आलमगीर आलम दो साल बाद जमानत पर रिहा, बाबूलाल मरांडी ने जश्न को बताया 'बेमानी'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आलमगीर आलम दो साल बाद जमानत पर रिहा, बाबूलाल मरांडी ने जश्न को बताया 'बेमानी'

सारांश

दो साल की न्यायिक हिरासत के बाद आलमगीर आलम सर्वोच्च न्यायालय की जमानत पर रिहा हुए — लेकिन यह बरी होना नहीं है। ₹32.2 करोड़ की नकद बरामदगी और 1.35% मंत्री-हिस्से के आरोपों के साथ मुकदमा जारी है। जश्न और तंज के बीच असली सवाल यह है कि जाँच कहाँ पहुँचती है।

मुख्य बातें

आलमगीर आलम 14 मई 2025 को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार, रांची से जमानत पर रिहा हुए।
सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत दी; पत्नी निशात आलम जमानतदार बनीं।
आदेश की प्रति पोर्टल पर देर से अपलोड होने के कारण एक दिन की अतिरिक्त देरी हुई।
ED की जाँच के अनुसार, टेंडर राशि का 3% कमीशन वसूला जाता था, जिसमें से 1.35% कथित तौर पर मंत्री तक पहुँचता था।
6 मई 2024 की छापेमारी में ₹32.2 करोड़ नकद बरामद; 15 मई 2024 को आलम गिरफ्तार हुए थे।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जमानत को 'अंतरिम राहत' बताते हुए जश्न को 'बेमानी' करार दिया।

झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम बुधवार, 14 मई 2025 को रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से जमानत पर रिहा हो गए। ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर कमीशन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में वे करीब दो साल से न्यायिक हिरासत में थे। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत मंजूर किए जाने के बाद उनकी पत्नी निशात आलम जमानतदार बनीं और रिहाई की औपचारिकताएँ पूरी हुईं।

रिहाई में देरी क्यों हुई

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को ही जमानत का आदेश पारित कर दिया था, किंतु आदेश की प्रति आधिकारिक पोर्टल पर समय पर अपलोड न होने के कारण मंगलवार को रिहाई संभव नहीं हो सकी। निचली अदालत और झारखंड उच्च न्यायालय से राहत न मिलने के बाद आलम ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। उनके निजी सचिव संजीव लाल भी मई 2024 से इसी मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।

जेल के बाहर समर्थकों का जश्न

रिहाई के वक्त बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के बाहर आलम के समर्थकों ने आतिशबाजी की और मिठाइयाँ बाँटीं। इस उत्सव ने राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी।

बाबूलाल मरांडी का तीखा तंज

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस जश्न पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'जमानत पर ऐसा जश्न मनाया जा रहा है मानो कोई क्रांतिकारी आज़ादी की लड़ाई लड़कर लौटा हो। क्या करोड़ों की काली कमाई और गरीबों के हक पर डाका डालना उत्सव मनाने वाली उपलब्धि है?' मरांडी ने स्पष्ट किया कि यह 'बाइज्जत बरी' नहीं, बल्कि उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर मिली महज एक अंतरिम राहत है।

उन्होंने उस प्रकरण की याद दिलाई जब आलम के निजी सचिव के सहायक जहांगीर आलम के घर से कथित तौर पर करीब ₹32.20 करोड़ नकद बरामद हुए थे और नोट गिनने के लिए मशीनें मंगानी पड़ी थीं। मरांडी ने लालू प्रसाद यादव के कानूनी सफर का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार के मामलों की परछाई अंत तक पीछा नहीं छोड़ती।

घोटाले की पृष्ठभूमि

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग में सरकारी टेंडर आवंटित करने के बदले कुल ठेके की राशि का करीब तीन प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था। इसमें से 1.35 प्रतिशत राशि कथित तौर पर तत्कालीन मंत्री तक पहुँचाई जाती थी। 6 मई 2024 को हुई छापेमारी में जहांगीर आलम के आवास से ₹32.2 करोड़ तथा संजीव लाल के आवास और कार्यालय से लाखों रुपए नकद बरामद हुए थे।

इसी मामले में ED ने 15 मई 2024 को आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। यह मामला झारखंड के ग्रामीण विकास क्षेत्र में एक संगठित टेंडर कमीशन नेटवर्क से जुड़ा बताया जाता है।

आगे क्या होगा

जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है — मुकदमा अभी जारी है। ED की जाँच और न्यायालय की कार्यवाही के अगले चरण पर सभी की नज़रें टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला झारखंड की राजनीति में आने वाले महीनों तक प्रासंगिक बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बरी होने का प्रमाण नहीं — यह अंतर महत्वपूर्ण है जिसे जश्न की आड़ में धुंधला किया जा रहा है। ₹32.2 करोड़ की नकद बरामदगी और संगठित कमीशन नेटवर्क के आरोप अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं। झारखंड में यह पहला मामला नहीं है जहाँ सत्ता के करीबी आरोपियों की जमानत को राजनीतिक विजय की तरह पेश किया गया — यह प्रवृत्ति जवाबदेही की संस्कृति को कमज़ोर करती है। असली कसौटी यह होगी कि ED की जाँच और मुकदमे की सुनवाई किस गति से और किस निष्कर्ष पर पहुँचती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आलमगीर आलम को जमानत क्यों मिली और वे कब रिहा हुए?
सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दी, जिसके बाद 14 मई 2025 को रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से उनकी रिहाई हुई। निचली अदालत और झारखंड उच्च न्यायालय से राहत न मिलने पर उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था।
आलमगीर आलम पर क्या आरोप हैं?
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर आवंटन के बदले 3% कमीशन वसूला जाता था, जिसमें से 1.35% कथित तौर पर तत्कालीन मंत्री तक पहुँचाया जाता था। 6 मई 2024 की छापेमारी में ₹32.2 करोड़ नकद बरामद हुए थे और 15 मई 2024 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
बाबूलाल मरांडी ने जश्न पर क्या कहा?
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि यह 'बाइज्जत बरी' नहीं बल्कि उम्र और बीमारी के आधार पर मिली अंतरिम राहत है। उन्होंने लालू प्रसाद यादव का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार के मामलों की परछाई अंत तक पीछा नहीं छोड़ती।
क्या जमानत मिलने से आलमगीर आलम बरी हो गए?
नहीं। जमानत केवल अस्थायी रिहाई है, बरी होना नहीं। मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर घोटाले का मुकदमा न्यायालय में अभी भी जारी है और ED की जाँच भी चल रही है।
इस मामले में संजीव लाल की क्या भूमिका है?
संजीव लाल आलमगीर आलम के निजी सचिव हैं और मई 2024 से इसी मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। 6 मई 2024 की छापेमारी में उनके आवास और कार्यालय से भी लाखों रुपए नकद बरामद हुए थे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले