था।
परिवार ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि ऊपरी अदालत में मौत की सजा सुनिश्चित कराने में सहयोग करें।

नई दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। फैसले के बाद पीड़ित के परिवार ने गहरी निराशा जताते हुए मौत की सजा की माँग दोहराई है और संकेत दिया है कि वे इस लड़ाई को उच्च न्यायालय तक ले जाएँगे।

परिवार की प्रतिक्रिया

अंकित शर्मा के भाई अंकुर शर्मा ने कहा, 'अदालत ने न्याय किया है, लेकिन ताहिर हुसैन को मौत की सजा दी जानी चाहिए थी।' उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार की माँग थी कि इस मामले को 'दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी में रखा जाए और दोषी को सर्वोच्च दंड मिले।

अंकुर शर्मा ने यह भी कहा कि यदि मामला दिल्ली उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय तक जाता है, तो परिवार वहाँ भी लड़ेगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे यह सुनिश्चित करें कि ऊपरी अदालत में ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों को मौत की सजा मिले।

अदालत का फैसला और तर्क

कड़कड़डूमा अदालत ने हत्या को 'क्रूर' करार दिया और दर्ज किया कि हत्या के बाद अंकित शर्मा के शव को पास के नाले में घसीटकर फेंका गया था। अदालत ने माना कि अपराध 'दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी के निकट था, परंतु फैसला सुनाया कि मौत की सजा देने के लिए आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी नहीं हुईं।

अदालत ने यह भी कहा कि जानलेवा हमले में किसी व्यक्ति की प्रत्यक्ष भूमिका का कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं था और दोषी के सुधरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

घटनाक्रम: क्या हुआ था 25 फरवरी 2020 को

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान अंकित शर्मा तनाव कम करने की कोशिश कर रहे थे, तभी भीड़ ने उन्हें घेर लिया। कथित तौर पर उन पर चाकू, लाठी, लोहे की छड़ों और पत्थरों से हमला किया गया। अगले दिन एक नाले से उनका शव बरामद हुआ, जिस पर 51 चाकू के घाव थे।

यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक रहा है, जिसमें एक सरकारी अधिकारी की हत्या के आरोप एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि पर लगे।

आगे क्या होगा

परिवार ने उच्च न्यायालय में अपील की संभावना स्पष्ट कर दी है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अभियोजन पक्ष भी सजा बढ़ाने के लिए ऊपरी अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकता है। यह मामला अब न्यायिक समीक्षा के अगले चरण में प्रवेश कर सकता है, जहाँ 'दुर्लभतम मामलों' की व्याख्या पर बहस केंद्रित रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी 'ठोस प्रत्यक्ष साक्ष्य' की अनुपस्थिति का तर्क यह बताता है कि जाँच में कहीं न कहीं कमज़ोरी रही। यह मामला भीड़-हिंसा में व्यक्तिगत आपराधिक जवाबदेही साबित करने की उस पुरानी चुनौती को फिर सामने लाता है, जो 1984 से लेकर 2020 तक के दंगा मामलों में बार-बार दिखती है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ताहिर हुसैन को किस मामले में सजा मिली है?
ताहिर हुसैन को फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का दोषी पाया गया है। कड़कड़डूमा अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है।
अदालत ने मौत की सजा क्यों नहीं दी?
अदालत ने कहा कि हालाँकि अपराध 'दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी के करीब था, लेकिन जानलेवा हमले में दोषी की प्रत्यक्ष भूमिका का ठोस साक्ष्य नहीं था और सुधरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए मौत की सजा की कानूनी शर्तें पूरी नहीं मानी गईं।
अंकित शर्मा के परिवार की क्या माँग है?
पीड़ित के भाई अंकुर शर्मा ने कहा कि परिवार मौत की सजा चाहता था और इस मामले को 'दुर्लभतम' श्रेणी में माना जाना चाहिए था। परिवार ने दिल्ली उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही है।
25 फरवरी 2020 को अंकित शर्मा के साथ क्या हुआ था?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान अंकित शर्मा तनाव कम करने की कोशिश कर रहे थे, तभी भीड़ ने उन्हें घेरकर चाकू, लाठी और पत्थरों से हमला किया। अगले दिन उनका शव नाले से बरामद हुआ, जिस पर 51 चाकू के घाव थे।
क्या ताहिर हुसैन के खिलाफ आगे कोई कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
हाँ, पीड़ित परिवार ने उच्च न्यायालय में अपील की संभावना जताई है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अभियोजन पक्ष भी सजा बढ़ाने के लिए ऊपरी अदालत का रुख कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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