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चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर: राम मंदिर ट्रस्ट के चंदा विवाद पर विपक्ष ने मांगी सुप्रीम कोर्ट जांच

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चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर: राम मंदिर ट्रस्ट के चंदा विवाद पर विपक्ष ने मांगी सुप्रीम कोर्ट जांच

सारांश

राम मंदिर ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर कर लिए, लेकिन विपक्ष ने इसे 'बचाने की कोशिश' करार दिया। कांग्रेस, AAP और शिवसेना (UBT) ने एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट निगरानी में स्वतंत्र जांच और पूरे ट्रस्ट के पुनर्गठन की माँग की है।

मुख्य बातें

राम मंदिर ट्रस्ट ने 6 जुलाई को महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे औपचारिक रूप से मंजूर किए।
कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मीडिया के सामने इस्तीफे की स्वीकृति की जानकारी दी।
RSS के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को नया महासचिव नियुक्त किया गया; विपक्ष ने इस पर आपत्ति जताई।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ट्रस्ट भंग कर पुनर्गठन और सुप्रीम कोर्ट निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की।
अरविंद केजरीवाल (AAP) ने कहा — इस्तीफा नहीं, कड़ी सजा चाहिए।
आदित्य ठाकरे (शिवसेना UBT) ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में निष्पक्ष जांच की माँग की।

राम मंदिर ट्रस्ट के चंदा विवाद में 6 जुलाई को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मीडिया को बताया कि महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा — दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। इस्तीफे की स्वीकृति के तत्काल बाद विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई जवाबदेही तय करने के बजाय आरोपियों को बचाने की कोशिश है।

ट्रस्ट का निर्णय और नई नियुक्ति

अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की 6 जुलाई को हुई बैठक में दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे औपचारिक रूप से मंजूर किए गए। साथ ही, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को ट्रस्ट का नया महासचिव नियुक्त किया गया है। विपक्ष ने इस नियुक्ति पर भी तीखी आपत्ति जताई है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि इस्तीफे मंजूर करके ट्रस्ट ने कथित 'चंदा चोरी' की रिपोर्टों को परोक्ष रूप से सत्य स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा, 'यह स्वागत योग्य खबर है कि प्रभु राम के पावन मंदिर से वे लोग हटाए जा रहे हैं जो वर्षों तक इसे लूटते रहे। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।'

खेड़ा ने यह भी सवाल उठाया कि इस्तीफे की घोषणा स्वयं कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने की, जबकि ट्रस्ट के वित्त की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना उन्हीं का दायित्व था। उन्होंने मांग की कि ट्रस्ट को पूरी तरह भंग कर पुनर्गठन किया जाए और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच हो। खेड़ा के अनुसार जवाबदेही केवल ट्रस्ट तक सीमित न रहे — इसे प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार तक भी विस्तारित किया जाना चाहिए।

अन्य विपक्षी दलों की आपत्तियाँ

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हिंदू सनातनी समाज इस्तीफे नहीं, बल्कि कड़ी सजा चाहता है। उनके अनुसार इस्तीफा लेकर आरोपियों को बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि दोनों ट्रस्टियों को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की केंद्र सरकार ने ही नियुक्त किया था। उन्होंने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की माँग की, जिसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय या किसी पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज के हाथ में हो। ठाकरे ने कहा, 'BJP हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकती।'

समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि महंत नृत्य गोपाल दास ने कथित चोरी का मामला सामने आने के लगभग बीस दिन बाद प्रतिक्रिया दी, जबकि उन्हें तत्काल इस मामले में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से जांच की मांग उठानी चाहिए थी।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब पिछले करीब एक महीने से राम मंदिर ट्रस्ट में चंदे की राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर रिपोर्टें सामने आ रही थीं। गौरतलब है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था और इसके सदस्यों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका रही है। नई नियुक्ति पर विपक्ष का कहना है कि जिन पर घोटाले को दबाने के आरोप हैं, उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं है।

आगे क्या होगा

विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की है। अभी तक केंद्र सरकार या ट्रस्ट की ओर से जांच के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद में भी उठने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विवाद को शांत करने में यह कदम अपर्याप्त दिखता है — खासकर तब, जब नई नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या जांच का दायरा केवल दो पदाधिकारियों तक सीमित रहेगा या संस्थागत जवाबदेही तक पहुँचेगा। राम मंदिर आंदोलन दशकों की जन-आस्था पर टिका है; चंदे में कथित अनियमितता उस विश्वास को सीधे चोट पहुँचाती है। बिना स्वतंत्र और पारदर्शी जांच के, यह प्रकरण राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में सिमट कर रह जाएगा — और असली दोषी अनुत्तरित बने रहेंगे।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा क्यों मंजूर किया गया?
राम मंदिर ट्रस्ट में चंदे की राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर पिछले करीब एक महीने से उठ रहे विवाद के बीच 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे मंजूर किए गए। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने इसकी जानकारी मीडिया को दी।
विपक्ष ने इस्तीफे की स्वीकृति पर सवाल क्यों उठाए?
विपक्षी दलों का कहना है कि इस्तीफा स्वीकार करना आरोपियों को बचाने की कोशिश है, न कि वास्तविक जवाबदेही। कांग्रेस ने पूरे ट्रस्ट के पुनर्गठन और सुप्रीम कोर्ट निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की है।
राम मंदिर ट्रस्ट का नया महासचिव कौन है और उस पर क्यों विवाद है?
RSS के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को राम मंदिर ट्रस्ट का नया महासचिव नियुक्त किया गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उन पर स्वयं इस घोटाले को दबाने में भूमिका के आरोप हैं, इसलिए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं है।
विपक्षी दलों ने जांच के लिए क्या माँगें रखी हैं?
कांग्रेस, AAP और शिवसेना (UBT) ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में या किसी पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की देखरेख में स्वतंत्र जांच की मांग की है। कांग्रेस ने यह भी कहा है कि जवाबदेही प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार तक भी तय होनी चाहिए।
राम मंदिर चंदा विवाद क्या है?
पिछले करीब एक महीने से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान की राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर रिपोर्टें सामने आ रही हैं। इन्हीं आरोपों के मद्देनजर चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया, जिसे ट्रस्ट ने 6 जुलाई को मंजूर किया।
राष्ट्र प्रेस
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