जल जीवन मिशन 2.0: अंडमान-निकोबार और पश्चिम बंगाल के साथ एमओयू, सीआर पाटिल ने दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने सोमवार, 18 मई 2026 को जानकारी दी कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह प्रशासन तथा पश्चिम बंगाल सरकार — दोनों के साथ अलग-अलग समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों का उद्देश्य दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 'हर घर जल' के लक्ष्य को व्यावहारिक रूप देना है।
अंडमान-निकोबार के साथ एमओयू: मुख्य घटनाक्रम
पाटिल ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के साथ हुआ यह एमओयू दूरस्थ एवं द्वीपीय क्षेत्रों में सुरक्षित, नियमित एवं सतत पेयजल सेवाएं सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हस्ताक्षर समारोह में अंडमान एवं निकोबार के उपराज्यपाल एडमिरल डीके जोशी, राज्य मंत्री वी. सोमन्ना तथा मंत्रालय एवं केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि अंडमान-निकोबार जैसे द्वीपीय भूगोल में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति एक दीर्घकालिक चुनौती रही है। यह एमओयू उस चुनौती को केंद्र-राज्य साझेदारी के ढाँचे में संस्थागत रूप देने का प्रयास है।
पश्चिम बंगाल के साथ साझेदारी
इसी क्रम में जल शक्ति मंत्रालय एवं पश्चिम बंगाल सरकार के बीच भी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए, जबकि राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सहभागिता की। राज्य मंत्री वी. सोमन्ना एवं पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
मंत्री पाटिल ने कहा कि पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों तक सुरक्षित पेयजल सेवाओं का विस्तार न केवल लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा, बल्कि समावेशी विकास एवं जन सहभागिता आधारित सुशासन को भी सशक्त करेगा।
कल्पसर प्रोजेक्ट का संदर्भ
पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड्स दौरे का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने वहाँ के प्रसिद्ध डैम का दौरा किया, जो गुजरात के बहुप्रतीक्षित कल्पसर प्रोजेक्ट से मिलता-जुलता है। कल्पसर एक बहुउद्देशीय परियोजना है जिसका लक्ष्य खंभात की खाड़ी के दोनों किनारों को जोड़कर मीठे पानी का एक विशाल सरोवर बनाना है — जिससे बिजली उत्पादन, सिंचाई, उद्योग और पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
आम जनता पर असर
इन दोनों एमओयू से अंडमान-निकोबार के दूरदराज के द्वीपों और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लाखों परिवारों को नल से स्वच्छ जल मिलने की संभावना बढ़ेगी। यह ऐसे समय में आया है जब जल जीवन मिशन के तहत देशभर में 'हर घर जल' कनेक्शन की गति तेज़ की जा रही है।
आगे चलकर इन समझौतों के क्रियान्वयन की निगरानी केंद्र और संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन संयुक्त रूप से करेंगे।