अदाणी एंटरप्राइजेज का अमेरिकी ट्रेजरी से $275 मिलियन का समझौता, ईरान प्रतिबंध उल्लंघन का मामला
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने 18 मई 2026 को घोषणा की कि उसने अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) के साथ ईरान पर लागू प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले में $275 मिलियन (लगभग ₹2,290 करोड़) का सिविल समझौता किया है। यह मामला नवंबर 2023 से जून 2025 के बीच दुबई स्थित एक ट्रेडर के माध्यम से खरीदी गई एलपीजी खेपों से जुड़ा है, जो कथित तौर पर ईरान से आ रही थीं।
मामले की पृष्ठभूमि
जून 2023 में AEL ने एलपीजी बाज़ार में प्रवेश किया और भारतीय ग्राहकों को बेचने के लिए एलपीजी आयात शुरू किया। जुलाई 2023 में AEL के प्रतिनिधियों — जिनमें कंपनी की नई एलपीजी इकाई के प्रमुख भी शामिल थे — ने दुबई स्थित एक ट्रेडिंग कंपनी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। यह कंपनी पहले से एक अन्य भारतीय कंपनी को कथित रूप से ओमान मूल की एलपीजी सप्लाई कर रही थी।
सितंबर 2023 में दुबई सप्लायर ने AEL को सूचित किया कि वह अपनी संबद्ध कंपनी के ज़रिए एलपीजी उपलब्ध करा सकता है। AEL के एक आंतरिक दस्तावेज़ में इस सप्लायर को 'मध्य पूर्व से डिस्काउंटेड एलपीजी' उपलब्ध कराने वाला बताया गया था।
OFAC के अनुसार मुख्य आरोप
OFAC के बयान के अनुसार, नवंबर 2023 से जून 2025 के बीच AEL ने दुबई स्थित ट्रेडर से एलपीजी खेपें खरीदीं, जिसने दावा किया था कि गैस ओमान और इराक से सप्लाई की जा रही है। हालाँकि, OFAC का कहना है कि कई ऐसे संकेत मौजूद थे जिनसे AEL को सतर्क हो जाना चाहिए था कि एलपीजी वास्तव में ईरान से आ रही थी।
इस अवधि के दौरान AEL ने अमेरिकी वित्तीय संस्थानों के ज़रिए 32 अमेरिकी डॉलर-आधारित भुगतान करवाए, जिनकी कुल राशि लगभग $192,104,044 थी। OFAC के अनुसार, मार्च 2023 से फरवरी 2024 के बीच कम से कम चार अलग-अलग मौकों पर तीसरे पक्ष ने AEL को यह चिंता जताई थी कि दुबई सप्लायर की खेपें संभवतः ईरान से आ रही हैं।
AEL का अनुपालन ढाँचा और उसकी सीमाएँ
उस समय AEL, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) के 2020 OFAC प्रतिबंध अनुपालन कार्यक्रम पर निर्भर था, जो ईरानी या प्रतिबंधित जहाज़ों और ईरान से आने वाले कार्गो को APSEZ-नियंत्रित बंदरगाहों में प्रवेश की अनुमति नहीं देता था। AEL ने दुबई सप्लायर और उससे जुड़ी कंपनियों के लिए अपनी सामान्य 'नो योर कस्टमर (KYC)' सत्यापन प्रक्रिया भी अपनाई थी, जिसमें OFAC की स्पेशली डिज़िग्नेटेड नेशनल्स (SDN) और ब्लॉक्ड पर्सन्स सूची में कोई नाम नहीं मिला था।
गौरतलब है कि OFAC के अनुसार, दुबई सप्लायर कई संबद्ध कंपनियों के ज़रिए काम कर रहा था और वास्तव में ईरानी सप्लाई को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में पहुँचाने का माध्यम बना हुआ था — भले ही वह खुद को ओमान और इराक से एलपीजी सप्लाई करने वाला प्रतिष्ठित बिचौलिया बता रहा था।
समझौते का महत्व
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब अदाणी समूह पहले से ही अंतरराष्ट्रीय नियामकीय जाँच के दायरे में रहा है। $275 मिलियन का यह सिविल निपटारा OFAC द्वारा किसी भारतीय कॉर्पोरेट समूह के साथ किए गए बड़े समझौतों में से एक माना जा रहा है। AEL ने संभावित सिविल दायित्वों को निपटाने के लिए इस राशि के भुगतान पर सहमति जताई है, जो कि किसी दोष की स्वीकृति नहीं है।
आगे चलकर यह मामला भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी प्रतिबंध अनुपालन की जटिलताओं को रेखांकित करता है, विशेषकर तब जब वे मध्य पूर्व के ट्रेडरों के माध्यम से ऊर्जा आयात करती हैं।