चिंतन शिविर-2026 में तेलंगाना का कल्याण मॉडल बना देश के लिए मिसाल, मंत्री लक्ष्मण कुमार ने गिनाईं उपलब्धियां
सारांश
Key Takeaways
- चिंतन शिविर-2026 में तेलंगाना का कल्याणकारी मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए मिसाल बना।
- वेलफेयर मिनिस्टर अदलुरी लक्ष्मण कुमार ने चंडीगढ़ में 26 अप्रैल 2025 को यह जानकारी दी।
- पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति पर ₹574.74 करोड़ खर्च कर 33 लाख छात्रों को लाभ पहुंचाया गया।
- एससी उप योजना के तहत दिसंबर 2023 से ₹31,763.63 करोड़ व्यय किए गए; 2025-26 में ₹40,231.62 करोड़ आवंटित।
- कल्याण लक्ष्मी योजना से 47,539 लाभार्थियों को ₹476.15 करोड़ की सहायता दी गई।
- 1,723 अंतरजातीय दंपतियों को सामाजिक एकता के लिए ₹43.06 करोड़ के प्रोत्साहन दिए गए।
हैदराबाद, 26 अप्रैल। तेलंगाना के वेलफेयर मिनिस्टर अदलुरी लक्ष्मण कुमार ने चंडीगढ़ में आयोजित चिंतन शिविर-2026 में ऐलान किया कि तेलंगाना का व्यापक और दूरदर्शी कल्याणकारी मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
चिंतन शिविर में क्या हुआ?
इस सम्मेलन में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), पिछड़ा वर्ग (बीसी), दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के समग्र विकास पर केंद्रित विचार-विमर्श किया गया। सामाजिक न्याय की प्रभावी नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति तैयार करना इस शिविर का मुख्य उद्देश्य था।
मंत्री लक्ष्मण कुमार ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में तेलंगाना ने समानता, सशक्तिकरण और गरिमा को अपने शासन मॉडल की आधारशिला बनाया है। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और डिजिटल शासन उपकरणों के व्यापक उपयोग की जरूरत पर भी जोर दिया।
तेलंगाना की शिक्षा और कल्याण योजनाओं की मुख्य उपलब्धियां
मंत्री ने बताया कि राज्य ने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति पर ₹574.74 करोड़ खर्च कर 33 लाख छात्रों को लाभान्वित किया है। वहीं, प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति पर ₹66.31 करोड़ व्यय से 73,666 छात्रों को सहायता मिली है।
डॉ. बीआर अंबेडकर विदेश शिक्षा कोष के अंतर्गत विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे 564 छात्रों के लिए ₹103.49 करोड़ खर्च किए गए हैं। अनुसूचित जनजाति अध्ययन मंडलों में ₹24.53 करोड़ का निवेश कर 2,426 उम्मीदवारों को सिविल सेवा सहित प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग दी गई है।
अनुसूचित जनजाति छात्रावासों के लिए ₹628.42 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिससे 2.26 लाख छात्रों को निःशुल्क आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कल्याण लक्ष्मी योजना और सामाजिक एकता के प्रयास
कल्याण लक्ष्मी योजना के तहत 47,539 लाभार्थियों को ₹476.15 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई है, जिससे विवाह संबंधी आर्थिक बोझ कम हुआ है। सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए 1,723 अंतरजातीय दंपतियों को ₹43.06 करोड़ के प्रोत्साहन प्रदान किए गए हैं।
मंत्री ने यह भी बताया कि सामाजिक कल्याण विभाग का नाम बदलकर अनुसूचित जाति विकास विभाग किया गया है, जो दलित समुदाय की उन्नति के प्रति राज्य की केंद्रित प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
एससी उप योजना में ऐतिहासिक निवेश
तेलंगाना ने दिसंबर 2023 से एससी उप योजना (एससीएसडीएफ अधिनियम) के तहत ₹31,763.63 करोड़ खर्च किए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में इस मद के लिए ₹40,231.62 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।
गौरतलब है कि तेलंगाना का यह मॉडल ऐसे समय में चर्चा में आया है जब कई राज्य एससी-एसटी कल्याण बजट के कम उपयोग के लिए आलोचना झेल रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना ने न केवल आवंटन बढ़ाया है, बल्कि वास्तविक व्यय भी सुनिश्चित किया है — जो नीति और क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने का प्रयास है।
मंत्री लक्ष्मण कुमार ने अपने संबोधन के अंत में दोहराया कि तेलंगाना कल्याण को खर्च नहीं, बल्कि मानव विकास में दीर्घकालिक निवेश मानता है। आने वाले समय में राज्य की ये नीतियां अन्य राज्यों के लिए नीतिगत प्रेरणा बन सकती हैं और राष्ट्रीय सामाजिक न्याय ढांचे को नई दिशा दे सकती हैं।