अंकित शर्मा हत्याकांड: कड़कड़डूमा कोर्ट के फैसले पर मनोज तिवारी बोले — 'कानून के आगे कोई बड़ा नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
कड़कड़डूमा कोर्ट ने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया है। इस फैसले का भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद मनोज तिवारी ने खुलकर स्वागत किया और इसे न्याय व्यवस्था की जीत करार दिया।
मुख्य घटनाक्रम
13 जुलाई को जारी अपने बयान में मनोज तिवारी ने कहा कि अंकित शर्मा की हत्या अत्यंत क्रूर तरीके से की गई थी और इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उन्होंने कहा, 'अंकित शर्मा के परिवार को अपूरणीय क्षति हुई और उन्हें लंबे समय तक न्याय का इंतजार करना पड़ा। अदालत का फैसला यह साबित करता है कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति बड़ा नहीं है।'
गौरतलब है कि ताहिर हुसैन उस समय दिल्ली नगर निगम के पार्षद थे। उन पर हत्या और दंगा भड़काने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। न्यायालय ने विस्तृत सुनवाई के बाद उन्हें दोषी करार दिया।
पृष्ठभूमि: कौन थे अंकित शर्मा
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा का शव एक नाले से बरामद हुआ था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कई धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था। यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा की सबसे चर्चित और संवेदनशील घटनाओं में से एक रहा है।
सांसद तिवारी की प्रतिक्रिया
तिवारी ने कहा, 'ताहिर हुसैन का समर्थन करने वालों को भी आत्ममंथन करना चाहिए।' उन्होंने इस हत्याकांड को केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय बताया। उनके अनुसार इस फैसले से न्याय व्यवस्था पर आम नागरिकों का भरोसा और सुदृढ़ होगा।
तिवारी ने यह भी उम्मीद जताई कि पीड़ित परिवार को आगे भी न्याय प्रक्रिया के तहत पूर्ण न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा, 'कानून का शासन सर्वोपरि है और न्याय की प्रक्रिया अंततः सत्य को सामने लाती है।'
आगे की कानूनी प्रक्रिया
कड़कड़डूमा कोर्ट के दोषसिद्धि के फैसले के बाद अब सज़ा के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू होगी। इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी। यह फैसला उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मुकदमों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।