27 जुलाई 2026
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अंकित शर्मा हत्याकांड: कड़कड़डूमा कोर्ट आज सुनाएगी फैसला, ताहिर हुसैन समेत 11 आरोपी

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अंकित शर्मा हत्याकांड: कड़कड़डूमा कोर्ट आज सुनाएगी फैसला, ताहिर हुसैन समेत 11 आरोपी

सारांश

छह साल बाद आज वह दिन आ गया है जब कड़कड़डूमा कोर्ट आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में अपना फैसला सुनाएगी। पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन समेत 11 आरोपियों का भाग्य तय होगा — यह 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक है।

मुख्य बातें

कड़कड़डूमा कोर्ट 11 जून 2026 को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में फैसला सुनाएगी।
AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 11 आरोपियों पर हत्या, दंगा और आपराधिक साजिश के आरोप हैं।
शर्मा का शव 26 फरवरी 2020 को खजूरी खास नाले से बरामद हुआ था।
मार्च 2023 में कोर्ट ने आईपीसी की धारा 302, 120B, 147, 148, 153ए सहित कई धाराओं में आरोप तय किए थे।
दिल्ली उच्च न्यायालय पहले ही ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज कर चुका है।

कड़कड़डूमा कोर्ट 11 जून 2026 को 2020 दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अपना फैसला सुनाएगी। आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित 11 आरोपी इस मामले में कठघरे में हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

26 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की व्यापक सांप्रदायिक हिंसा के बीच अंकित शर्मा का शव खजूरी खास इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को शर्मा घर का सामान खरीदने निकले थे और वापस नहीं लौटे। उनके पिता रविंदर कुमार को स्थानीय लोगों से पता चला कि चांद बाग इलाके से एक युवक को खजूरी खास नाले में फेंका गया था, जिसके बाद शव की पहचान हुई।

अभियोजन पक्ष के आरोप

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि ताहिर हुसैन और उनके साथी उस गैर-कानूनी भीड़ और आपराधिक साजिश का हिस्सा थे, जिसके परिणामस्वरूप दंगों के दौरान शर्मा की हत्या हुई। रविंदर कुमार की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में हुसैन और उनके साथियों को सीधे जिम्मेदार बताया गया।

आरोप और कानूनी धाराएँ

मार्च 2023 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने हुसैन समेत 11 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147 (दंगा करना), 148 (घातक हथियार के साथ दंगा), 153ए (सांप्रदायिक दुश्मनी को बढ़ावा), 302 (हत्या) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय किए। ताहिर हुसैन पर अतिरिक्त रूप से आईपीसी की धारा 505, 109 और 114 के तहत भी आरोप लगाए गए। ट्रायल कोर्ट ने उस समय दर्ज किया था कि हुसैन ने भीड़ को हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए उकसाया।

उच्च न्यायालय का रुख

इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल-न्यायाधीश पीठ ने आरोपों और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों की समीक्षा के बाद यह याचिका अस्वीकार की थी।

आज का फैसला

कड़कड़डूमा कोर्ट ने फैसले की तारीख पहले से आगे बढ़ाते हुए 11 जून निर्धारित की थी। यह फैसला 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े उन महत्वपूर्ण मामलों में से एक है, जिनमें अब तक न्यायिक प्रक्रिया जारी है। फैसले के बाद दोनों पक्षों की ओर से उच्च न्यायालय में अपील की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए एक असाधारण मिसाल बनाता है। गौरतलब है कि दंगों से जुड़े दर्जनों मामले अभी भी विभिन्न चरणों में हैं — यह फैसला उन मामलों में न्यायिक दिशा का संकेत दे सकता है। सवाल यह भी है कि क्या दोष-सिद्धि या बरी होने की स्थिति में उच्च न्यायालय तक की अपील यात्रा पीड़ित परिवार को वह न्याय दे पाएगी जिसका वे छह वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकित शर्मा कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी थे। 25 फरवरी 2020 को वे घर का सामान खरीदने निकले और वापस नहीं लौटे। अगले दिन 26 फरवरी को उनका शव उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास इलाके के एक नाले से बरामद हुआ, जब दिल्ली में व्यापक सांप्रदायिक हिंसा भड़की हुई थी।
ताहिर हुसैन पर क्या आरोप हैं?
AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 120B (आपराधिक साजिश), 147, 148 (दंगा), 153ए (सांप्रदायिक दुश्मनी), 505, 109 और 114 के तहत आरोप तय हैं। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उन्होंने भीड़ को हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए उकसाया।
कड़कड़डूमा कोर्ट में यह मामला कितने समय से चल रहा है?
मामले की एफआईआर 26 फरवरी 2020 को दर्ज हुई थी। मार्च 2023 में आरोप तय हुए और अब 11 जून 2026 को फैसला आना है — यानी एफआईआर दर्ज होने के करीब छह वर्ष बाद।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने ताहिर हुसैन की जमानत क्यों खारिज की?
दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल-न्यायाधीश पीठ ने आरोपों की गंभीरता और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद हुसैन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
आज के फैसले का क्या महत्व है?
यह फैसला 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक में न्यायिक निष्कर्ष होगा। इसमें एक पूर्व निर्वाचित जन-प्रतिनिधि पर हत्या के आरोप हैं, जो इसे दंगों की जवाबदेही के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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