झारखंड टेंडर घोटाला: हाईकोर्ट ने आलमगीर आलम की डिस्चार्ज याचिका खारिज, PMLA कोर्ट में अब तेज होगी सुनवाई

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झारखंड टेंडर घोटाला: हाईकोर्ट ने आलमगीर आलम की डिस्चार्ज याचिका खारिज, PMLA कोर्ट में अब तेज होगी सुनवाई

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है — यानी ₹32.2 करोड़ की नकद बरामदगी और कथित कमीशन नेटवर्क से जुड़े इस मामले में अब PMLA कोर्ट में आरोप तय होंगे। यह फैसला झारखंड में राजनीतिक भ्रष्टाचार के मुकदमों में न्यायिक सख्ती का संकेत देता है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की डिस्चार्ज याचिका खारिज की।
6 मई 2024 की ईडी छापेमारी में जहांगीर आलम के आवास से ₹32.2 करोड़ नकद बरामद हुए थे।
ईडी के अनुसार ठेकेदारों से कुल ठेके का तीन प्रतिशत कमीशन लिया जाता था, जिसमें 1.35 प्रतिशत कथित तौर पर मंत्री तक पहुँचता था।
आलमगीर आलम को 15 मई 2024 को गिरफ्तार किया गया था; ईडी ने उनके साथ संजीव लाल और जहांगीर आलम के विरुद्ध भी आरोप पत्र दाखिल किया है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब पीएमएलए कोर्ट में आरोप तय होने की प्रक्रिया तेज होगी।

झारखंड के बहुचर्चित टेंडर घोटाला मामले में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को झारखंड हाईकोर्ट से एक बार फिर करारा झटका लगा है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने 6 मई 2026 को उनकी वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने पीएमएलए (PMLA) कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज पिटीशन अस्वीकार किए जाने और उनके विरुद्ध आरोप गठन के आदेश को चुनौती दी थी। इस फैसले के साथ ही अब निचली अदालत में आरोप तय होने की प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला झारखंड सरकार की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके ओएसडी संजीव लाल और घरेलू सहायक जहांगीर आलम के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया है। ईडी के अनुसार, सरकारी ठेके आवंटित करने के बदले कमीशन वसूलने के लिए एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

छापेमारी में हुई थी करोड़ों की बरामदगी

6 मई 2024 को ईडी ने रांची में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, जहांगीर आलम के आवास से करीब ₹32.2 करोड़ नकद बरामद किए गए। इसके अलावा, संजीव लाल के आवास से ₹10.5 लाख और उनके सचिवालय स्थित कार्यालय से ₹2.3 लाख नकद मिले। छापेमारी के दौरान एक डायरी भी जब्त की गई, जिसमें कथित तौर पर कमीशन के लेन-देन का विस्तृत ब्यौरा दर्ज था।

कमीशन का कथित नेटवर्क कैसे काम करता था

ईडी के आरोपों के मुताबिक, ठेकेदारों को कथित तौर पर कुल ठेके की राशि का लगभग तीन प्रतिशत कमीशन के रूप में देना पड़ता था। इसमें से लगभग 1.35 प्रतिशत राशि कथित तौर पर तत्कालीन मंत्री तक उनके निजी सचिव के माध्यम से पहुँचाई जाती थी। 0.65 से 1 प्रतिशत राशि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों में बाँटी जाती थी, जबकि शेष हिस्सा इंजीनियरों सहित अन्य कर्मचारियों के बीच साझा किया जाता था। गौरतलब है कि 15 मई 2024 को जाँच के बाद आलमगीर आलम को गिरफ्तार कर लिया गया था।

हाईकोर्ट में सुनवाई और फैसला

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने पहले अपना निर्णय सुरक्षित रखा था और बाद में याचिका खारिज कर दी। ईडी की ओर से अधिवक्ता जोहेब हुसेन, एके दास और सौरव कुमार ने पक्ष रखा। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में कई राजनीतिक मामलों में ईडी की कार्रवाई लगातार न्यायिक जाँच के दायरे में है।

आगे क्या होगा

हाईकोर्ट के इस ताज़े फैसले के बाद अब पीएमएलए कोर्ट में आलमगीर आलम के विरुद्ध आरोप तय होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और मामले की सुनवाई में तेजी आने की संभावना है। यह फैसला झारखंड में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में न्यायिक जवाबदेही की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आलमगीर आलम की डिस्चार्ज याचिका क्यों खारिज हुई?
झारखंड हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में यह याचिका खारिज की। आलमगीर आलम ने पीएमएलए कोर्ट द्वारा उनके डिस्चार्ज पिटीशन को अस्वीकार करने और आरोप गठन के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जो अब खारिज हो गई है।
झारखंड टेंडर घोटाला मामला क्या है?
यह मामला झारखंड सरकार की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। ईडी के अनुसार, सरकारी ठेके देने के बदले ठेकेदारों से कुल राशि का तीन प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था और इसे मंत्री, अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच बाँटा जाता था।
ईडी की छापेमारी में क्या मिला था?
6 मई 2024 को रांची में हुई ईडी छापेमारी में जहांगीर आलम के आवास से ₹32.2 करोड़ नकद बरामद हुए। संजीव लाल के घर से ₹10.5 लाख और उनके सचिवालय कार्यालय से ₹2.3 लाख मिले, साथ ही कथित कमीशन लेन-देन का ब्यौरा दर्ज एक डायरी भी जब्त की गई।
आलमगीर आलम को कब गिरफ्तार किया गया था?
प्रवर्तन निदेशालय ने 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। इससे पहले 6 मई 2024 को रांची में बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई थी जिसमें करोड़ों रुपये नकद बरामद हुए थे।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद पीएमएलए कोर्ट में आलमगीर आलम के विरुद्ध आरोप तय होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मामले की सुनवाई तेज होने की संभावना है और अब ट्रायल के अगले चरण में प्रवेश होगा।
राष्ट्र प्रेस
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