उत्तराखण्ड में जल जीवन मिशन 2.0: केंद्र-राज्य एमओयू से 14 लाख ग्रामीण परिवारों को मिलेगा शुद्ध पेयजल

Click to start listening
उत्तराखण्ड में जल जीवन मिशन 2.0: केंद्र-राज्य एमओयू से 14 लाख ग्रामीण परिवारों को मिलेगा शुद्ध पेयजल

सारांश

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केंद्र और उत्तराखण्ड सरकार के बीच हुए एमओयू से राज्य की 16,500 जल योजनाओं को नई ऊर्जा मिलेगी। पर्वतीय चुनौतियों के बीच 14 लाख ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाना इस समझौते का केंद्रीय लक्ष्य है — और सारा के ज़रिए 6,500 जल स्रोतों का पुनरुद्धार इस दिशा में राज्य की गंभीरता दर्शाता है।

Key Takeaways

  • 29 अप्रैल 2026 को जल जीवन मिशन 2.0 के तहत जल शक्ति मंत्रालय और उत्तराखण्ड सरकार के बीच एमओयू हस्ताक्षरित।
  • राज्य में 16,500 जल योजनाएँ स्वीकृत; लक्ष्य 14 लाख ग्रामीण परिवारों तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना।
  • स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (सारा) ने एक वर्ष में 6,500 से अधिक जल स्रोतों का संरक्षण एवं उपचार पूरा किया।
  • लगभग साढ़े तीन मिलियन घन मीटर वर्षा जल का संचयन; 1,000 गाँवों में तालाबों का पुनर्जीवन जारी।
  • केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने राज्य के प्रयासों की सराहना कर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन, जल शक्ति मंत्रालय और उत्तराखण्ड सरकार के बीच 29 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे राज्य की लगभग 14 लाख ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने की योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।

एमओयू का महत्व और दायरा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह एमओयू उत्तराखण्ड में जल जीवन मिशन के कार्यों को नई गति प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय एवं सीमावर्ती राज्य में यह मिशन केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि 14 लाख ग्रामीण परिवारों के जीवन, स्वास्थ्य और सुविधा से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण अभियान है।

राज्य में जल जीवन मिशन के अंतर्गत लगभग 16,500 योजनाएँ स्वीकृत की जा चुकी हैं। अधिकांश योजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि शेष पर कार्य तेज़ी से जारी है।

भौगोलिक चुनौतियाँ और सरकार की प्राथमिकताएँ

धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला राज्य है। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र, दूरस्थ गाँव, भूस्खलन एवं आपदा संवेदनशीलता के कारण यहाँ योजनाओं का क्रियान्वयन सामान्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक जटिल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हिमालय संरक्षण एवं जल स्रोत संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, जल स्रोत संरक्षण अभियान और जनभागीदारी कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालय के दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।

स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (सारा) की भूमिका

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के नौले, धारे एवं वर्षा आधारित नदियों जैसे पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए राज्य में स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (सारा) का गठन किया गया है। विगत एक वर्ष में सारा के माध्यम से राज्य के 6,500 से अधिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं उपचार का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।

इसके साथ ही लगभग साढ़े तीन मिलियन घन मीटर वर्षा जल संचयन कर जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है। जल शक्ति अभियान के माध्यम से 1,000 गाँवों में तालाबों एवं पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन का कार्य भी संचालित किया जा रहा है।

केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और आश्वासन

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने राज्य सरकार द्वारा स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन के माध्यम से जल स्रोतों और नदियों के पुनर्जीवीकरण तथा जल शक्ति अभियान के तहत 1,000 गाँवों में तालाबों के पुनर्जीवन की दिशा में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल शक्ति मंत्रालय द्वारा राज्य को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

इस अवसर पर केन्द्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना, जल शक्ति मंत्रालय के सचिव अशोक कुमार मीणा, अपर सचिव कमल किशोर सोन, संयुक्त सचिव स्वाति मीणा, रेजिडेंट कमिश्नर अजय मिश्रा, वर्चुअल माध्यम से पेयजल सचिव रणवीर सिंह चौहान एवं जल जीवन मिशन के प्रबंध निदेशक रोहित मीणा उपस्थित रहे।

यह एमओयू उत्तराखण्ड के पर्वतीय गाँवों में जल आपूर्ति की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है — अब देखना यह होगा कि ज़मीनी क्रियान्वयन इस महत्वाकांक्षा के अनुरूप गति पकड़ पाता है या नहीं।

Point of View

500 योजनाओं की स्वीकृति प्रभावशाली आँकड़ा है, लेकिन पर्वतीय राज्यों में 'स्वीकृत' और 'कार्यशील' के बीच की खाई अक्सर चौड़ी होती है। सारा के माध्यम से 6,500 जल स्रोतों के उपचार जैसे ज़मीनी प्रयास उत्साहजनक हैं, परंतु असली कसौटी यह है कि इन योजनाओं की दीर्घकालिक रख-रखाव की जिम्मेदारी किसकी होगी — केंद्र, राज्य या स्थानीय निकाय। भूस्खलन-प्रवण और आपदा-संवेदनशील इलाकों में बुनियादी ढाँचे की टिकाऊपन सबसे बड़ी चुनौती बनी रहती है, जिसका उत्तर इस एमओयू में स्पष्ट नहीं है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत उत्तराखण्ड में क्या एमओयू हुआ है?
29 अप्रैल 2026 को जल शक्ति मंत्रालय और उत्तराखण्ड सरकार के बीच जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत एमओयू हस्ताक्षरित हुआ, जिसका उद्देश्य राज्य की 14 लाख ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने की योजनाओं को गति देना है। इस समझौते से 16,500 स्वीकृत जल योजनाओं के क्रियान्वयन में तेज़ी आने की उम्मीद है।
उत्तराखण्ड में जल जीवन मिशन के तहत कितनी योजनाएँ स्वीकृत हैं?
राज्य में जल जीवन मिशन के अंतर्गत लगभग 16,500 योजनाएँ स्वीकृत की गई हैं। अधिकांश योजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं और शेष पर कार्य तेज़ी से जारी है।
स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (सारा) क्या है और इसने क्या हासिल किया है?
सारा उत्तराखण्ड सरकार द्वारा नौले, धारे और वर्षा आधारित नदियों जैसे पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए गठित संस्था है। विगत एक वर्ष में इसने राज्य के 6,500 से अधिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं उपचार का कार्य पूरा किया है।
उत्तराखण्ड में जल योजनाओं के क्रियान्वयन में क्या चुनौतियाँ हैं?
दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र, दूरस्थ गाँव, भूस्खलन और आपदा संवेदनशीलता के कारण उत्तराखण्ड में जल योजनाओं का क्रियान्वयन सामान्य राज्यों की तुलना में अधिक जटिल है। मुख्यमंत्री धामी ने स्वयं इन विषम भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख किया है।
केंद्र सरकार उत्तराखण्ड की जल योजनाओं में क्या सहायता देगी?
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने आश्वासन दिया है कि जल शक्ति मंत्रालय राज्य को हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगा। मंत्री ने राज्य के जल स्रोत पुनर्जीवन और तालाब पुनरुद्धार कार्यों की विशेष सराहना भी की।
Nation Press