भू-सर्वेक्षण में लापरवाही पर कठोर कार्रवाई होगी, गुणवत्ता और समयसीमा अनिवार्य: निदेशक सुहर्ष भगत

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भू-सर्वेक्षण में लापरवाही पर कठोर कार्रवाई होगी, गुणवत्ता और समयसीमा अनिवार्य: निदेशक सुहर्ष भगत

सारांश

शेखपुरा में भू-अभिलेख निदेशक सुहर्ष भगत ने समीक्षा बैठक में सर्वेक्षण कार्य में लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी। 284 में से 61 मौजे अभी लंबित हैं। पैतृक भूमि को 'सरकारी जमीन' घोषित करने की अनियमितता पर भी सख्त जांच के आदेश दिए गए।

Key Takeaways

  • निदेशक सुहर्ष भगत ने 25 अप्रैल को शेखपुरा के मंथन सभागार में भू-सर्वेक्षण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
  • 284 मौजों में से 223 मौजों में प्रपत्र-20 का कार्य पूर्ण, 61 मौजे अभी भी लंबित हैं।
  • पैतृक भूमि में एक भाई की जमीन को 'सरकारी जमीन' घोषित करने की अनियमितता पर सूक्ष्म जांच के आदेश।
  • सर्वेक्षण कार्य में गुणवत्ता और समयसीमा दोनों का पालन अनिवार्य किया गया।
  • लापरवाही करने वाले कर्मियों और पदाधिकारियों पर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी।
  • जिला पदाधिकारी ने निदेशक को भगवान विष्णु की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया।

शेखपुरा, 25 अप्रैल। भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशक सुहर्ष भगत की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित मंथन सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें शेखपुरा जिले में जारी विशेष भू-सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यों की प्रगति का गहन मूल्यांकन किया गया। निदेशक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सर्वेक्षण कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी कर्मियों व पदाधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक का उद्देश्य और मुख्य निर्देश

इस समीक्षा बैठक का प्राथमिक उद्देश्य जिले में चल रहे विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त कार्यों की प्रगति की जांच करना और लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करना था। निदेशक सुहर्ष भगत ने कहा कि सर्वे कार्य को केवल निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यदि धरातल पर कोई तकनीकी या व्यावहारिक समस्या उत्पन्न होती है, तो उसे छिपाने के बजाय तत्काल संबंधित वरिष्ठ पदाधिकारियों से संपर्क कर उसका समाधान कराया जाए। समस्याओं को दबाने की प्रवृत्ति सर्वेक्षण की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती है।

भूमि दर्ज करने में अनियमितता पर चिंता

बैठक में निदेशक भगत ने एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि यह देखा जा रहा है कि एक ही पैतृक या निजी भूमि के मामले में एक भाई के नाम पर जमीन दर्ज की जा रही है, जबकि दूसरे भाई की हिस्सेदारी वाली भूमि को 'सरकारी जमीन' घोषित कर दिया जा रहा है।

यह गंभीर अनियमितता न केवल भूमि स्वामियों के साथ अन्याय है, बल्कि भविष्य में भूमि विवादों को भी जन्म दे सकती है। निदेशक ने ऐसे संवेदनशील मामलों की सूक्ष्मता से जांच करने का सख्त आदेश दिया ताकि किसी भी रैयत (भूमि स्वामी) के साथ अन्याय न हो।

सर्वे प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, जिले के कुल 284 मौजों में सर्वेक्षण कार्य प्रगति पर है। इनमें से 223 मौजों में प्रपत्र-20 (अंतिम प्रकाशन) का कार्य पूर्ण हो चुका है। हालांकि, अभी भी 61 मौजे लंबित हैं, जो प्रपत्र-08 एवं प्रपत्र-14 के स्तर पर अटके हुए हैं।

निदेशक सुहर्ष भगत ने शेष 61 मौजों में लंबित प्रक्रियाओं को अविलंब पूर्ण करने का सख्त आदेश दिया, ताकि शेखपुरा जिला राज्य रैंकिंग में बेहतर स्थान बनाए रख सके।

अतिथि सम्मान और उपस्थित अधिकारी

बैठक के समापन पर जिले की परंपरा के अनुसार अतिथियों का सम्मान किया गया। जिला पदाधिकारी ने मुख्य अतिथि सुहर्ष भगत को भगवान विष्णु की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त, जिले के विकास और राजस्व कार्यों में बेहतर समन्वय हेतु जिला पदाधिकारी, अपर समाहर्ता और भूमि सुधार उप समाहर्ता को पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस बैठक में राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, अमीन, कानूनगो और सर्वेक्षण कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

आगे क्या होगा?

भू-अभिलेख विभाग के इस सख्त रुख के बाद जिले में सर्वेक्षण कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। 61 लंबित मौजों में कार्य पूर्ण होने के बाद शेखपुरा राज्य की भू-सर्वेक्षण रैंकिंग में ऊपर आ सकता है। यदि गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई तो भूमि विवादों में भी उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।

Point of View

बल्कि यह एक संरचनागत खामी की ओर इशारा करती है जो वर्षों से ग्रामीण भूमि विवादों की जड़ बनती आई है। बिहार में भूमि सुधार की प्रक्रिया दशकों से अधूरी है और ऐसे में जब निदेशक स्तर पर सख्ती आती है तो यह स्वागतयोग्य है, लेकिन सवाल यह भी है कि यह अनियमितता पहले क्यों नहीं पकड़ी गई। राज्य रैंकिंग की होड़ में गुणवत्ता की बलि न चढ़े — यह सुनिश्चित करना प्रशासन की असली जिम्मेदारी है।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

शेखपुरा में भू-सर्वेक्षण समीक्षा बैठक में क्या निर्णय लिए गए?
भू-अभिलेख निदेशक सुहर्ष भगत ने सर्वेक्षण कार्य में लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी और 61 लंबित मौजों को अविलंब पूर्ण करने का आदेश दिया। साथ ही पैतृक भूमि को 'सरकारी जमीन' घोषित करने की अनियमितता की सूक्ष्म जांच के निर्देश दिए गए।
शेखपुरा जिले में कितने मौजों में सर्वेक्षण कार्य पूरा हुआ है?
शेखपुरा जिले के कुल 284 मौजों में से 223 मौजों में प्रपत्र-20 (अंतिम प्रकाशन) का कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष 61 मौजे प्रपत्र-08 और प्रपत्र-14 के स्तर पर लंबित हैं।
पैतृक भूमि को सरकारी जमीन घोषित करने की समस्या क्या है?
बैठक में यह सामने आया कि एक ही पैतृक भूमि में एक भाई की जमीन दर्ज की जा रही है जबकि दूसरे भाई की हिस्सेदारी को 'सरकारी जमीन' बताया जा रहा है। यह भूमि स्वामियों (रैयतों) के साथ गंभीर अन्याय है और भविष्य में विवादों की वजह बन सकता है।
भू-सर्वेक्षण में लापरवाही पर क्या कार्रवाई होगी?
निदेशक सुहर्ष भगत ने स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण कार्य में शिथिलता या लापरवाही बरतने वाले कर्मियों और पदाधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। तकनीकी समस्याओं को छिपाने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सूचित करना अनिवार्य किया गया है।
भू-अभिलेख निदेशक सुहर्ष भगत कौन हैं?
सुहर्ष भगत बिहार में भू-अभिलेख एवं परिमाप विभाग के निदेशक हैं। वे जिलों में विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त कार्यों की निगरानी करते हैं और गुणवत्तापूर्ण भूमि रिकॉर्ड सुनिश्चित करने के लिए नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करते हैं।
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