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बिहार भूमि न्यायाधिकरण में सदस्य संख्या 4 से बढ़कर 7, 5 नए न्यायिक सदस्य नियुक्त

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बिहार भूमि न्यायाधिकरण में सदस्य संख्या 4 से बढ़कर 7, 5 नए न्यायिक सदस्य नियुक्त

सारांश

बिहार सरकार ने भूमि विवादों के लंबित मामलों से निपटने के लिए भूमि न्यायाधिकरण में सदस्य संख्या चार से बढ़ाकर सात की और पाँच नए न्यायिक सदस्य नियुक्त किए। मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने इसे आम नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में अहम कदम बताया।

मुख्य बातें

बिहार भूमि न्यायाधिकरण, पटना में सदस्यों की संख्या 4 से बढ़ाकर 7 की गई।
5 नए न्यायिक सदस्य नियुक्त — मनोज कुमार , किशोर प्रसाद , कुमार नवीनम , रवीन्द्र पटवारी और रविन्द्र राय ।
यह निर्णय बिहार भूमि न्यायाधिकरण अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के तहत लिया गया।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा अधिसूचना जारी।
मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा — भूमि विवादों का समयबद्ध निपटारा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता।

बिहार सरकार ने 18 मई 2025 को भूमि विवादों के लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिहार भूमि न्यायाधिकरण, पटना में सदस्यों की कुल संख्या चार से बढ़ाकर सात कर दी है और एक साथ पाँच नए न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति भी की है। यह कदम राज्य में भूमि विवादों की बढ़ती संख्या और न्याय में हो रही देरी को देखते हुए उठाया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह निर्णय राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद लिया गया है। बिहार भूमि न्यायाधिकरण अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के तहत न्यायाधिकरण की कुल सदस्य संख्या पुनर्निर्धारित की गई है। इससे पहले न्यायाधिकरण में केवल चार सदस्य कार्यरत थे।

नए न्यायिक सदस्य कौन हैं

नियुक्त किए गए पाँच नए न्यायिक सदस्यों में शामिल हैं — सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, किशनगंज, मनोज कुमार; सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पूर्णिया, किशोर प्रसाद; पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता कुमार नवीनम; सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गया, रवीन्द्र पटवारी; तथा पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रविन्द्र राय। इन नियुक्तियों में न्यायिक अनुभव और विधिक विशेषज्ञता दोनों का समावेश किया गया है।

सरकार की प्रतिक्रिया

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार भूमि विवादों के समयबद्ध निष्पादन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, 'आम लोगों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने और भूमि संबंधी मामलों के त्वरित निष्पादन के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।' मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायाधिकरण को और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में आगे भी कदम उठाए जाते रहेंगे।

आम जनता पर असर

बिहार में भूमि विवाद दशकों से एक जटिल समस्या रहे हैं। लंबित मामलों की बड़ी संख्या के कारण आम नागरिकों को न्याय पाने में वर्षों लग जाते हैं। सदस्यों की संख्या में वृद्धि से न्यायाधिकरण की सुनवाई क्षमता बढ़ेगी, जिससे किसानों, छोटे भू-स्वामियों और विवादग्रस्त परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि भूमि विवाद ग्रामीण बिहार में सामाजिक तनाव और हिंसा का एक प्रमुख कारण भी रहे हैं।

क्या होगा आगे

नए सदस्यों की नियुक्ति के बाद बिहार भूमि न्यायाधिकरण में अब सात सदस्य कार्यरत होंगे, जिससे एक साथ अधिक पीठों का गठन और मामलों की समानांतर सुनवाई संभव होगी। राज्य सरकार के अनुसार, भूमि विवादों के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और इस दिशा में और भी सुधारात्मक कदम उठाए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या केवल संख्या बढ़ाने से लंबित मामलों का बोझ वास्तव में घटेगा। बिहार में भूमि विवादों की जड़ें अक्सर अपूर्ण भू-अभिलेखों और डिजिटलीकरण की धीमी रफ्तार में हैं — जब तक इन्हें ठीक नहीं किया जाता, नए मामले पुराने की जगह लेते रहेंगे। न्यायाधिकरण को मजबूत करना ज़रूरी है, पर यह पर्याप्त नहीं — भू-सुधार की व्यापक नीति के बिना यह राहत अस्थायी साबित हो सकती है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार भूमि न्यायाधिकरण में सदस्यों की संख्या क्यों बढ़ाई गई?
राज्य में भूमि विवादों के लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और न्याय में हो रही देरी को देखते हुए बिहार सरकार ने यह फैसला किया। अधिक सदस्य होने से एक साथ अधिक पीठों का गठन संभव होगा और मामलों का निपटारा तेज़ी से हो सकेगा।
बिहार भूमि न्यायाधिकरण में नए नियुक्त 5 सदस्य कौन हैं?
नियुक्त पाँच सदस्य हैं — सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार (किशनगंज), सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश किशोर प्रसाद (पूर्णिया), पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता कुमार नवीनम, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवीन्द्र पटवारी (गया) और पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रविन्द्र राय।
यह निर्णय किस कानूनी प्रावधान के तहत लिया गया?
यह निर्णय बिहार भूमि न्यायाधिकरण अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के तहत लिया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है।
इस फैसले से बिहार के आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
न्यायाधिकरण की क्षमता बढ़ने से भूमि विवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई तेज़ होगी और नागरिकों को न्याय के लिए वर्षों इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। किसानों, छोटे भू-स्वामियों और विवादग्रस्त परिवारों को विशेष रूप से राहत मिलने की उम्मीद है।
मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने इस कदम पर क्या कहा?
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार भूमि विवादों के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और न्यायाधिकरण को और मजबूत बनाकर आम नागरिकों को त्वरित एवं प्रभावी न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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