सड़क पर नमाज पर योगी के बयान को उत्तराखंड मदरसा बोर्ड चेयरमैन का समर्थन, कहा — 'मस्जिद में शिफ्ट में पढ़ें'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सड़क पर नमाज न पढ़ने की सख्त हिदायत दिए जाने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस विवाद के बीच उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन मुफ्ती शमून कासमी ने 19 मई को सीएम योगी के बयान का खुलकर समर्थन किया और कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ना इस्लाम की दृष्टि से भी उचित नहीं है।
मुफ्ती कासमी का बयान
मुफ्ती शमून कासमी ने कहा, 'सीएम योगी ने जो कहा है, वह बिल्कुल सही है। सीएम योगी एक संत हैं; एक संत न सिर्फ अपने धर्म को जानता है, बल्कि अन्य धर्मों का भी अध्ययन करता है। ऐसे में सीएम योगी का कहना कि रोड पर नमाज नहीं पढ़नी चाहिए, मैं पूर्णतः उनका समर्थन करता हूं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नमाज सार्वजनिक स्थान या सरकारी संपत्ति पर नहीं पढ़ी जानी चाहिए, क्योंकि ये वे रास्ते हैं जहाँ से आम जनता, एंबुलेंस और आपातकालीन वाहन गुज़रते हैं।
कासमी ने कहा, 'इन जगहों से एंबुलेंस निकल सकती है, जिसमें मरीज हो सकते हैं और देरी की वजह से उनकी जान जा सकती है।' उन्होंने सीएम योगी की उस सलाह का भी समर्थन किया जिसमें कहा गया था कि यदि मस्जिद में जगह कम हो और नमाजी अधिक हों, तो शिफ्टों में नमाज पढ़ी जा सकती है।
तथाकथित नेतृत्व पर निशाना
कासमी ने उन मुस्लिम नेताओं की आलोचना की जो सड़क पर नमाज को अन्य धर्मों की सार्वजनिक गतिविधियों के समकक्ष बताते हैं। उन्होंने कहा, 'यह कहना कि कहीं पर रथयात्रा निकल रही है और अन्य धर्मों की गतिविधियाँ चल रही हैं, तो उसके तर्ज पर हम भी सड़कों पर नमाज पढ़ेंगे — यह बात बिल्कुल उचित नहीं है। तथाकथित लोग जो मुसलमानों का नेतृत्व करते हैं, अगर वे इस्लाम को ठीक तरह से पढ़ लें तो वो भी सीएम योगी का धन्यवाद करेंगे।'
उत्तराखंड का उदाहरण
कासमी ने उत्तराखंड को एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में कहीं भी सड़कों पर नमाज नहीं होती। उन्होंने बताया कि इसके लिए लोगों के बीच जाकर जागरूकता फैलाने का प्रयास भी किया गया है।
कासमी ने यह भी उल्लेख किया कि सीएम धामी ने अल्पसंख्यकों की शिक्षा के लिए कई प्राधिकरण स्थापित किए हैं, जिनमें मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन — सभी समुदायों के बच्चों को IAS और IPS जैसी सेवाओं तक पहुँचने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।
पृष्ठभूमि: योगी की हिदायत
बकरीद के अवसर पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज न पढ़ने की सख्त हिदायत दी थी और मस्जिदों में शिफ्ट प्रणाली अपनाने की सलाह दी थी। यह बयान राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है, और इस पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।
उत्तराखंड मदरसा बोर्ड प्रमुख का यह समर्थन इस बहस में एक नया आयाम जोड़ता है, जहाँ एक मुस्लिम धार्मिक-शैक्षणिक संस्था के शीर्ष पदाधिकारी ने स्वयं इस्लामी दृष्टिकोण से सड़क पर नमाज को अनुचित ठहराया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा धार्मिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।