बिहार भूमि न्यायाधिकरण में सदस्य संख्या 4 से बढ़कर 7, 5 नए न्यायिक सदस्य नियुक्त
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार ने 18 मई 2025 को भूमि विवादों के लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिहार भूमि न्यायाधिकरण, पटना में सदस्यों की कुल संख्या चार से बढ़ाकर सात कर दी है और एक साथ पाँच नए न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति भी की है। यह कदम राज्य में भूमि विवादों की बढ़ती संख्या और न्याय में हो रही देरी को देखते हुए उठाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह निर्णय राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद लिया गया है। बिहार भूमि न्यायाधिकरण अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के तहत न्यायाधिकरण की कुल सदस्य संख्या पुनर्निर्धारित की गई है। इससे पहले न्यायाधिकरण में केवल चार सदस्य कार्यरत थे।
नए न्यायिक सदस्य कौन हैं
नियुक्त किए गए पाँच नए न्यायिक सदस्यों में शामिल हैं — सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, किशनगंज, मनोज कुमार; सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पूर्णिया, किशोर प्रसाद; पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता कुमार नवीनम; सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गया, रवीन्द्र पटवारी; तथा पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रविन्द्र राय। इन नियुक्तियों में न्यायिक अनुभव और विधिक विशेषज्ञता दोनों का समावेश किया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार भूमि विवादों के समयबद्ध निष्पादन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, 'आम लोगों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने और भूमि संबंधी मामलों के त्वरित निष्पादन के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।' मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायाधिकरण को और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में आगे भी कदम उठाए जाते रहेंगे।
आम जनता पर असर
बिहार में भूमि विवाद दशकों से एक जटिल समस्या रहे हैं। लंबित मामलों की बड़ी संख्या के कारण आम नागरिकों को न्याय पाने में वर्षों लग जाते हैं। सदस्यों की संख्या में वृद्धि से न्यायाधिकरण की सुनवाई क्षमता बढ़ेगी, जिससे किसानों, छोटे भू-स्वामियों और विवादग्रस्त परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि भूमि विवाद ग्रामीण बिहार में सामाजिक तनाव और हिंसा का एक प्रमुख कारण भी रहे हैं।
क्या होगा आगे
नए सदस्यों की नियुक्ति के बाद बिहार भूमि न्यायाधिकरण में अब सात सदस्य कार्यरत होंगे, जिससे एक साथ अधिक पीठों का गठन और मामलों की समानांतर सुनवाई संभव होगी। राज्य सरकार के अनुसार, भूमि विवादों के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और इस दिशा में और भी सुधारात्मक कदम उठाए जाने की संभावना है।