राम मंदिर ट्रस्ट बैठक: चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार, कृष्ण मोहन बने कार्यवाहक महासचिव
सारांश
मुख्य बातें
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 7 जुलाई 2025 को अपनी अहम बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिए। नियमित नियुक्ति होने तक ट्रस्टी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बैठक के बाद विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और संत समाज की ओर से विभिन्न प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।
बैठक का माहौल और मुख्य निर्णय
नई दिल्ली में वीएचपी के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने बताया कि ट्रस्ट की यह बैठक बेहद सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि बैठक में मौजूद अधिकांश ट्रस्टी चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन संगठनात्मक आवश्यकता को देखते हुए अंततः इसे स्वीकार किया गया। महंत कमल नयन दास महाराज ने अयोध्या में पुष्टि की कि बैठक में अनिल मिश्रा को लेकर कोई विशेष चर्चा नहीं हुई, जबकि संगठनात्मक जिम्मेदारियों के सुचारु संचालन पर विशेष जोर दिया गया।
जांच प्रक्रिया पर ट्रस्ट का रुख
सुरेंद्र जैन ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के सभी सदस्य चल रही जांच प्रक्रिया से संतुष्ट हैं और उनका मानना है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास कोई तथ्य, दस्तावेज या सबूत हैं, तो उन्हें सार्वजनिक भ्रम फैलाने के बजाय सीधे जांच अधिकारी या एसआईटी के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने इसे पारदर्शी जांच की दिशा में एक अनूठा उदाहरण बताया — जहाँ आरोपितों ने स्वयं एसआईटी जांच की माँग की।
आभूषण और दान सामग्री पर स्पष्टीकरण
राम मंदिर में चढ़ाए गए आभूषणों और दान सामग्री को लेकर उठ रहे सवालों पर सुरेंद्र जैन ने कहा कि ट्रस्ट के पास मौजूद सभी आभूषण पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि चाँदी से संबंधित सामग्री को सरकारी नियमों के तहत गलाकर सरकारी मिंट में सुरक्षित रखा गया है और एक ग्राम भी सामग्री इधर-उधर नहीं हुई है। यदि कोई श्रद्धालु अपने आभूषण को लेकर संदेह में है, तो वह अयोध्या जाकर ट्रस्टियों से समय लेकर स्वयं सत्यापन कर सकता है। जांच में दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया।
सर्च कमेटी और नए सीईओ की तलाश
ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक सर्च कमेटी का गठन किया है, जो न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में नियमित मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की तलाश करेगी। यह समिति देशभर से ऐसे योग्य और पूर्णकालिक व्यक्ति का चयन करेगी, जो ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों का प्रभावी ढंग से संचालन कर सके।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और संत समाज का संदेश
सुरेंद्र जैन ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका पूरा राजनीतिक जीवन भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा रहा है, इसलिए उन्हें हर जगह भ्रष्टाचार ही दिखाई देता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि राम मंदिर को लेकर जनता का विश्वास कम हुआ होता, तो दर्शनार्थियों की संख्या घटती — लेकिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में लगातार रामलला के दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। मुंबई में ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेन्द्र दास महाराज ने भी इस्तीफों की स्वीकृति और कृष्ण मोहन की नई नियुक्ति की पुष्टि की। ट्रस्ट के ये निर्णय राम मंदिर प्रशासन में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देते हैं।