31 जुलाई 2026
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अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत पाँचों दोषियों को उम्रकैद, वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट जाने का ऐलान किया

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अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत पाँचों दोषियों को उम्रकैद, वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट जाने का ऐलान किया

सारांश

कड़कड़डूमा कोर्ट ने IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत पाँच दोषियों को उम्रकैद सुनाई — मृत्युदंड की माँग ठुकराई गई। बचाव पक्ष की वकील तारा नरूला ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील का ऐलान कर दिया है। यह फरवरी 2020 दंगों का सबसे हाई-प्रोफाइल फैसला है।

मुख्य बातें

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई को ताहिर हुसैन समेत पाँचों दोषियों — नाजिम, कासिम, जावेद और अनस — को उम्रकैद की सजा सुनाई।
सभी दोषियों को IPC धाराओं 188, 147, 148, 365, 153ए और 302 के तहत दोषी ठहराया गया।
अदालत ने अभियोजन पक्ष की मृत्युदंड की माँग अस्वीकार की; माना कि किसी दोषी की सीधी हिंसक भूमिका सिद्ध नहीं हुई।
वकील तारा नरूला ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर करने की घोषणा की।
पीड़ित अंकित शर्मा IB में कार्यरत थे; उनका शव फरवरी 2020 के दंगों के दौरान चाँद बाग इलाके की नाली से बरामद हुआ था।

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को फरवरी 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों — नाजिम, कासिम, जावेद और अनस — को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने अभियोजन पक्ष की मृत्युदंड की माँग को अस्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।

सजा का आधार क्या रहा

ताहिर हुसैन की वकील तारा नरूला ने फैसले के बाद बताया कि अदालत ने अंकित शर्मा की हत्या की बर्बरता को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा, "सभी पाँचों लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने अंकित शर्मा की हत्या की बर्बरता को ध्यान में रखा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि हत्या में इनमें से किसी भी दोषी की सीधी भूमिका नहीं पाई गई। ऐसा कोई ठोस सबूत या आरोप नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने अंकित शर्मा को घसीटा या उन पर किसी हथियार का इस्तेमाल किया।"

नरूला ने यह भी कहा कि अदालत ने दोषियों के आपराधिक रिकॉर्ड को भी संज्ञान में लिया। उनके अनुसार, "कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि सभी दोषियों का रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहा है और वे जेल में रहने के दौरान या उससे पहले या बाद में किसी हिंसक अपराध में शामिल नहीं रहे हैं।"

मृत्युदंड क्यों नहीं दिया गया

नाजिम और कासिम के वकील अब्दुल गफ्फार ने बताया कि सभी पाँचों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 188, 147, 148, 365, 153ए और 302 के तहत दोषी ठहराया गया है। उन्होंने कहा, "हत्या के अपराध के लिए कोर्ट ने अधिकतम सजा यानी उम्रकैद सुनाई। कानून के मुताबिक, हत्या की सजा या तो उम्रकैद होती है या फिर मौत की सजा। अभियोजन पक्ष की माँग के बावजूद, कोर्ट ने इसे मौत की सजा देने लायक मामला नहीं माना।"

गफ्फार के अनुसार, अदालत ने स्वीकार किया कि अपराध अत्यंत क्रूर था, पीड़ित को कई चोटें आई थीं और दोषियों का व्यवहार अमानवीय था। साथ ही, अदालत ने यह भी दर्ज किया कि अभियोजन पक्ष ट्रायल के दौरान यह सिद्ध करने में असफल रहा कि इन आरोपियों ने स्वयं हिंसा का कोई विशेष कृत्य किया था।

हाईकोर्ट में अपील की तैयारी

वकील तारा नरूला ने स्पष्ट किया कि सभी दोषी दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर करेंगे। उन्होंने कहा, "हम अपील करने की योजना बना रहे हैं और वे सभी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। हमें उम्मीद है कि वहाँ हमारा पक्ष मजबूत रहेगा।" यह मामला फरवरी 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे हाई-प्रोफाइल मुकदमों में से एक रहा है, जिसमें 53 से अधिक लोगों की जान गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि अंकित शर्मा IB में कार्यरत थे और फरवरी 2020 के दंगों के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी। उनका शव चाँद बाग इलाके की एक नाली से बरामद हुआ था। इस मामले ने देशभर में व्यापक आक्रोश उत्पन्न किया था। ताहिर हुसैन उस समय AAP के पार्षद थे और उन पर आरोप था कि उनकी संपत्ति से दंगाइयों ने पत्थरबाजी की थी। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली दंगों से जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई भी विभिन्न अदालतों में जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी किसी दोषी की सीधी हिंसक भूमिका सिद्ध नहीं पाई। यह सामूहिक हिंसा के मामलों में व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की कानूनी जटिलता को उजागर करता है। दिल्ली दंगों के अन्य मामलों में भी यही संरचनात्मक चुनौती बार-बार सामने आई है। हाईकोर्ट में अपील से यह प्रश्न और तीखा होगा कि साझा इरादे के आधार पर दोष सिद्धि को उम्रकैद तक ले जाना न्यायसंगत है या नहीं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ताहिर हुसैन को किस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई?
ताहिर हुसैन को फरवरी 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई को यह फैसला सुनाया।
क्या ताहिर हुसैन को मृत्युदंड दिया गया?
नहीं, अदालत ने अभियोजन पक्ष की मृत्युदंड की माँग अस्वीकार कर दी। अदालत ने माना कि यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी में नहीं आता, क्योंकि दोषियों की सीधी हिंसक भूमिका ट्रायल में सिद्ध नहीं हो सकी।
ताहिर हुसैन की वकील तारा नरूला ने फैसले पर क्या कहा?
वकील तारा नरूला ने कहा कि सभी पाँचों दोषी दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। उन्होंने बताया कि अदालत ने स्वयं माना कि किसी भी दोषी ने अंकित शर्मा को घसीटा या हथियार से हमला किया, यह सिद्ध नहीं हुआ।
इस मामले में किन धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया?
सभी पाँचों दोषियों को IPC की धाराओं 188, 147, 148, 365, 153ए और 302 के तहत दोषी ठहराया गया है। धारा 302 हत्या से संबंधित है, जिसकी सजा उम्रकैद या मृत्युदंड हो सकती है।
अंकित शर्मा कौन थे और उनकी हत्या कब हुई?
अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में कार्यरत थे। फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी और उनका शव चाँद बाग इलाके की एक नाली से बरामद हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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