6 जुलाई 2026
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संजीव जैन बनेंगे उत्तर कोरिया में भारत के नए राजदूत, विदेश मंत्रालय ने की आधिकारिक घोषणा

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संजीव जैन बनेंगे उत्तर कोरिया में भारत के नए राजदूत, विदेश मंत्रालय ने की आधिकारिक घोषणा

सारांश

भारत ने उत्तर कोरिया में नया राजदूत नियुक्त किया है। काबो वर्डे में कार्यरत वरिष्ठ राजनयिक संजीव जैन अब प्योंगयांग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह नियुक्ति दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद कोरियाई प्रायद्वीप पर भारत की सक्रिय कूटनीतिक संलग्नता को दर्शाती है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 6 जुलाई 2026 को संजीव जैन को उत्तर कोरिया में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया।
जैन वर्तमान में काबो वर्डे में भारत के राजदूत हैं और वहाँ मुख्यालय रखने वाले पहले भारतीय राजदूत रहे हैं।
वे प्योंगयांग में मौजूदा राजदूत गौरंगलाल दास की जगह लेंगे।
भारत-उत्तर कोरिया राजनयिक संबंध 10 दिसंबर 1973 को स्थापित हुए थे; वाणिज्य दूतावास संबंध 1962 से हैं।
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इसी वर्ष 19-21 अप्रैल को भारत का राजकीय दौरा किया था।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 6 जुलाई 2026 को घोषणा की कि वरिष्ठ भारतीय राजनयिक संजीव जैन को डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (उत्तर कोरिया) में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। वर्तमान में रिपब्लिक ऑफ काबो वर्डे में भारत के राजदूत के रूप में कार्यरत जैन जल्द ही अपना नया कार्यभार संभालेंगे।

मुख्य नियुक्ति विवरण

विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, 'संजीव जैन, जो अभी रिपब्लिक ऑफ काबो वर्डे में भारत के राजदूत हैं, उन्हें डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। उम्मीद है कि वह जल्द ही अपना नया कार्यभार संभालेंगे।' जैन, प्योंगयांग में मौजूदा भारतीय राजदूत गौरंगलाल दास की जगह लेंगे।

संजीव जैन का राजनयिक अनुभव

संजीव जैन काबो वर्डे में भारत के पहले ऐसे राजदूत रहे हैं जिनका मुख्यालय वहीं स्थित था। उन्होंने अपने करियर में दुबई, पेरिस, कैंडी, बर्लिन, टोक्यो और ओसाका स्थित भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है।

काबो वर्डे में नियुक्ति से पूर्व वह विदेश मंत्रालय के मुख्यालय में आसियान देशों से संबंधित विभाग में कार्यरत थे। इसके अलावा, वह गोवा में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सहित कई बहुपक्षीय सम्मेलनों के आयोजन से भी जुड़े रहे हैं। उनके पास संसदीय मामलों, वाणिज्य दूतावास कार्य, प्रेस संबंध, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग, संस्कृति, भारतीय समुदाय मामलों तथा व्यापार एवं वाणिज्य जैसे विविध क्षेत्रों का व्यापक अनुभव है।

भारत-उत्तर कोरिया राजनयिक संबंध

भारत और उत्तर कोरिया के बीच राजनयिक संबंध 10 दिसंबर 1973 को स्थापित हुए थे, जबकि वाणिज्य दूतावास स्तर के संबंध 1962 में शुरू हो गए थे। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत कोरियाई प्रायद्वीप के साथ संतुलित कूटनीतिक संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने इसी वर्ष 19 से 21 अप्रैल के बीच भारत का राजकीय दौरा किया — राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी यह पहली भारत यात्रा थी और पद संभालने के बाद किसी भी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की सबसे शुरुआती भारत यात्रा भी। उनके साथ मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रमुख कंपनियों के सीईओ का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल था।

भारत और दक्षिण कोरिया ने 2010 में अपने संबंधों को 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' का दर्जा दिया था, जिसे 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोल यात्रा के दौरान 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' तक उन्नत किया गया। 2023 में दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया। जैन की नियुक्ति इस सक्रिय द्विपक्षीय कूटनीति के बीच हुई है, जो कोरियाई प्रायद्वीप के दोनों देशों के साथ भारत की संलग्नता को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संदर्भ महत्वपूर्ण है — यह दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के ठीक बाद हुई है, जो कोरियाई प्रायद्वीप के दोनों छोरों के साथ भारत की संतुलित कूटनीति को रेखांकित करती है। उत्तर कोरिया वैश्विक कूटनीतिक अलगाव में है, और भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है जिसके प्योंगयांग के साथ सक्रिय राजनयिक संबंध हैं — यह एक रणनीतिक परिसंपत्ति है जिसे अक्सर कम आँका जाता है। जैन का बहुपक्षीय और एशिया-प्रशांत अनुभव इस संवेदनशील पद के लिए प्रासंगिक है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजीव जैन को उत्तर कोरिया में राजदूत क्यों नियुक्त किया गया?
विदेश मंत्रालय ने 6 जुलाई 2026 को संजीव जैन को उत्तर कोरिया में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया, जो मौजूदा राजदूत गौरंगलाल दास का स्थान लेंगे। जैन के पास दुबई, टोक्यो, बर्लिन और काबो वर्डे समेत कई देशों में राजनयिक अनुभव है।
संजीव जैन इससे पहले कहाँ तैनात थे?
संजीव जैन रिपब्लिक ऑफ काबो वर्डे में भारत के राजदूत थे, जहाँ वे मुख्यालय रखने वाले पहले भारतीय राजदूत थे। इससे पहले वे दुबई, पेरिस, कैंडी, बर्लिन, टोक्यो और ओसाका में भारतीय दूतावासों में कार्य कर चुके हैं।
भारत और उत्तर कोरिया के बीच राजनयिक संबंध कब से हैं?
भारत और उत्तर कोरिया के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध 10 दिसंबर 1973 को स्थापित हुए थे, जबकि वाणिज्य दूतावास स्तर के संबंध 1962 से चले आ रहे हैं।
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा का इस नियुक्ति से क्या संबंध है?
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने 19 से 21 अप्रैल 2026 के बीच भारत का राजकीय दौरा किया था — यह उनकी राष्ट्रपति बनने के बाद पहली भारत यात्रा थी। इस यात्रा के बाद उत्तर कोरिया में नए राजदूत की नियुक्ति कोरियाई प्रायद्वीप के दोनों देशों के साथ भारत की सक्रिय कूटनीति को दर्शाती है।
भारत-दक्षिण कोरिया के बीच 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' क्या है?
भारत और दक्षिण कोरिया ने 2010 में अपने संबंधों को 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' का दर्जा दिया था। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोल यात्रा के दौरान इसे 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' तक उन्नत किया गया। 2023 में दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया।
राष्ट्र प्रेस
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