सड़क पर नमाज नहीं चलेगी — योगी आदित्यनाथ की दो टूक चेतावनी, बरेली का दिया हवाला

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सड़क पर नमाज नहीं चलेगी — योगी आदित्यनाथ की दो टूक चेतावनी, बरेली का दिया हवाला

सारांश

लखनऊ में एक कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने दो टूक कहा — सड़क पर नमाज की कोई इजाज़त नहीं, शिफ्ट में पढ़ें; न माने तो 'दूसरा तरीका' अपनाया जाएगा। बरेली का हवाला देकर उन्होंने सरकार की ताकत याद दिलाई और यूपी की बदली पहचान, मीडिया और ट्रेड यूनियन पर भी बेबाक राय रखी।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18 मई 2025 को लखनऊ में कहा कि सड़क पर नमाज की इजाज़त नहीं दी जाएगी।
उन्होंने कहा — 'शिफ्ट में पढ़िए, हम रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर नहीं' ; न माने तो 'दूसरा तरीका' अपनाया जाएगा।
बरेली में पहले हुई कार्रवाई को सरकार की नीति की मिसाल के रूप में पेश किया गया।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यूपी बॉटम-2 से टॉप-2 राज्यों में पहुँचा है — ब्रह्मोस मिसाइल , डिफेंस कॉरिडोर और निवेश इसके प्रमाण।
फेक न्यूज और डीप-फेक को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया; ट्रेड यूनियन संस्कृति की तीखी आलोचना की।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18 मई 2025 को लखनऊ में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सड़क पर नमाज पढ़ने के मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाया — कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर नमाज की कोई इजाज़त नहीं दी जाएगी, और जो प्यार से नहीं मानेंगे, उनके लिए 'दूसरा तरीका' अपनाया जाएगा। यह बयान उस व्यापक संबोधन का हिस्सा था जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश की बदली हुई कानून-व्यवस्था, मीडिया की भूमिका और ट्रेड यूनियन संस्कृति पर भी अपने विचार रखे।

सड़क पर नमाज — मुख्यमंत्री का सीधा संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा, 'नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए, हम रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर इसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती।' उन्होंने तर्क दिया कि सड़कें आवागमन के लिए हैं — सामान्य नागरिक, बीमार व्यक्ति, कामगार और कर्मचारी सभी उन पर चलते हैं। बरेली का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ जिन लोगों ने 'हाथ आजमाने का काम किया', उन्हें सरकार की ताकत का अंदाज़ा हो गया।

जब लोगों ने यह तर्क दिया कि उनकी संख्या अधिक है, तो मुख्यमंत्री ने कहा — 'शिफ्ट में कर लो। घर में जगह नहीं है तो संख्या नियंत्रित करो। सिस्टम के साथ रहना है तो नियम-कानून मानो।' यह बयान तत्काल राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गया।

यूपी की बदलती पहचान — मुख्यमंत्री का दावा

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछली सरकारों के दौर में उत्तर प्रदेश कट्टा-बम, दंगे और माफिया संस्कृति के लिए जाना जाता था। आज राज्य की पहचान ब्रह्मोस मिसाइल, डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेस-वे, इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स और निवेश गंतव्य के रूप में बन रही है। उन्होंने कहा कि राज्य कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर की बदौलत बॉटम-2 से टॉप-2 राज्यों में पहुँचा है।

उन्होंने यह भी कहा कि 9 वर्ष पहले जब उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया था, तब हर जिले में समानांतर माफिया सत्ता थी, शिक्षक-व्यापारी गुंडा टैक्स देने को मजबूर थे और बेटियाँ सुरक्षित नहीं थीं। उन्होंने कहा — 'आज राह चलती बेटी के साथ छेड़खानी करने वाले की दुर्गति रावण और दुर्योधन जैसी होना तय है।'

मीडिया और फेक न्यूज पर चेतावनी

मुख्यमंत्री ने पत्रकारिता पर भी विस्तार से बोला। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी और गणेश शंकर विद्यार्थी की पत्रकारिता को आदर्श बताया। साथ ही कहा कि सनसनी और फेक न्यूज समाज में अराजकता फैलाती हैं।

