सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व IAS अनिल टुटेजा को DMF घोटाले में जमानत दी, छत्तीसगढ़ से बाहर रहने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 18 मई 2026 को छत्तीसगढ़ के कथित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत प्रदान की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह राहत देते हुए कहा कि टुटेजा अप्रैल 2024 से हिरासत में हैं और मुकदमे के जल्द पूरा होने की कोई संभावना नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 85 गवाहों से पूछताछ प्रस्तावित है, जिससे मुकदमे में वर्षों का समय लग सकता है। अदालत ने यह भी नोट किया कि इसी मामले में समान परिस्थितियों वाले सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। पीठ ने कहा, 'यह सच है कि याचिकाकर्ता पर गंभीर आरोप हैं, लेकिन यह मुकदमे का विषय होगा। हम मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करना उचित समझते हैं।'
रिकॉर्ड के अनुसार, टुटेजा को इस विशेष मामले में 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि वे अन्य मामलों के सिलसिले में 21 अप्रैल 2024 से ही न्यायिक हिरासत में थे।
जमानत की शर्तें
सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत के साथ कड़ी शर्तें भी जोड़ीं। टुटेजा को निर्देश दिया गया है कि वे छत्तीसगढ़ से बाहर रहें और रिहाई के एक सप्ताह के भीतर एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) तथा संबंधित पुलिस स्टेशन को अपने निवास का विवरण और संपर्क नंबर उपलब्ध कराएँ। इसके अतिरिक्त, उन्हें निचली अदालत में प्रत्येक सुनवाई की तारीख पर उपस्थित रहना होगा और गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने से पूर्णतः बचना होगा।
अभियोजन पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया। अभियोजन ने तर्क दिया कि टुटेजा DMF घोटाले सहित कई मामलों में कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ता रहे हैं और उनका गवाहों को प्रभावित करने तथा जाँच में हस्तक्षेप करने का पूर्व इतिहास है। अभियोजन ने कुछ व्हाट्सएप संदेशों का भी हवाला दिया, जिनसे कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि टुटेजा ने पहले के मामलों में अपने पक्ष में फैसले प्रभावित करने की कोशिश की थी।
बचाव पक्ष के वकील ने इन दलीलों का खंडन करते हुए कहा कि इसी तरह के आरोपों पर पहले विचार किया जा चुका है और टुटेजा को अन्य मामलों में जमानत पहले ही मिल चुकी है।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का पूर्व निर्णय
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इसी वर्ष अप्रैल में टुटेजा की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल-न्यायाधीश पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं जो कथित अपराधों में उनकी संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि आर्थिक अपराध पूरी ठंडी सोच और सोची-समझी योजना के साथ, निजी लाभ के लिए किए जाते हैं और इसलिए ऐसे मामलों में जमानत के प्रति सख्त रवैया अपनाया जाना चाहिए। उच्च न्यायालय के अनुसार, रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं।
DMF घोटाला: पृष्ठभूमि
यह मामला खनन-प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए आरक्षित DMF फंड के कथित दुरुपयोग से संबंधित है। आरोपों में टेंडर प्रक्रियाओं में हेरफेर और अवैध कमीशन वसूली शामिल हैं। गौरतलब है कि यह मामला छत्तीसगढ़ में खनन क्षेत्र से जुड़े कई भ्रष्टाचार के आरोपों की श्रृंखला का हिस्सा है। अब सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद निचली अदालत में मुकदमे की अगली सुनवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।