अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत पाँचों दोषियों को उम्रकैद, वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट जाने का ऐलान किया
सारांश
मुख्य बातें
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को फरवरी 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों — नाजिम, कासिम, जावेद और अनस — को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने अभियोजन पक्ष की मृत्युदंड की माँग को अस्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।
सजा का आधार क्या रहा
ताहिर हुसैन की वकील तारा नरूला ने फैसले के बाद बताया कि अदालत ने अंकित शर्मा की हत्या की बर्बरता को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा, "सभी पाँचों लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने अंकित शर्मा की हत्या की बर्बरता को ध्यान में रखा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि हत्या में इनमें से किसी भी दोषी की सीधी भूमिका नहीं पाई गई। ऐसा कोई ठोस सबूत या आरोप नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने अंकित शर्मा को घसीटा या उन पर किसी हथियार का इस्तेमाल किया।"
नरूला ने यह भी कहा कि अदालत ने दोषियों के आपराधिक रिकॉर्ड को भी संज्ञान में लिया। उनके अनुसार, "कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि सभी दोषियों का रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहा है और वे जेल में रहने के दौरान या उससे पहले या बाद में किसी हिंसक अपराध में शामिल नहीं रहे हैं।"
मृत्युदंड क्यों नहीं दिया गया
नाजिम और कासिम के वकील अब्दुल गफ्फार ने बताया कि सभी पाँचों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 188, 147, 148, 365, 153ए और 302 के तहत दोषी ठहराया गया है। उन्होंने कहा, "हत्या के अपराध के लिए कोर्ट ने अधिकतम सजा यानी उम्रकैद सुनाई। कानून के मुताबिक, हत्या की सजा या तो उम्रकैद होती है या फिर मौत की सजा। अभियोजन पक्ष की माँग के बावजूद, कोर्ट ने इसे मौत की सजा देने लायक मामला नहीं माना।"
गफ्फार के अनुसार, अदालत ने स्वीकार किया कि अपराध अत्यंत क्रूर था, पीड़ित को कई चोटें आई थीं और दोषियों का व्यवहार अमानवीय था। साथ ही, अदालत ने यह भी दर्ज किया कि अभियोजन पक्ष ट्रायल के दौरान यह सिद्ध करने में असफल रहा कि इन आरोपियों ने स्वयं हिंसा का कोई विशेष कृत्य किया था।
हाईकोर्ट में अपील की तैयारी
वकील तारा नरूला ने स्पष्ट किया कि सभी दोषी दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर करेंगे। उन्होंने कहा, "हम अपील करने की योजना बना रहे हैं और वे सभी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। हमें उम्मीद है कि वहाँ हमारा पक्ष मजबूत रहेगा।" यह मामला फरवरी 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे हाई-प्रोफाइल मुकदमों में से एक रहा है, जिसमें 53 से अधिक लोगों की जान गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि अंकित शर्मा IB में कार्यरत थे और फरवरी 2020 के दंगों के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी। उनका शव चाँद बाग इलाके की एक नाली से बरामद हुआ था। इस मामले ने देशभर में व्यापक आक्रोश उत्पन्न किया था। ताहिर हुसैन उस समय AAP के पार्षद थे और उन पर आरोप था कि उनकी संपत्ति से दंगाइयों ने पत्थरबाजी की थी। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली दंगों से जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई भी विभिन्न अदालतों में जारी है।