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अंकित शर्मा हत्याकांड: कड़कड़डूमा कोर्ट के फैसले पर मनोज तिवारी बोले — 'कानून के आगे कोई बड़ा नहीं'

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अंकित शर्मा हत्याकांड: कड़कड़डूमा कोर्ट के फैसले पर मनोज तिवारी बोले — 'कानून के आगे कोई बड़ा नहीं'

सारांश

पाँच साल के लंबे इंतजार के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया। BJP सांसद मनोज तिवारी ने इसे न्याय व्यवस्था की जीत और कानून के शासन का प्रमाण बताया।

मुख्य बातें

कड़कड़डूमा कोर्ट ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया।
यह हत्या फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान हुई थी; अंकित शर्मा का शव एक नाले से बरामद हुआ था।
BJP सांसद मनोज तिवारी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा — 'कानून के सामने कोई भी व्यक्ति बड़ा नहीं है।' तिवारी ने ताहिर हुसैन का समर्थन करने वालों से आत्ममंथन की अपील की।
दोषसिद्धि के बाद अब सज़ा निर्धारण की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।

कड़कड़डूमा कोर्ट ने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया है। इस फैसले का भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद मनोज तिवारी ने खुलकर स्वागत किया और इसे न्याय व्यवस्था की जीत करार दिया।

मुख्य घटनाक्रम

13 जुलाई को जारी अपने बयान में मनोज तिवारी ने कहा कि अंकित शर्मा की हत्या अत्यंत क्रूर तरीके से की गई थी और इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उन्होंने कहा, 'अंकित शर्मा के परिवार को अपूरणीय क्षति हुई और उन्हें लंबे समय तक न्याय का इंतजार करना पड़ा। अदालत का फैसला यह साबित करता है कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति बड़ा नहीं है।'

गौरतलब है कि ताहिर हुसैन उस समय दिल्ली नगर निगम के पार्षद थे। उन पर हत्या और दंगा भड़काने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। न्यायालय ने विस्तृत सुनवाई के बाद उन्हें दोषी करार दिया।

पृष्ठभूमि: कौन थे अंकित शर्मा

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा का शव एक नाले से बरामद हुआ था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कई धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था। यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा की सबसे चर्चित और संवेदनशील घटनाओं में से एक रहा है।

सांसद तिवारी की प्रतिक्रिया

तिवारी ने कहा, 'ताहिर हुसैन का समर्थन करने वालों को भी आत्ममंथन करना चाहिए।' उन्होंने इस हत्याकांड को केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय बताया। उनके अनुसार इस फैसले से न्याय व्यवस्था पर आम नागरिकों का भरोसा और सुदृढ़ होगा।

तिवारी ने यह भी उम्मीद जताई कि पीड़ित परिवार को आगे भी न्याय प्रक्रिया के तहत पूर्ण न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा, 'कानून का शासन सर्वोपरि है और न्याय की प्रक्रिया अंततः सत्य को सामने लाती है।'

आगे की कानूनी प्रक्रिया

कड़कड़डूमा कोर्ट के दोषसिद्धि के फैसले के बाद अब सज़ा के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू होगी। इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी। यह फैसला उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मुकदमों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि दोषसिद्धि और न्याय के बीच अभी सज़ा निर्धारण का महत्वपूर्ण चरण बाकी है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ अपेक्षित हैं, परंतु असली कसौटी यह होगी कि पीड़ित परिवार को त्वरित और पूर्ण न्याय मिले। यह मामला यह भी रेखांकित करता है कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका कितनी निर्णायक है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकित शर्मा हत्याकांड क्या है?
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी और उनका शव एक नाले से बरामद हुआ था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने हत्या और दंगा भड़काने सहित कई धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था।
कड़कड़डूमा कोर्ट ने किसे दोषी ठहराया?
कड़कड़डूमा कोर्ट ने AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत अन्य आरोपियों को अंकित शर्मा हत्याकांड में दोषी करार दिया। ताहिर हुसैन पर हत्या और दंगा भड़काने सहित कई गंभीर आरोप थे।
मनोज तिवारी ने इस फैसले पर क्या कहा?
BJP सांसद मनोज तिवारी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि 'कानून के सामने कोई भी व्यक्ति बड़ा नहीं है।' उन्होंने इसे न्याय व्यवस्था की मजबूती का प्रमाण बताया और ताहिर हुसैन का समर्थन करने वालों से आत्ममंथन की अपील की।
इस मामले में आगे क्या होगा?
दोषसिद्धि के बाद अब अदालत सज़ा निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करेगी। उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े अन्य मुकदमों की कानूनी कार्यवाही भी समानांतर रूप से जारी रहेगी।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे कब और क्यों हुए थे?
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में कई लोगों की जान गई थी और अंकित शर्मा की हत्या उन्हीं दंगों के दौरान हुई थी।
राष्ट्र प्रेस
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