भारत-जापान रक्षा सहयोग: आठवीं आर्मी-टू-आर्मी वार्ता में इंडो-पैसिफिक पर साझा संकल्प
सारांश
Key Takeaways
- 22-24 अप्रैल 2025 को टोक्यो में आठवीं भारत-जापान आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता आयोजित हुई।
- दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पुनः दोहराई।
- भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ से औपचारिक मुलाकात की।
- 10 अप्रैल को विदेश मंत्री जयशंकर और जापानी विदेश मंत्री मोतेगी के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर फोन वार्ता हुई।
- 6 मार्च को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने जापानी पीएम के विशेष सलाहकार सदामासा ओए से रक्षा तकनीक और आर्थिक सुरक्षा पर चर्चा की।
- भारत-जापान क्वाड के सदस्य के रूप में हिंद-प्रशांत में नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं।
टोक्यो, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत और जापान ने 22 से 24 अप्रैल 2025 के बीच टोक्यो में आयोजित आठवीं भारत-जापान आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता के दौरान एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को एक बार फिर रेखांकित किया। दोनों देशों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने और भविष्य में विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में मिलकर काम करने का संकल्प लिया।
आठवीं आर्मी-टू-आर्मी वार्ता: मुख्य बिंदु
भारतीय सेना की एडिशनल डायरेक्टरेट जनरल ऑफ पब्लिक इंफॉर्मेशन (एडीजीपीआई) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों के बीच अत्यंत उपयोगी और रचनात्मक चर्चा संपन्न हुई। इस वार्ता में दोनों देशों के बीच जारी रक्षा सहयोग की व्यापक समीक्षा की गई।
वार्ता में भविष्य की रणनीतिक साझेदारी के लिए रोडमैप तैयार किया गया, जिसमें सैन्य अभ्यास, तकनीकी आदान-प्रदान और सूचना साझाकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ से भी औपचारिक भेंट की।
जयशंकर-मोतेगी फोन वार्ता और होर्मुज जलडमरूमध्य
इस सैन्य वार्ता से पहले 10 अप्रैल को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने जापानी समकक्ष तोशिमित्सु मोतेगी से टेलीफोन पर विस्तृत चर्चा की थी। इस बातचीत में पश्चिम एशिया की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर मंडरा रहे खतरों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
वार्ता के बाद जयशंकर ने 'एक्स' पर लिखा, ''अपने समकक्ष से सार्थक बातचीत हुई और भारतीय नागरिकों की मृत्यु पर संवेदना व्यक्त करने के लिए उनका आभार जताया।'' उल्लेखनीय है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह अत्यंत संवेदनशील समुद्री मार्ग है जो पर्शियन गल्फ को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
जी7 बैठक और विक्रम मिसरी की मुलाकात
पिछले महीने फ्रांस में आयोजित जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भी जयशंकर ने अपने जापानी समकक्ष से द्विपक्षीय वार्ता की थी, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाता है।
इससे पहले 6 मार्च को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने जापान के प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार सदामासा ओए से मुलाकात कर रक्षा तकनीक और आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की थी।
रणनीतिक महत्व और व्यापक संदर्भ
यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर क्षेत्रीय देशों में चिंता गहरी हो रही है। भारत और जापान दोनों क्वाड (QUAD) के सदस्य हैं और दोनों देशों का मानना है कि नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखना उनके साझा हित में है।
गौरतलब है कि भारत और जापान के बीच 2022 में विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और गहरा किया गया था, जिसके तहत रक्षा उपकरण सहयोग, संयुक्त सैन्य अभ्यास और तकनीकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच और अधिक उच्चस्तरीय बैठकें और संयुक्त सैन्य अभ्यास अपेक्षित हैं।