उन्होंने कहा, 'रिपोर्टिंग को सनसनी पैदा करने का आधार बनाने की बजाय संवेदनशील बनाया जाता तो बहुत सारी जगहों पर लॉ एंड ऑर्डर की समस्या नहीं खड़ी होती।' डीप-फेक और फेक न्यूज को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए उन्होंने कहा कि 1975 में आपातकाल के दौरान मूर्धन्य संपादकों ने लोकतंत्र को बचाया था।

ट्रेड यूनियन पर तीखा प्रहार

मुख्यमंत्री ने ट्रेड यूनियन संस्कृति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियन नेता चंदा वसूली से अपना घर भरते हैं और श्रमिकों को भुखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर देते हैं। कानपुर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियन नेता सांसद व मंत्री बन गए, लेकिन श्रमिक भुखमरी के कगार पर पहुँच गया।

आगे क्या

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज़ होने की संभावना है। विपक्षी दल इस वक्तव्य को संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में चुनौती दे सकते हैं। सरकार का रुख स्पष्ट है — सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी धार्मिक गतिविधि से यातायात बाधित नहीं होने दिया जाएगा। बरेली में पहले हुई कार्रवाई इस नीति की व्यावहारिक मिसाल के रूप में सामने रखी गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक स्थापित प्रशासनिक रुख की पुनरावृत्ति है — जो हर बार चुनावी या सामाजिक तनाव के दौर में और मुखर हो जाती है। 'शिफ्ट में नमाज' का सुझाव व्यावहारिक लग सकता है, लेकिन 'संख्या नियंत्रित करो' वाला हिस्सा संवैधानिक सीमाओं को छूता है और विपक्ष को स्वाभाविक हमले का मौका देता है। असली सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक स्थल पर धार्मिक गतिविधि की रोक समान रूप से सभी समुदायों पर लागू होती है — यह पारदर्शिता ही इस नीति को कानूनी और नैतिक वैधता दे सकती है।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगी आदित्यनाथ ने सड़क पर नमाज को लेकर क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18 मई 2025 को लखनऊ में कहा कि सड़क पर नमाज की कोई इजाज़त नहीं दी जाएगी — नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़ें। उन्होंने चेतावनी दी कि जो प्यार से नहीं मानेंगे, उनके लिए 'दूसरा तरीका' अपनाया जाएगा।
बरेली का संदर्भ मुख्यमंत्री ने क्यों दिया?
मुख्यमंत्री ने बरेली का उल्लेख उन लोगों के उदाहरण के रूप में किया जिन्होंने सरकार के निर्देशों के विरुद्ध 'हाथ आजमाने' का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि वहाँ सरकार की ताकत का प्रदर्शन हो चुका है।
योगी आदित्यनाथ ने यूपी की बदली पहचान के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि पहले यूपी दंगे, माफिया और कट्टा-बम संस्कृति के लिए जाना जाता था, अब यह ब्रह्मोस मिसाइल, डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेस-वे और निवेश गंतव्य के रूप में पहचाना जाता है। उनके अनुसार राज्य बॉटम-2 से टॉप-2 में पहुँचा है।
मुख्यमंत्री ने मीडिया और फेक न्यूज पर क्या कहा?
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनसनी और फेक न्यूज समाज में अराजकता फैलाती हैं और कई जगहों पर कानून-व्यवस्था की समस्या की जड़ में संवेदनहीन रिपोर्टिंग है। उन्होंने डीप-फेक को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया।
ट्रेड यूनियन पर योगी आदित्यनाथ का क्या रुख है?
मुख्यमंत्री ने ट्रेड यूनियन संस्कृति को 'सत्यानाशी' करार दिया। उन्होंने कानपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि ट्रेड यूनियन नेता सांसद-मंत्री बन गए जबकि श्रमिक भुखमरी के कगार पर पहुँच गए।
राष्ट्र प्रेस
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