अकी आबे का टोक्यो में भारतीय दूतावास दौरा, शिंजो आबे और PM मोदी की दोस्ती को किया याद
सारांश
मुख्य बातें
जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे ने इस सप्ताह टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास का दौरा किया और अपने पति के भारत के प्रति गहरे लगाव तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी विशेष मित्रता को भावपूर्वक स्मरण किया। जापान में भारत की राजदूत नगमा एम. मलिक ने उनका स्वागत किया और इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच स्थायी मैत्री का प्रतीक बताया।
दूतावास की प्रतिक्रिया और बैठक का विवरण
टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास ने शुक्रवार, 22 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी साझा की। दूतावास ने लिखा, 'इस हफ्ते की शुरुआत में दूतावास में अकी आबे का स्वागत करना एक बहुत बड़ा सौभाग्य था। पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे, जो जापान के सबसे महान राजनेताओं में से एक थे, भारत के सच्चे दोस्त थे।'
दूतावास ने आगे बताया कि राजदूत नगमा एम. मलिक ने अकी आबे को यह बताया कि भारत में उनके पति की स्मृति को किस श्रद्धा के साथ संजोया जाता है। बैठक के दौरान अकी आबे ने अपनी चैरिटी गतिविधियों और युवाओं के साथ अपने कार्यों के बारे में भी चर्चा की।
अकी आबे के भावुक शब्द
पिछले सितंबर में टोक्यो में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अकी आबे ने कहा था, 'भारत के साथ मेरे पति के संबंध सिर्फ प्रधानमंत्री के तौर पर उनकी भूमिका से कहीं ज्यादा थे। खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ — वे दोनों सिर्फ एक मुस्कान से एक-दूसरे का अपनापन महसूस कर सकते थे।' उन्होंने यह भी कहा कि उनके पति अनेक मूल्यों को अहमियत देते थे और वे उन्हें अपने तरीके से आगे बढ़ाने की उम्मीद रखती हैं।
भारत-जापान संबंधों में शिंजो आबे का योगदान
गौरतलब है कि शिंजो आबे ने भारत-जापान संबंधों को एक विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के स्तर तक ले जाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री मोदी से उनका परिचय दशकों पुराना था — वे मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री काल से जानते थे। यह व्यक्तिगत निकटता दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती में एक अहम कारक रही।
आबे के निधन पर मोदी की श्रद्धांजलि
2022 में शिंजो आबे के दुखद निधन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें 'अपने सबसे प्यारे दोस्तों में से एक' बताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया था। मोदी आबे के राजकीय अंतिम संस्कार में व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए थे और उन्हें एक महान वैश्विक राजनेता, कुशल नेता और असाधारण शासक की संज्ञा दी थी — जिन्होंने अपना जीवन जापान और विश्व को बेहतर बनाने के लिए समर्पित किया।
आगे की राह
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत और जापान अपनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के प्रयास में हैं। अकी आबे की यह यात्रा केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच उस मानवीय बंधन की याद दिलाती है जो राजनयिक संबंधों की नींव को और मजबूत करता है।