झारखंड टेंडर घोटाला: हाईकोर्ट ने आलमगीर आलम की डिस्चार्ज याचिका खारिज, PMLA कोर्ट में अब तेज होगी सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के बहुचर्चित टेंडर घोटाला मामले में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को झारखंड हाईकोर्ट से एक बार फिर करारा झटका लगा है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने 6 मई 2026 को उनकी वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने पीएमएलए (PMLA) कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज पिटीशन अस्वीकार किए जाने और उनके विरुद्ध आरोप गठन के आदेश को चुनौती दी थी। इस फैसले के साथ ही अब निचली अदालत में आरोप तय होने की प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला झारखंड सरकार की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके ओएसडी संजीव लाल और घरेलू सहायक जहांगीर आलम के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया है। ईडी के अनुसार, सरकारी ठेके आवंटित करने के बदले कमीशन वसूलने के लिए एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था।
छापेमारी में हुई थी करोड़ों की बरामदगी
6 मई 2024 को ईडी ने रांची में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, जहांगीर आलम के आवास से करीब ₹32.2 करोड़ नकद बरामद किए गए। इसके अलावा, संजीव लाल के आवास से ₹10.5 लाख और उनके सचिवालय स्थित कार्यालय से ₹2.3 लाख नकद मिले। छापेमारी के दौरान एक डायरी भी जब्त की गई, जिसमें कथित तौर पर कमीशन के लेन-देन का विस्तृत ब्यौरा दर्ज था।
कमीशन का कथित नेटवर्क कैसे काम करता था
ईडी के आरोपों के मुताबिक, ठेकेदारों को कथित तौर पर कुल ठेके की राशि का लगभग तीन प्रतिशत कमीशन के रूप में देना पड़ता था। इसमें से लगभग 1.35 प्रतिशत राशि कथित तौर पर तत्कालीन मंत्री तक उनके निजी सचिव के माध्यम से पहुँचाई जाती थी। 0.65 से 1 प्रतिशत राशि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों में बाँटी जाती थी, जबकि शेष हिस्सा इंजीनियरों सहित अन्य कर्मचारियों के बीच साझा किया जाता था। गौरतलब है कि 15 मई 2024 को जाँच के बाद आलमगीर आलम को गिरफ्तार कर लिया गया था।
हाईकोर्ट में सुनवाई और फैसला
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने पहले अपना निर्णय सुरक्षित रखा था और बाद में याचिका खारिज कर दी। ईडी की ओर से अधिवक्ता जोहेब हुसेन, एके दास और सौरव कुमार ने पक्ष रखा। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में कई राजनीतिक मामलों में ईडी की कार्रवाई लगातार न्यायिक जाँच के दायरे में है।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट के इस ताज़े फैसले के बाद अब पीएमएलए कोर्ट में आलमगीर आलम के विरुद्ध आरोप तय होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और मामले की सुनवाई में तेजी आने की संभावना है। यह फैसला झारखंड में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में न्यायिक जवाबदेही की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।