अंकित शर्मा हत्याकांड: दोषी जावेद की अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को नोटिस भेजा, 2 दिसंबर को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए दोषी जावेद की अपील याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर के लिए निर्धारित की है। यह मामला फरवरी 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ा है, जिसमें एक सरकारी अधिकारी की नृशंस हत्या ने पूरे देश को हिला दिया था।
मामले की पृष्ठभूमि
फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में भड़के सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उनका शव चांदबाग इलाके में एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनके शरीर पर 40 से अधिक घाव पाए गए थे, जो हत्या की अत्यंत क्रूरता को दर्शाते हैं।
निचली अदालत का फैसला
31 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस मामले में दोषी जावेद और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के ऐलान के बाद दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया था कि दंगों के दौरान अंकित शर्मा के साथ जो बर्बरता हुई, वह अत्यंत निंदनीय थी।
दोषियों की हाईकोर्ट में चुनौती
जावेद के अधिवक्ता का कहना है कि निचली अदालत ने अपने आदेश में स्वयं माना है कि अभियोजन पक्ष घटना के समय आरोपी की सीधी भूमिका साबित करने में सफल नहीं रहा। इसी आधार पर जावेद ने दिल्ली हाईकोर्ट में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है।
ताहिर हुसैन की अधिवक्ता तारा नरूला ने भी कहा कि अदालत ने हत्या की बर्बरता को ध्यान में रखा, परंतु साथ ही यह भी स्वीकार किया कि किसी भी दोषी की हत्या में प्रत्यक्ष भूमिका — जैसे कि अंकित को घसीटना या हथियार से प्रहार करना — सिद्ध नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में उनका पक्ष मज़बूत रहेगा।
पीड़ित परिवार का पक्ष
अंकित शर्मा के परिजनों ने स्पष्ट किया है कि यदि यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट या सर्वोच्च न्यायालय तक जाता है, तो परिवार हर स्तर पर कानूनी लड़ाई जारी रखेगा। परिजनों की माँग थी कि इस हत्याकांड को 'दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी में रखते हुए दोषियों को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अदालत ने न्याय किया है, लेकिन ताहिर हुसैन को फाँसी की सजा मिलनी चाहिए थी।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। अब 2 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई में यह तय होगा कि अदालत दोषियों की अपील को किस आधार पर सुनेगी। यह मामला दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे संवेदनशील और चर्चित मुकदमों में से एक है, और इसका परिणाम भविष्य के समान मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल बन सकता है।