भू-राजनीतिक संकट के बीच एलपीजी बुकिंग 99% तक पहुँची, 4.93 लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन सक्रिय: सरकार
सारांश
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नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सरकार ने सोमवार को जानकारी दी कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्तिथियों के चलते एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हुई है, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। उद्योग में ऑनलाइन एलपीजी सिलेंडर बुकिंग 99 प्रतिशत के उच्च स्तर तक पहुंच गई है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने एक बयान में बताया कि डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) के माध्यम से डिलीवरी लगभग 92 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे गैस की गलत दिशा में सप्लाई (डायवर्जन) को रोकने में सहायता मिल रही है। यह कोड उपभोक्ताओं के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है।
मंत्रालय ने कहा कि कई एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ने रविवार को भी कार्य किया, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर मिल सके।
कमर्शियल एलपीजी की कुल सप्लाई को बढ़ाकर संकट से पहले के स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक लाया गया है, जिसमें 10 प्रतिशत सुधार से संबंधित अतिरिक्त सप्लाई भी शामिल है।
23 मार्च 2026 से अब तक 5 किलो के फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री 18.45 लाख से अधिक हो चुकी है, जो बढ़ती मांग का संकेत है।
सरकार ने बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति एलपीजी सप्लाई की योजना बना रही है, जो राज्यों और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है। पिछले 5 दिनों में औसतन 7,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन कमर्शियल एलपीजी की बिक्री हुई है।
ऑटो एलपीजी की बिक्री अब निजी कंपनियों से बढ़कर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की ओर बढ़ी है। बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए पीएसयू कंपनियों ने अपनी सप्लाई बढ़ाई है, विशेषकर कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में।
मार्च 2026 से अब तक 4.93 लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन सक्रिय किए गए हैं, जबकि 5.51 लाख से अधिक लोगों ने नए कनेक्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। 19 अप्रैल तक करीब 39,200 उपभोक्ताओं ने मायपीएनजीडी.इन के माध्यम से एलपीजी छोड़कर पीएनजी को अपनाया है।
सरकार के अनुसार, सभी रिफाइनरी पूरी क्षमता पर कार्यरत हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। पेट्रोल और डीजल की भी पर्याप्त मात्रा बनाए रखी गई है, जबकि घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर मांग को पूरा किया जा रहा है।