दिल्ली दंगे: ताहिर हुसैन को उम्रकैद, IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट का फैसला
सारांश
मुख्य बातें
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। छह वर्षों की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है।
मुख्य घटनाक्रम
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में भड़के सांप्रदायिक दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा का शव एक नाले में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनके शरीर पर 51 चाकू के घाव पाए गए थे और शव को नाले में फेंका गया था। पुलिस ने जाँच के बाद ताहिर हुसैन समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया था। अदालत ने सुनवाई पूरी कर सभी पाँचों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
विहिप की प्रतिक्रिया
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, 'भले ही इसमें छह साल लग गए, लेकिन आज का फैसला इस बात का प्रमाण है कि पूरे देश ने क्या देखा था।' उन्होंने आरोप लगाया कि 'ताहिर हुसैन का घर और छत हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का अड्डा बन गए थे। हमारी नजर में वहां बड़ी संख्या में इस्लामी चरमपंथी जमा हुए थे, हथियार जमा किए गए थे, वहीं से हमले किए जा रहे थे। इन सब चीजों को आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन ही कोऑर्डिनेट कर रहे थे।'
बंसल ने यह भी कहा कि अब आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और हैदराबाद के एक नेता के लिए भी समय आ गया है कि वे कानून का सम्मान करें, अन्यथा उन्हें जनता से सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए।
विहिप अध्यक्ष का बयान
विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि ताहिर हुसैन को लोगों ने नगर निगम के लिए चुना था और उन्होंने संविधान के तहत शपथ ली थी। इसके बावजूद उन पर दंगे भड़काने और उनकी अगुवाई करने का आरोप था। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, 'शरीर पर चाकू के 51 जख्म थे, शव को नाले में फेंका गया — यह क्रूरता और बर्बरता की हद थी।'
आलोक कुमार का मानना है कि यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी में आता था और इसमें मृत्युदंड मिलना चाहिए था। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत के फैसले को सभी को मानना होगा।
आम जनता और राजनीतिक असर
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कई मामले अभी भी विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। गौरतलब है कि इस दंगे में दर्जनों लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घर व दुकानें तबाह हुई थीं। ताहिर हुसैन AAP के पार्षद रह चुके हैं, हालाँकि पार्टी ने उनसे पहले ही दूरी बना ली थी।
आगे क्या
दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार उम्रकैद की सजा को चुनौती देने की प्रक्रिया में महीनों से लेकर वर्षों तक का समय लग सकता है। इस बीच, दंगों से जुड़े शेष मामलों में सुनवाई जारी रहेगी।