एनसीबी का 'ऑपरेशन WIPE': ऑनलाइन ड्रग तस्करी के 122 मामले उजागर, बड़ा खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- एनसीबी ने 'ऑपरेशन WIPE' के तहत ऑनलाइन ड्रग तस्करी के 122 मामले उजागर किए।
- चिह्नित 62 पदार्थों में से 58 एनडीपीएस एक्ट और 4 'कंट्रोल्ड सब्सटेंस' श्रेणी में हैं।
- IndiaMart, TradeIndia और Dial4India को औपचारिक नोटिस जारी, संदिग्ध विक्रेता सस्पेंड।
- कर्नाटक के उडुपी में कॉल सेंटर से क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क संचालित था।
- यूएई में बैठे सरगना की पहचान हुई, 3.7 किलोग्राम ट्रामाडोल की जब्ती से मामले की शुरुआत हुई थी।
- यह ऑपरेशन जुलाई 2025 के 'ऑपरेशन MED-MAX' की सफलता पर आधारित है जिसमें US DEA और AFP का सहयोग था।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने डिजिटल माध्यम से बढ़ती ड्रग तस्करी पर लगाम लगाने के लिए 'ऑपरेशन WIPE' (Web-based Illegal Pharmaceutical Enforcement) लॉन्च किया है, जिसमें 122 उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। इस अभियान के तहत 62 नशीले पदार्थों की पहचान की गई है, जिनकी बिक्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए गैर-कानूनी तरीके से की जा रही थी।
ऑपरेशन WIPE: क्या है यह अभियान?
एनडीपीएस एक्ट के तहत नियंत्रित फार्मास्यूटिकल दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री और वितरण को रोकना इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य है। एनसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार, 26 अप्रैल को यह जानकारी दी।
पहचाने गए 62 पदार्थों में से 58 पदार्थ एनडीपीएस एक्ट के दायरे में आते हैं, जबकि 4 पदार्थों को 'कंट्रोल्ड सब्सटेंस' की श्रेणी में रखा गया है। इनमें क्लोनाजेपम, डायजेपम और फेंटानिल जैसी आमतौर पर दुरुपयोग होने वाली दवाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं।
किन प्लेटफॉर्म को भेजे गए नोटिस?
एनसीबी ने संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को औपचारिक नोटिस जारी करते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित पदार्थों की पूरी सूची भी साझा की गई, ताकि ऐसी लिस्टिंग को पहले से ही हटाया जा सके।
एनसीबी के अनुसार, इंडियामार्ट, ट्रेडइंडिया और डॉयल4इंडिया जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म ने जांच के बाद सुधारात्मक कदम उठाए हैं। इनमें फ्लैग किए गए उत्पादों को हटाना और संदिग्ध विक्रेताओं को सस्पेंड करना शामिल है।
तकनीकी निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
एनसीबी की तकनीकी टीमें उभरते खतरों की पहचान के लिए एडवांस्ड टूल्स और अंतरराष्ट्रीय खुफिया इनपुट का उपयोग करते हुए 'सरफेस वेब' पर लगातार निगरानी रख रही हैं। एनसीबी के मुताबिक, यह ऑपरेशन 'प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई' की जगह 'सक्रिय रोकथाम' की रणनीति पर आधारित है — यानी तस्करी होने से पहले ही उसे रोकना।
यह अभियान जुलाई 2025 में चलाए गए 'ऑपरेशन MED-MAX' की सफलता पर आधारित है। उस कार्रवाई में एनसीबी ने अमेरिकी DEA (ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन), AFP (ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस) और अन्य विदेशी एजेंसियों के सहयोग से एशिया, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में फैले एक हाई-टेक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था।
उडुपी कॉल सेंटर से यूएई तक फैला नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ कि इस सिंडिकेट ने कर्नाटक के उडुपी में एक कॉल सेंटर संचालित किया था। वहां से एक प्रमुख ऑनलाइन B2B प्लेटफॉर्म के माध्यम से दुनियाभर से ऑर्डर लिए जाते थे। एनडीपीएस एक्ट के तहत नियंत्रित दवाओं को ऑनलाइन लिस्ट कर, बिना किसी वैध दस्तावेज के ग्राहकों को सीधे आपूर्ति की जाती थी।
भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी, पेपॉल और अन्य रेमिटेंस चैनल का इस्तेमाल किया गया। डिलीवरी के लिए अंतरराष्ट्रीय री-शिपर्स की मदद ली गई। वैश्विक भागीदारों के साथ समन्वित कार्रवाई में यूएई में बैठे सरगना की पहचान हुई, कई गिरफ्तारियां हुईं और विदेशों में गुप्त ठिकानों को नष्ट किया गया।
इस पूरे मामले की शुरुआत भारत में 3.7 किलोग्राम ट्रामाडोल टैबलेट की जब्ती से हुई थी, जिसने एक बड़े संगठित नेटवर्क की परतें उधेड़ दीं।
क्यों है यह ऑपरेशन महत्वपूर्ण?
भारत में ऑनलाइन ड्रग तस्करी एक तेजी से उभरती चुनौती बन रही है। डार्कनेट के बाद अब 'सरफेस वेब' यानी आम इंटरनेट पर B2B और B2C प्लेटफॉर्म के ज़रिए नशीले पदार्थों की बिक्री चिंताजनक रूप से बढ़ी है। ऑपरेशन WIPE इस बात का संकेत है कि एनसीबी अब डिजिटल मोर्चे पर भी उतनी ही सक्रियता से काम कर रही है, जितनी भौतिक क्षेत्र में।
आने वाले समय में एनसीबी और अधिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जांच करेगी और डार्कनेट पर भी नजर बढ़ाने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रोएक्टिव ऑपरेशन ड्रग माफिया के डिजिटल नेटवर्क को तोड़ने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।