सारदा घोटाले के आरोपी सुदीप्त सेन को 13 साल बाद मिली जमानत, रिहाई की प्रक्रिया शुरू
सारांश
Key Takeaways
- सुदीप्त सेन को 13 साल बाद जमानत मिली।
- कोर्ट ने बारासात के दो मामलों में जमानत दी।
- सारदा घोटाला एक बड़ा चिटफंड घोटाला है।
- सुदीप्त सेन की गिरफ्तारी 2013 में हुई थी।
- लाखों निवेशक इस घोटाले से प्रभावित हुए।
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सारदा घोटाले के मुख्य आरोपी सुदीप्त सेन को लगभग 13 वर्षों के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट से जमानत प्राप्त हुई है। इस न्यायिक निर्णय के चलते अब उनकी रिहाई की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने बारासात पुलिस स्टेशन में दर्ज दो शेष मामलों में सुदीप्त सेन को जमानत प्रदान की। इस बेंच की अध्यक्षता जस्टिस राजर्षि भारद्वाज कर रहे थे। इन दोनों मामलों में जमानत मिलने के साथ ही सुदीप्त सेन के खिलाफ सभी मुख्य मुकदमों में अब जमानत मिल चुकी है।
सुदीप्त सेन को मार्च 2013 में उत्तरी भारत से गिरफ्तार किया गया था। उस समय उनके साथ देबजानी मुखर्जी भी गिरफ्त में आई थीं। सीबीआई ने उनके खिलाफ कुल 76 मामले दर्ज किए थे। इनमें से अधिकांश मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी थी, और अब केवल बारासात के इन दो मामलों में जमानत शेष थी।
सुदीप्त सेन पिछले 12 साल और 11 महीने से निरंतर हिरासत में रहे हैं। वर्तमान में वे कोलकाता की प्रेसिडेंसी जेल में बंद हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।
ज्ञात हो कि सारदा घोटाला पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा चिटफंड घोटाला माना जाता है। इस घोटाले के तहत सुदीप्त सेन ने सारदा ग्रुप के नाम पर आम जनता से हजारों करोड़ रुपये जमा किए थे। जब यह घोटाला उजागर हुआ, तब लाखों निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। कई लोगों ने अपनी सारी बचत खो दी थी। इस मामले में सुदीप्त सेन को मुख्य आरोपी माना जाता है।
सुदीप्त सेन की गिरफ्तारी के बाद से कई अदालतों में उनके खिलाफ मामले चल रहे थे। सीबीआई और राज्य पुलिस दोनों ने विभिन्न मामलों में शिकायतें दर्ज की थीं। अधिकांश मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी थी, लेकिन बारासात के इन दो मामलों के चलते वे लगातार जेल में रहे।