भारत-जापान वार्ता: लोगों के बीच संपर्क और आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
जापान में भारत की राजदूत नगमा मलिक ने 18 मई 2026 को टोक्यो में जापान के न्याय मंत्री हिरोशी हीरागुची से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी आदान-प्रदान को गति देने और मानव संसाधन सहयोग पर केंद्रित भारत-जापान एक्शन प्लान के क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर नई ऊँचाई देने की कोशिश में हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जापान स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि राजदूत नगमा मलिक और न्याय मंत्री हीरागुची के बीच हुई बातचीत में ह्यूमन रिसोर्स एक्सचेंज और आपसी हित के अन्य मुद्दों पर सहमति बनी। दूतावास के अनुसार, दोनों पक्षों ने लोगों के बीच लेन-देन को व्यापक बनाने के व्यावहारिक रास्ते तलाशे।
आर्थिक सुरक्षा वार्ता का दूसरा दौर
इससे पहले 11 मई 2026 को नई दिल्ली में भारत-जापान आर्थिक सुरक्षा डायलॉग का दूसरा दौर आयोजित हुआ। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जापान के विदेश मामलों के उपमंत्री ताकेहिरो फुनाकोशी और अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के उपमंत्री ताकेहिको मात्सुओ के साथ इस वार्ता की सह-अध्यक्षता की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर पुष्टि की कि दोनों पक्ष सप्लाई चेन की मजबूती बढ़ाने के लिए रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने पर सहमत हुए।
पाँच प्राथमिकता क्षेत्रों पर फोकस
वार्ता में पिछले वर्ष अगस्त में जारी जापान-भारत संयुक्त बयान में चिह्नित पाँच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया — सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स। जापान के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने निजी क्षेत्र की आवाज़ को ध्यान में रखते हुए ठोस सहयोग को और आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
गौरतलब है कि इस वार्ता में आर्थिक दबाव, गैर-बाज़ार नीतियों और अतिरिक्त उत्पादन जैसी साझा चुनौतियों पर भी दोनों देशों ने अपनी समझ साझा की — जो स्पष्ट रूप से चीन की आर्थिक रणनीति के संदर्भ में देखी जा रही हैं, हालाँकि किसी देश का नाम नहीं लिया गया।
हिंद-प्रशांत और मध्य-पूर्व पर भी नज़र
दोनों देशों के विदेश उप-मंत्रियों के बीच हुई बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र और मध्य-पूर्व के हालात पर भी चर्चा हुई, जिसमें ईरान से जुड़ी स्थिति भी शामिल रही। मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए दोनों पक्ष ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करने और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन को सुदृढ़ बनाने में सहयोग जारी रखने पर सहमत हुए।
आगे की राह
यह बैठकें भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी की बढ़ती गहराई को दर्शाती हैं। जापान-भारत प्राइवेट सेक्टर आर्थिक सुरक्षा वार्ता में उठाए गए मुद्दों और नीतिगत सिफारिशों को आगामी द्विपक्षीय बैठकों में प्राथमिकता दिए जाने की उम्मीद है।