6 जुलाई 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट ने डीसीपी को जांच का आदेश दिया: अंतरिम सुरक्षा के बावजूद गिरफ्तारी की कोशिश पर सवाल

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दिल्ली हाई कोर्ट ने डीसीपी को जांच का आदेश दिया: अंतरिम सुरक्षा के बावजूद गिरफ्तारी की कोशिश पर सवाल

सारांश

अंतरिम सुरक्षा के बावजूद आरोपी को गिरफ्तार करने मुंबई जाने की अनुमति मांगी गई — और एसीपी ने मंजूरी भी दे दी। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस चूक को गंभीरता से लेते हुए डीसीपी को जांच और रिपोर्ट का आदेश दिया है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाई कोर्ट ने 6 जुलाई 2026 को संबंधित डीसीपी को जांच और रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
जांच अधिकारी ने 8 मई को मुंबई जाकर आरोपी अमित जैन की 'तलाशी और गिरफ्तारी' की अनुमति मांगी, जबकि सेशंस कोर्ट से अंतरिम सुरक्षा पहले से प्राप्त थी।
अनुरोध एसएचओ के माध्यम से आगे बढ़ा और एसीपी ने मंजूरी दी — यह प्रक्रिया न्यायिक आदेश के विपरीत थी।
अदालत ने रिकॉर्ड पर रखे दस्तावेज में 'साफ गलतियां और विसंगतियां' पाईं।
जांच अधिकारी को दो दिनों के भीतर आवेदक को आवश्यक दस्तावेजों की सूची देने का निर्देश।
मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 को निर्धारित।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 6 जुलाई 2026 को संबंधित डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) को उन परिस्थितियों की जांच करने का निर्देश दिया, जिनमें एक जांच अधिकारी ने एक आरोपी की 'तलाशी और गिरफ्तारी' के लिए मुंबई जाने की अनुमति मांगी — जबकि उस आरोपी को सेशंस कोर्ट से गिरफ्तारी के विरुद्ध अंतरिम सुरक्षा पहले से प्राप्त थी। यह आदेश जस्टिस प्रतीक जालान की एकल पीठ ने सुभाष प्लेस पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से संबंधित अमित जैन की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता अमित जैन ने 'सूचना का अधिकार (आरटीआई)' कानून के तहत एक दस्तावेज प्राप्त किया, जिससे यह उजागर हुआ कि जांच अधिकारी ने मौजूदा एफआईआर और एक अन्य आपराधिक मामले के सिलसिले में 'जांच (आरोपी की तलाश और गिरफ्तारी) के उद्देश्य से' मुंबई जाने की अनुमति अपने वरिष्ठ से मांगी थी। यह अनुरोध स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) के माध्यम से आगे बढ़ाया गया और 8 मई को संबंधित असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) ने इसे मंजूरी दी।

गौरतलब है कि यह मंजूरी उस समय दी गई जब सेशंस कोर्ट द्वारा आरोपी को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा पहले ही प्रदान की जा चुकी थी। अदालत की नज़र में यह स्थिति न केवल असंगत थी, बल्कि न्यायिक आदेश की अवहेलना की ओर भी संकेत करती थी।

हाई कोर्ट का आदेश

जस्टिस जालान ने अपने आदेश में कहा, 'इन हालात पर ध्यान देते हुए संबंधित डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस को निर्देश दिया जाता है कि वे मामले की जांच करें और इस कोर्ट में एक रिपोर्ट दाखिल करें। इस रिपोर्ट में उन हालात का जिक्र हो, जिनमें ऐसी स्थिति के बावजूद यह अनुरोध किया गया और उसे मंजूरी दी गई।' अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेज में 'साफ तौर पर गलतियां और विसंगतियां हैं, जिनमें उस स्थान के बारे में जानकारी भी शामिल है, जिसके लिए मंजूरी मांगी गई थी।'

अभियोजन पक्ष का पक्ष

सुनवाई के दौरान एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मंजीत आर्या ने अदालत को बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट से 14 मई को मिली अंतरिम सुरक्षा के बाद याचिकाकर्ता जांच में शामिल हुआ था, किंतु जांच एजेंसी को कुछ अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता थी। इस पर जस्टिस जालान ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वे दो दिनों के भीतर आवेदक को आवश्यक दस्तावेजों की सूची सौंपें।

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि उनके पास मौजूद संबंधित दस्तावेज जांच एजेंसी को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। शिकायतकर्ता की ओर से उपस्थित सीनियर एडवोकेट मनु शर्मा को भी अगली सुनवाई से पूर्व रिकॉर्ड पर अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की अनुमति दी गई।

आगे की सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले को 14 जुलाई 2026 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। डीसीपी की जांच रिपोर्ट और दोनों पक्षों के दस्तावेज उस तारीख तक अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने अपेक्षित हैं। यह मामला पुलिस प्रक्रिया और न्यायिक संरक्षण के सम्मान के प्रश्न पर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या जानबूझकर नजरअंदाज की गई — दोनों ही स्थितियाँ गंभीर हैं। आरटीआई के माध्यम से यह दस्तावेज सामने आना यह भी बताता है कि पारदर्शिता के औजार तब काम आते हैं जब संस्थागत निगरानी विफल हो जाती है। डीसीपी की रिपोर्ट तय करेगी कि यह चूक थी या मंशा — और उसी पर निर्भर करेगा कि अदालत आगे क्या कदम उठाती है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाई कोर्ट ने डीसीपी को जांच का आदेश क्यों दिया?
क्योंकि जांच अधिकारी ने आरोपी अमित जैन की गिरफ्तारी के लिए मुंबई जाने की अनुमति मांगी और एसीपी ने 8 मई को मंजूरी दी, जबकि सेशंस कोर्ट पहले ही उस आरोपी को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दे चुका था। अदालत ने इसे असंगत और जांच योग्य पाया।
अमित जैन कौन हैं और उनका मामला क्या है?
अमित जैन वह व्यक्ति हैं जिन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। उनके विरुद्ध सुभाष प्लेस पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज है और एक अन्य आपराधिक मामला भी उनसे जुड़ा है।
आरटीआई दस्तावेज से क्या पता चला?
आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेज से पता चला कि जांच अधिकारी ने 'जांच (आरोपी की तलाश और गिरफ्तारी) के उद्देश्य से' मुंबई जाने की अनुमति मांगी थी। इस दस्तावेज में अदालत को कई गलतियां और विसंगतियां भी मिलीं, जिनमें गंतव्य स्थान की जानकारी भी शामिल है।
मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले को 14 जुलाई 2026 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। तब तक डीसीपी की जांच रिपोर्ट और दोनों पक्षों के दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाने अपेक्षित हैं।
क्या याचिकाकर्ता को अभी भी गिरफ्तारी से सुरक्षा मिली हुई है?
हां, दिल्ली हाई कोर्ट ने 14 मई को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी और याचिकाकर्ता उसके बाद जांच में शामिल भी हुआ। अदालत ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे दो दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेजों की सूची आवेदक को सौंपें।
राष्ट्र प्रेस
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