गेहूं उत्पादन 2025-26: कोई बड़ा कीट प्रकोप नहीं, हरियाणा-MP में खरीद रिकॉर्ड स्तर पर
सारांश
Key Takeaways
- 2025-26 सीजन में गेहूं 33.4 मिलियन हेक्टेयर में बोया गया — पिछले साल से 6 लाख हेक्टेयर अधिक।
- हरियाणा में अब तक 56.13 LMT गेहूं खरीदा गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 LMT अधिक है।
- मध्य प्रदेश का खरीद लक्ष्य 78 LMT से बढ़ाकर 100 LMT किया गया।
- इस सीजन कोई बड़ा कीट प्रकोप या बीमारी दर्ज नहीं हुई, खरपतवार की समस्या भी न्यूनतम रही।
- फरवरी 2025 में असामान्य गर्मी और बेमौसम ओलावृष्टि से कुछ स्थानीय नुकसान हुआ, लेकिन समग्र नजरिया आशावादी है।
- महाराष्ट्र में 2025-26 के लिए अनुमानित गेहूं उत्पादन 22.90 लाख टन रहने की संभावना।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल 2025 — कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने रविवार को स्पष्ट किया कि 2025-26 रबी सीजन में भारत का गेहूं उत्पादन जलवायु संबंधी कुछ चुनौतियों के बावजूद स्थिर और मजबूत बना हुआ है। मंत्रालय ने मीडिया में उठाई जा रही चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि इस सीजन में कोई बड़ा कीट या बीमारी प्रकोप दर्ज नहीं हुआ और प्रमुख राज्यों में खरीद के आंकड़े उत्साहजनक हैं।
फसल की स्थिति: बुवाई से कटाई तक का सफर
इस सीजन में गेहूं की फसल अनुमानित 3.34 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6 लाख हेक्टेयर अधिक है। समय पर और जल्दी बुवाई की प्रवृत्ति ने फसल को काफी लाभ पहुंचाया। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस अतिरिक्त क्षेत्रफल से स्थानीय स्तर पर हुए नुकसान की भरपाई होने की पूरी संभावना है।
मंत्रालय ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि फसल विकास के महत्वपूर्ण चरणों के दौरान खरपतवारों की समस्या भी न्यूनतम रही, जिससे फसल का समग्र स्वास्थ्य बेहतर बना रहा। उन्नत किस्मों को अपनाने की दर में सुधार के कारण ताप-सहिष्णु और रोग-प्रतिरोधी गेहूं की किस्मों का व्यापक प्रसार हुआ।
मौसमी चुनौतियाँ और उनका प्रभाव
हालांकि यह सीजन पूरी तरह निर्विघ्न नहीं रहा। फरवरी 2025 में असामान्य रूप से उच्च तापमान दर्ज हुआ, जिससे दाना भरने के चरण में कुछ क्षेत्रों में ताप-तनाव (Heat Stress) की स्थिति बनी। इससे कुछ इलाकों में उत्पादकता प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
इसके अतिरिक्त, फसल पकने के समय बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने कुछ स्थानीय क्षेत्रों में अनाज की गुणवत्ता और पैदावार दोनों को प्रभावित किया। बावजूद इसके, सरकारी विशेषज्ञों का समग्र नजरिया सावधानीपूर्वक आशावादी बना हुआ है।
खरीद के आंकड़े: हरियाणा और मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड प्रदर्शन
हरियाणा में गेहूं की मंडी आवक सरकार के निर्धारित 75 लाख मीट्रिक टन (LMT) के लक्ष्य को पहले ही पार कर चुकी है। अब तक 56.13 LMT गेहूं की खरीद हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 9 LMT अधिक है — यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
मध्य प्रदेश में भी पैदावार में मजबूत बढ़ोतरी देखी गई है। राज्य के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने MP का खरीद लक्ष्य 78 LMT से बढ़ाकर 100 LMT कर दिया है। वहीं, महाराष्ट्र में 2025-26 के लिए अनुमानित गेहूं उत्पादन 22.90 लाख टन रहने की संभावना है।
किसानों के अनुकूलन उपाय: बड़ा बदलाव
इस सीजन में किसानों ने जो अनुकूलन रणनीतियाँ अपनाईं, वे उल्लेखनीय हैं। जल्दी बुवाई की प्रथा को बड़े पैमाने पर अपनाने से फसलें गर्मी के आखिरी दौर के तनाव से काफी हद तक बच सकीं। साथ ही, जलवायु-अनुकूल और उच्च उत्पादकता वाली किस्मों को तेजी से अपनाया गया, जिससे फसल की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने ICAR और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से ताप-सहिष्णु गेहूं किस्मों के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। इस निवेश का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।
व्यापक संदर्भ: खाद्य सुरक्षा और वैश्विक परिदृश्य
यह खबर ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर गेहूं की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला अभी भी दबाव में है। ऐसे में भारत का स्थिर घरेलू उत्पादन न केवल राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि केंद्रीय पूल में पर्याप्त भंडार बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीद की यही गति बनी रही तो FCI (भारतीय खाद्य निगम) का बफर स्टॉक संतोषजनक स्तर पर पहुंच सकता है, जिससे आगामी महीनों में उपभोक्ताओं को गेहूं और आटे की कीमतों में राहत मिल सकती है।
आने वाले हफ्तों में पंजाब और उत्तर प्रदेश से खरीद के आंकड़े सामने आने के बाद इस सीजन की समग्र तस्वीर और स्पष्ट होगी। सरकार का अंतिम उत्पादन अनुमान जून 2025 में जारी होने की उम्मीद है।