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सुप्रीम कोर्ट ने आलमगीर आलम और संजीव लाल की जमानत याचिकाएं खारिज की, ट्रायल में तेजी का निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट ने आलमगीर आलम और संजीव लाल की जमानत याचिकाएं खारिज की, ट्रायल में तेजी का निर्देश

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके सचिव संजीव लाल की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने मामले में तेजी लाने का निर्देश दिया है। दोनों आरोपी पिछले डेढ़ साल से जेल में हैं।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने आलमगीर आलम और संजीव लाल की जमानत याचिकाएं खारिज की।
आदालत ने ट्रायल में तेजी लाने का निर्देश दिया।
दोनों आरोपी पिछले डेढ़ साल से जेल में हैं।
ईडी ने 32.20 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की थी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायपालिका का सख्त रुख।

रांची, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर कमीशन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में फंसे पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके निजी सचिव संजीव लाल की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने इन याचिकाओं को अस्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई में तेजी लाने का आदेश दिया है। दोनों आरोपी पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से जेल में हैं।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह की पीठ ने ट्रायल कोर्ट को निर्दिष्ट किया कि वह चार सप्ताह के भीतर मुख्य गवाहों के बयान दर्ज करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई की तिथि तब ही तय की जाएगी जब गवाहों की जांच प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

सुनवाई के दौरान आलमगीर आलम के वकील ने कहा कि उनकी उम्र 76 वर्ष है और उन्हें मई 2024 से न्यायिक हिरासत में रखा गया है। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा बार-बार पूरक आरोपपत्र दाखिल करने से मुकदमे की प्रगति प्रभावित हो रही है और अभी तक अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिली है।

हालांकि, अदालत ने इन तर्कों को अस्वीकार करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया और ट्रायल में तेजी लाने पर जोर दिया। संजीव लाल ने भी इसी आधार पर जमानत की मांग की, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।

ज्ञात हो कि ईडी ने 6 मई 2024 को संजीव लाल और उनके करीबी सहयोगी जहांगीर आलम के ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें ₹32.20 करोड़ नकद बरामद हुए थे। जांच के दौरान संजीव लाल के पास से ₹10.05 लाख नकद और एक डायरी भी मिली थी, जिसमें कथित तौर पर टेंडर कमीशन से संबंधित लेन-देन का विवरण था।

ईडी ने पूछताछ के बाद 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। एजेंसी की जांच में यह पता चला कि विभाग में एक संगठित नेटवर्क कमीशन के रूप में संचालित हो रहा था। आरोप है कि टेंडर आवंटन के बदले ठेकेदारों से कुल मूल्य का लगभग तीन प्रतिशत कमीशन लिया जाता था, जिसे विभिन्न स्तरों पर बांटा जाता था।

ईडी के अनुसार, इस प्रणाली में 1.35 प्रतिशत राशि तत्कालीन मंत्री तक उनके निजी सचिव के माध्यम से पहुंचती थी, जबकि 0.65 से 1 प्रतिशत तक विभागीय सचिव को और शेष राशि अन्य अधिकारियों तथा इंजीनियरों को दी जाती थी। जांच में लगभग 3,048 करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन के मुकाबले ₹90 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई का पता चला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन सभी के लिए एक संदेश है जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। न्यायालय ने ट्रायल में तेजी लाने पर जोर देकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि न्यायिक प्रक्रिया में कोई देरी न हो।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका क्यों खारिज की?
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया।
क्या ईडी ने आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया?
हाँ, प्रवर्तन निदेशालय ने 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था।
टेंडर कमीशन घोटाला क्या है?
टेंडर कमीशन घोटाला एक संगठित नेटवर्क है, जिसमें ठेकेदारों से टेंडर आवंटन के बदले कमीशन लिया जाता है।
क्या आलमगीर आलम की उम्र कितनी है?
आलमगीर आलम की उम्र 76 वर्ष है।
राष्ट्र प्रेस
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