आलमगीर आलम दो साल बाद जमानत पर रिहा, बाबूलाल मरांडी ने जश्न को बताया 'बेमानी'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम बुधवार, 14 मई 2025 को रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से जमानत पर रिहा हो गए। ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर कमीशन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में वे करीब दो साल से न्यायिक हिरासत में थे। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत मंजूर किए जाने के बाद उनकी पत्नी निशात आलम जमानतदार बनीं और रिहाई की औपचारिकताएँ पूरी हुईं।
रिहाई में देरी क्यों हुई
सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को ही जमानत का आदेश पारित कर दिया था, किंतु आदेश की प्रति आधिकारिक पोर्टल पर समय पर अपलोड न होने के कारण मंगलवार को रिहाई संभव नहीं हो सकी। निचली अदालत और झारखंड उच्च न्यायालय से राहत न मिलने के बाद आलम ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। उनके निजी सचिव संजीव लाल भी मई 2024 से इसी मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।
जेल के बाहर समर्थकों का जश्न
रिहाई के वक्त बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के बाहर आलम के समर्थकों ने आतिशबाजी की और मिठाइयाँ बाँटीं। इस उत्सव ने राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी।
बाबूलाल मरांडी का तीखा तंज
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस जश्न पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'जमानत पर ऐसा जश्न मनाया जा रहा है मानो कोई क्रांतिकारी आज़ादी की लड़ाई लड़कर लौटा हो। क्या करोड़ों की काली कमाई और गरीबों के हक पर डाका डालना उत्सव मनाने वाली उपलब्धि है?' मरांडी ने स्पष्ट किया कि यह 'बाइज्जत बरी' नहीं, बल्कि उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर मिली महज एक अंतरिम राहत है।
उन्होंने उस प्रकरण की याद दिलाई जब आलम के निजी सचिव के सहायक जहांगीर आलम के घर से कथित तौर पर करीब ₹32.20 करोड़ नकद बरामद हुए थे और नोट गिनने के लिए मशीनें मंगानी पड़ी थीं। मरांडी ने लालू प्रसाद यादव के कानूनी सफर का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार के मामलों की परछाई अंत तक पीछा नहीं छोड़ती।
घोटाले की पृष्ठभूमि
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग में सरकारी टेंडर आवंटित करने के बदले कुल ठेके की राशि का करीब तीन प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था। इसमें से 1.35 प्रतिशत राशि कथित तौर पर तत्कालीन मंत्री तक पहुँचाई जाती थी। 6 मई 2024 को हुई छापेमारी में जहांगीर आलम के आवास से ₹32.2 करोड़ तथा संजीव लाल के आवास और कार्यालय से लाखों रुपए नकद बरामद हुए थे।
इसी मामले में ED ने 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। यह मामला झारखंड के ग्रामीण विकास क्षेत्र में एक संगठित टेंडर कमीशन नेटवर्क से जुड़ा बताया जाता है।
आगे क्या होगा
जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है — मुकदमा अभी जारी है। ED की जाँच और न्यायालय की कार्यवाही के अगले चरण पर सभी की नज़रें टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला झारखंड की राजनीति में आने वाले महीनों तक प्रासंगिक बना रहेगा।