टोक्यो में भारत-जापान मित्रता को नई ऊर्जा, दूतावास ने डाइट सदस्यों का जताया आभार
सारांश
मुख्य बातें
जापान में भारतीय दूतावास ने 6 जुलाई 2026 को टोक्यो में जापानी संसद (डाइट) के सदस्यों का भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने में दिए गए सहयोग के लिए औपचारिक आभार व्यक्त किया। यह कदम दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
डाइट सदस्यों से मुलाकात
भारतीय दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स मधु सूदन ने संवैधानिक डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रतिनिधि जुनिची मिज़ुओका और उनकी पार्टी के अन्य डाइट सदस्यों का स्वागत किया। दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'भारत और जापान के बीच साझेदारी के लिए आपके मजबूत समर्थन के लिए हम दिल से धन्यवाद करते हैं।'
शिंजो आबे की स्मृति प्रदर्शनी का दौरा
मधु सूदन ने उसी दिन अकी आबे (दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी) के निमंत्रण पर टोक्यो में आयोजित एक रेट्रोस्पेक्टिव प्रदर्शनी का दौरा किया। यह प्रदर्शनी शिंजो आबे के जीवन, उनके नेतृत्व और भारत-जापान संबंधों में उनके योगदान को समर्पित थी।
दूतावास ने बताया कि इस प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शिंजो आबे के लिए भेजा गया शोक संदेश भी प्रदर्शित था। इसके साथ ही, शिंजो आबे द्वारा भारतीय संसद में दिया गया ऐतिहासिक भाषण भी प्रदर्शनी का हिस्सा था, जो दोनों देशों की गहरी मित्रता का प्रतीक है।
आबे की विरासत और भारत-जापान संबंध
दूतावास ने एक्स पर आबे के शब्दों को उद्धृत करते हुए लिखा, 'हमें अपने सपने को खत्म नहीं होने देना चाहिए।' दूतावास ने संकल्प जताया कि भारत-जापान मित्रता और सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले मई में अकी आबे ने स्वयं भारतीय दूतावास का दौरा किया था, जहाँ उन्होंने अपने दिवंगत पति की भारत के प्रति गहरी आत्मीयता और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों को याद किया था। उस अवसर पर राजदूत नगमा एम. मलिक ने उन्हें बताया था कि भारत में लोग आज भी शिंजो आबे को गहरे सम्मान और प्रेम के साथ स्मरण करते हैं।
भारत के लिए शिंजो आबे का महत्व
भारतीय दूतावास ने पहले भी कहा है कि 'पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे, जो जापान के सबसे महान नेताओं में से एक थे, भारत के सच्चे मित्र थे।' उनके कार्यकाल में भारत-जापान संबंध विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के स्तर तक पहुँचे थे। यह कूटनीतिक सक्रियता दर्शाती है कि दोनों देश आबे की विरासत को आगे बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।